
जैन
परिवार
की
साढ़े
तीन
वर्षीय
बच्ची
वियाना
के
संथारा
का
मामला
हाई
कोर्ट
पहुंच
गया
है।
इसे
लेकर
जनहित
याचिका
दायर
हुई
है।
हाई
कोर्ट
ने
माता-पिता
को
पक्षकार
बनाने
के
आदेश
दिए
है।
याचिका
में
मांग
की
गई
है
कि
नाबालिग
और
मानसिक
रूप
से
अस्वस्थ्य
बच्चों
के
संथारा
पर
रोक
लगाई
जाए।
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याचिका
में
कहा
गया
है
कि
संधारा
के
लिए
संधारा
लेने
वाले
की
सहमति
जरुरी
होती
है,
लेकिन
वियाना
खुद
इस
बारे
में
निर्णय
नहीं
ले
सकती
थी।
उसे
ब्रेन
ट्यूमर
भी
था
और
वह
अस्पताल
में
भर्ती
थी।
आखिर
वह
संथारा
की
सहमति
कैसे
दे
सकती
है।
याचिकाकर्ता
ने
कोर्ट
से
मांग
करते
हुए
कहा
कि
मानसिक
रूप
से
अस्वस्थ्य
बच्चों
के
संथारा
पर
रोक
लगाई
जाए।
यदि
माता-पिता
या
परिवार
के
लोग
इस
तरह
के
बच्चों
को
संथारा
दिलवाते
है
तो
उनके
खिलाफ
कार्रवाई
की
जाए।
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हाई
कोर्ट
ने
याचिकाकर्ता
के
तर्क
सुनने
के
बाद
याचिका
में
वियाना
के
माता-पिता
को
पक्षकार
बनाने
के
आदेश
दिए।
आपको
बता
दे
कि
देश
में
सबसे
छोटी
बच्ची
का
संथारा
लेने
के
मामले
को
काफी
भुनाया
भी
गया
था।
वियाना
के
माता-पिता
को
उत्कृष्ठता
के
लिए
गोल्डन
बुक
आफ
वर्ल्ड
रिकार्ड्स
का
प्रमाण
पत्र
भी
दिया
गया
था।
उसे
दुनिया
की
सबसे
कम
उम्र
की
संथारा
लेने
वाली
बालिका
के
रूप
में
प्रमाणित
भी
किया
है।
इंदौर
में
पिछले
माह
पीयूष
और
वर्षा
जैन
ने
अपनी
बेटी
वियाना
को
संथारा
दिलवाया
था।
वह
अस्पताल
में
वेंंटिलेटर
पर
थी।
यह
मामला
देशभर
में
चर्चित
हुआ था
और उस
पर
बहस
भी
छिड़
गई
थी।