Chhindwara News: धुआडोडा का अजबलाल उईके पर्राडोल नाले में बहा, पेड़ की टहनी पकड़कर बचने की कोशिश भी की

बारिश
ने
एक
और
जिंदगी
लील
ली।
गुरुवार
शाम
जब
गांव
में
लोग
रोजमर्रा
के
कामों
में
व्यस्त
थे,
तब
धुआडोडा
गांव
के
अजबलाल
उईके
जिंदगी
और
मौत
से
जूझ
रहा
था।
वह
पर्राडोल
नाले
में
शौच
के
लिए
गया
था,
लेकिन
अचानक
तेज
बारिश
शुरू
हुई
और
नाला
उफान
पर

गया।
जब
तक
कुछ
समझ
पाता,
बहाव
इतना
तेज
हो
चुका
था
कि
उससे
निकलना
मुश्किल
हो
गया।


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नाले
के
पास
रहने
वाली
मीनाबाई
की
आंखों
के
सामने
ये
हादसा
हुआ।
उन्होंने
बताया
कि
अजबलाल
पानी
से
बाहर
निकलने
की
कोशिश
कर
रहा
था।
उसने
पास
में
लगे
एक
पेड़
की
टहनी
पकड़
ली
थी,
लेकिन
तभी
ऊपर
से
बहकर
एक
और
बड़ी
टहनी
आई,
जिसने
अजबलाल
के
हाथ
से
सहारा
छीन
लिया…
और
वो
पानी
में
समा
गया।


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Samwad
2025: ‘अटलजी
की
स्मृति
में
ग्वालियर
में
होगी
कैबिनेट
की
बैठक’,
मंच
से
सीएम
मोहन
यादव
ने
की
घोषणा


बाइक
मिली
तो
परिजनों
को
हुआ
अनहोनी
का
शक

शाम
तक
जब
वह
घर
नहीं
लौटा
तो
परिजनों
ने
खोजबीन
शुरू
की।
उसकी
बाइक
नाले
के
किनारे
लावारिस
हालत
में
खड़ी
मिली।
अनहोनी
की
आशंका
पर
तत्काल
पुलिस
को
सूचना
दी
गई।

प्रशासन
मौके
पर
पहुंचा,
SDRF
ने
संभाला
मोर्चा

सूचना
मिलते
ही
लावाघोघरी
थाना
पुलिस,
एसडीएम
सुधीर
जैन,
एसडीओपी
राजेश
बंजारे,
तहसीलदार
सहित
प्रशासनिक
अधिकारी
घटनास्थल
पर
पहुंचे।
स्थिति
की
गंभीरता
को
देखते
हुए
SDRF
की
टीम
को
बुलाया
गया।
टीम
ने
तुरंत
सर्च
ऑपरेशन
शुरू
किया,
जो
रातभर
जारी
रहा,
लेकिन
अजबलाल
का
कोई
सुराग
नहीं
मिला।

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Samwad
2025: ‘अमर
उजाला
संवाद’
में
बोले
रवि
किशन-
‘ऑस्कर
में
पक्षपात
होता
है,
हम
लॉबी
का
शिकार
हो
जाते
हैं’


सुबह
फिर
से
शुरू
हुई
तलाश

सुबह
होते
ही
SDRF
की
टीम
ने
दोबारा
तलाशी
शुरू
की
है।
आसपास
के
इलाकों
में
भी
सर्च
ऑपरेशन
चलाया
जा
रहा
है।
तेज
बहाव
और
कीचड़
की
वजह
से
रेस्क्यू
में
लगातार
दिक्कत

रही
है।


स्थानीयों
में
आक्रोश,
बोले-
हर
साल
होती
है
ऐसी
घटनाएं,
लेकिन
पुल
नहीं
बना

ग्रामीणों
ने
प्रशासन
पर
नाराजगी
जताई
है।
उनका
कहना
है
कि
पर्राडोल
नाला
हर
साल
लोगों
के
लिए
जानलेवा
साबित
होता
है,
लेकिन
कोई
स्थायी
पुल
नहीं
बन
रहा।
बारिश
आते
ही
नाले
पर
जान
का
खतरा
मंडराने
लगता
है।
लोगों
ने
प्रशासन
से
जल्द
से
जल्द
स्थायी
पुल
निर्माण
की
मांग
की
है।


बेटे
के
इंतजार
में
मां
की
आंखें
सूख
गईं

अजबलाल
के
बूढ़े
माता-पिता
रातभर
नाले
के
किनारे
बैठकर
उसका
इंतजार
करते
रहे।
मां
बार-बार
सिर्फ
एक
ही
बात
दोहरा
रही
थी–
मेरे
लाल
को
कुछ
नहीं
होना
चाहिए…
वो
तैरना
जानता
है।