
भोपाल
का
90
डिग्री
मोड़
वाला
ओवरब्रिज
पूरे
देश
में
चर्चा
का
विषय
का
बना
हुआ
है।
इस
ब्रिज
को
लेकर
सीएम
डॉ.
मोहन
यादव
ने
पहली
बार
गुरुवार
को
अमर
उजाला
संवाद
में
बयान
दिया
है।
मुख्यमंत्री
ने
कहा
कि
भोपाल
में
90
डिग्री
मोड़
वाले
रेलवे
ओवरब्रिज
के
निर्माण
में
तकनीकी
खामियों
के
लिए
जिम्मेदार
लोगों
के
खिलाफ
कार्रवाई
की
जाएगी।
उन्होंने
कहा
कि
इसका
रिडिजाइन
होने
के
बाद
ही
ओवरब्रिज
का
लोकार्पण
किया
जाएगा।
सीएम
ने
कहा
कि
मेरे
समय
में
यह
ब्रिज
नहीं
बनाया
गया
2022
से
इसका
कार्य
प्रारंभ
हुआ
था।
इसकी
जांच
करवा
रहे
हैं। तकनीकी
खामियों
को
दूर
किया
जाएगा
इसके
बाद
ही
लोकार्पण
किया
जाएगा।
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जिम्मेदारों
पर
होगी
कार्रवाई
होगी
मुख्यमंत्री
डॉ
मोहन
यादव
ने
कहा
कि
90
डिग्री
वाला
ब्रिज
अभी
निर्माणाधीन
है
अभी
उसका
लोकार्पण
नहीं
हुआ
है,
मैंने
निर्देश
दिया
है
कि
जहां
से
कर्व
आया
है,आपत्ति
आई
है
उसे
सुधारा
जाए,
जिससे
उस
पुल
से
निकलने
वालों
को
कोई
परेशानी
ना
हो,
उन्होंने
कहा
इस
निर्माण
से
सबक
लेते
हुए
अब
ये
ध्यान
रखा
जाएगा
कि
आगे
इस
तरह
की
कोई
गलती
ना
हो।
90
डिग्री
मोड़
बना
चिंता
का
विषय
ऐशबाग
ओवरब्रिज
के
90
डिग्री
का
टर्न
को
लेकर
एनएचएआई
और
पीडब्ल्यूडी
की
संयुक्त
जांच
रिपोर्ट
में
भी
चिंता
जाहिर
की
गई
है।
रिपोर्ट
के
अनुसार,
इस
ब्रिज
पर
30-35
किमी
प्रति
घंटे
से
अधिक
की
गति
पर
वाहन
चलाना
जोखिम
भरा
हो
सकता
है।
हालांकि
इसका
अभी
तक
लोकार्पण
नहीं
हुआ
है
कहा
जा
रहा
है
कि
इंजीनियर
इस
पर
अभी
काम
कर
रहे
हैं।
सोशल
मीडिया
पर
ट्रोल
और
मीम्स
की
भरमार
इस
अनोखी
और
अप्रत्याशित
डिजाइन
के
चलते
ऐशबाग
ब्रिज
सोशल
मीडिया
पर
जमकर
ट्रोल
हो
रहा
है।
यूज़र्स
इसे
“रेलिंग-क्रैश
टेस्टिंग
ज़ोन”
और
“टर्निंग
पॉइंट
ऑफ
इंडिया”
जैसे
नाम
दे
रहे
हैं।
कई
मीम्स
में
इसे
रेस
ट्रैक
की
तरह
दिखाया
गया
है,
जिसमें
तेज़
गति
से
टर्न
लेना
मुश्किल
ही
नहीं,
नामुमकिन
बताया
जा
रहा
है।
यह
भी
पढ़ें-70
साल
से
ज्यादा
के
लोकतंत्र
सेनानियों
को
मिलेंगे
आयुष्मान
कार्ड,
सीएम
मोहन
यादव
का
एलान
रेलवे
ने
पहले
ही
जताई
थी
आपत्ति
जानकारी
के
मुताबिक,
ब्रिज
के
निर्माण
के
समय
रेलवे
विभाग
ने
भी
90
डिग्री
टर्निंग
पर
आपत्ति
जताई
थी।
लेकिन
उस
वक्त
पीडब्ल्यूडी
इंजीनियरों
ने
भूमि
की
कमी
का
हवाला
देकर
इसे
आवश्यक
बताया
था।
अब
इस
पूरे
डिजाइन
पर
राजनीतिक
सवाल
भी
उठने
लगे
हैं
और
कांग्रेस
ने
इसे
जनता
की
सुरक्षा
से
खिलवाड़
बताया
है।
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विवाद
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दिव्यांग
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पीट-पीटकर
मार
डाला,
आरोपियों
की
तलाश
जारी
18
करोड़
की
लागत,
अब
तक
अधूरा
प्रोजेक्ट
मई
2022
में
शुरू
हुआ
यह
प्रोजेक्ट
18
करोड़
रुपये
की
लागत
से
बनना
था,
जिसे
18
महीने
में
पूरा
किया
जाना
था,
लेकिन
अब
तक
काम
अधूरा
है।
यह
ब्रिज
648
मीटर
लंबा
और
8
मीटर
चौड़ा
है,
जिसमें
70
मीटर
हिस्सा
रेलवे
की
ज़मीन
पर
आता
है।