
प्रतिवर्ष
अनुसार
इस
वर्ष
भी
पुरी
की
तर्ज
पर
शहर
में
जगदीश
मंदिर
टाट
बाबा
परमार
क्षत्रिय
समाज
ट्रस्ट
के
तत्वावधान
में
शुक्रवार
को
भव्य
रथ
यात्रा
निकाली
गई।
इस
मौके
पर
शहर
के
अनेक
स्थानों
पर
रथ
में
सवार
भगवान
जगन्नाथ,
बहन
सुभद्रा
और
बड़े
भाई
बलदाऊ
का
भव्य
स्वागत
किया
गया।
इस
दौरान
सैकड़ों
की
संख्या
में
श्रद्धालुओं
ने
भगवान
जगन्नाथ
जी
का
रथ
खींचा।
रथ
को
आकर्षक
तरीके
से
सजाया
गया
था
और
प्रतीक
के
तौर
पर
रस्सी
भी
लगाई
थी।
रथ
यात्रा
में
बड़ी
संख्या
में
श्रद्धालु
शामिल
हुए।
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छावनी
स्थित
जगदीश
मंदिर
में
सुबह
यहां
मौजूद
आधा
दर्जन
से
अधिक
पंडितों
ने
गर्भगृह
से
प्रभु
को
निकाला
और
भगवान
जगन्नाथ,
बहन
सुभद्रा
व
बड़े
भाई
बलदाऊ
आदि
का
पूर्ण
विधि-विधान
से
अभिषेक
कराया।
इसके
बाद
महा
आरती
के
पश्चात
बड़ी
संख्या
में
भजन
मंडली
के
द्वारा
ढोल-नगाड़े
के
साथ
भगवान
करीब
तीन
किलोमीटर
से
अधिक
भ्रमण
निकले,
अब
रात्रि
को
शहर
के
मंडी
स्थित
श्रीराम
मंदिर
में
विश्राम
के
बाद
भगवान
को
शनिवार
को
पुन:
शहर
के
छावनी
स्थित
जगदीश
मंदिर
में
विराजमान
किया
जाएगा।
दोपहर
12
बजे
से
शुरू
हुई
रथ
यात्रा,
अनेक
स्थानों
पर
बरसाए
पुष्प
जगदीश
मंदिर
टाट
बाबा
परमार
क्षत्रिय
समाज
ट्रस्ट
के
तत्वावधान
में
भव्य
रथ
यात्रा
इस
साल
भी
आस्था
और
उत्साह
के
साथ
निकाली
गई।
चल
समारोह
के
अध्यक्ष
सुरेश
गब्बर
परमार
ने
दोपहर
बारह
बजे
शहर
के
छावनी
से
जगदीश
मंदिर
से
भगवान
जगन्नाथ
की
रथ
यात्रा
शुरू
हुई।
रथ
में
विराजमान
होने
वाली
भगवान
जगदीश,
बलदाऊ
और
सुभद्रा
की
विशेष
मूर्तियां
का
शृंगार
किया
गया
था।
रथ
यात्रा
दोपहर
जगदीश
मंदिर
सब्जी
मंडी
से
शुरू
होकर
नमक
चौराहा,
बड़ा
बाजार
होते
हुए
शहर
के
मंडी
स्थित
बाबा
मंदिर
पहुंचीं।
इस
दौरान
सैकड़ों
की
संख्या
में
श्रद्धालुओं
ने
भगवान
जगन्नाथ
जी
का
रथ
खींचा।
रथ
को
आकर्षक
तरीके
से
सजाया
गया
था
और
प्रतीक
के
तौर
पर
रस्सी
भी
लगाई
थी।
जिससे
श्रद्धालुओं
के
धक्के
और
रस्सी
खींचने
पर
रथ
आगे
बढ़ा।
इसमें
श्रद्धालुओं
ने
भगवान
जगन्नाथ
का
रथ
खींचा।
रथ
यात्रा
के
दौरान
राधा
कृष्ण
की
जोड़ी
प्रदर्शन
करते
हुए
चल
रबी
थी।
इसके
साथ
ही
उज्जैन
के
कलाकार
डमरू
और
ताशों
के
साथ
आकर्षण
का
केंद्र
थे।
समाज
के
लोग
डांडिया
खेलते
हुए
चल
रहे
थे।
ज्ञात
रहे
कि
परमार
समाज
के
राज
गुरु
232
मंदिरों
के
जीर्णोद्धार
व
अखिल
भारतीय
धर्म
संघ
के
अध्यक्ष
ब्रह्मलीन
श्री
1008
पंडित
काशीप्रसाद
कटारे
की
प्रेरणा
से
इस
मंदिर
का
जीर्णोद्धार
सन
1961
में
परमार
समाज
ने
किया
था।
इसके
बाद
से
यहां
हर
साथ
रथ
यात्रा
निकाली
जा
रही
है।