
मध्य
प्रदेश
भाजपा
प्रदेश
अध्यक्ष
के
चुनाव
के
लिए
नामांकन
प्रक्रिया
मंगलवार
शाम
से
शुरू
हो
जाएगी।
देर
रात
तक
नामांकन
की
अंतिम
सूची
भी
जारी
होने
के
साथ
ही
नए
प्रदेश
अध्यक्ष
के
नाम
भी
सामने
आ
जाएगा।
हालांकि
एक
से
अधिक
प्रत्याशी
रहने
पर
बुधवार
को
चुनाव
की
प्रक्रिया
होगी
और
उसके
बाद
नए
प्रदेश
अध्यक्ष
का
एलान
हो
जाएगा।
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जानकारी
के
अनुसार
भाजपा
प्रदेश
अध्यक्ष
का
चुनाव
निर्विरोध
होने
की
संभावना
है।
इसमें
बैतूल
से
विधायक
और
पूर्व
सांसद
हेमंत
खंडेलवाल
का
नाम
सबसे
आगे
बताया
जा
रहा
है।
हालांकि
आधा
दर्जन
से
अधिक
लोग
प्रदेश
अध्यक्ष
के
पद
के
लिए
दावेदार
माने
जा
रहे
हैं।
मध्यप्रदेश
भाजपा
के
नए
अध्यक्ष
के
सामने
राह
आसान
नहीं
होगी।
वर्ष
2023
के
विधानसभा
चुनाव
में
भाजपा
की
बड़ी
जीत
के
बावजूद
संगठनात्मक
संतुलन
अब
तक
पूरी
तरह
नहीं
बन
पाया
है।
नए
प्रदेश
अध्यक्ष
को
कई
महत्वपूर्ण
मोर्चों
पर
एक
साथ
काम
करना
होगा।
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ये
भी
पढ़ें- भाजपा
प्रदेश
अध्यक्ष
के
लिए
नामांकन
आज,
हेमंत
खंडेलवाल
का
नाम
सबसे
आगे
सत्ता
और
संगठन
के
बीच
समन्वय
बनाना
सबसे
बड़ी
चुनौती
प्रदेश
में
मुख्यमंत्री
बदलने
के
बाद
से
पार्टी
संगठन
और
सरकार
के
बीच
सहज
समन्वय
की
कमी
महसूस
की
जा
रही
है।
नए
अध्यक्ष
को
मुख्यमंत्री
और
सरकार
के
अन्य
मंत्रियों
के
साथ
नीतिगत
तालमेल
बनाना
होगा,
ताकि
दोनों
एक
दिशा
में
कार्य
करें।
मंडल-निगमों
में
नियुक्तियों
को
लेकर
कार्यकर्ताओं
में
असंतोष
सरकार
गठन
के
डेढ़
साल
बाद
भी
निगम-मंडलों
में
राजनीतिक
नियुक्तियां
नहीं
हो
पाई
हैं।
कार्यकर्ताओं
को
लंबे
समय
से
पद
और
जिम्मेदारियों
का
इंतजार
है।
ऐसे
में
नए
प्रदेश
अध्यक्ष
को
यह
सुनिश्चित
करना
होगा
कि
नियुक्तियों
में
क्षेत्रीय
संतुलन,
समाजिक
प्रतिनिधित्व
और
पुरस्कार
व
निष्ठा
का
ध्यान
रखा
जाए।
लगातार
सक्रिय
रहने
वाले
जमीनी
कार्यकर्ता,
जिन्होंने
चुनाव
में
पार्टी
को
जिताने
में
बड़ी
भूमिका
निभाई,
उन्हें
उचित
सम्मान
और
भूमिका
मिलना
अपेक्षित
है।
यदि
उन्हें
दरकिनार
किया
गया,
तो
यह
संगठन
में
अंदरूनी
नाराजगी
का
कारण
बन
सकता
है।
ये
भी
पढ़ें- डॉ.
मोहन
यादव
की
अध्यक्षता
में
कैबिनेट
बैठक
आज,
आरआरयू
कैंपस
को
मिल
सकती
है
हरी
झंडी
2026
नगरीय
निकाय
और
पंचायत
चुनाव
की
तैयारी
भविष्य
की
दृष्टि
से
नए
प्रदेश
अध्यक्ष
को
2026
के
नगरीय
निकाय
और
पंचायत
चुनाव
के
लिए
संगठन
को
मजबूत
बूथ
स्तर
तक
सक्रिय
करना
होगा।
इससे
पहले
की
गलतियों
से
सीख
लेकर
समावेशी
रणनीति
बनानी
होगी।
2028
के
विधानसभा
चुनाव
तक
बड़ी
संख्या
में
नए
वोटर
जुड़ेंगे।
ऐसे
में
युवाओं
के
लिए
पार्टी
को
आकर्षक
कार्यक्रम
और
अभियान
शुरू
करने
की
ज़रूरत
है।
इसकी
जिम्मेदारी
भी
संगठन
प्रमुख
के
पास
रहेगी।
विपक्ष
की
नीतियों
का
जवाब
और
जनता
से
जुड़ाव
कांग्रेस
सहित
अन्य
दलों
के
लगातार
हमलों
और
सोशल
मीडिया
पर
सक्रियता
को
देखते
हुए,
भाजपा
को
अपनी
नीति
को
और
धारदार
बनाना
होगा।
नए
अध्यक्ष
को
जनता
के
बीच
सीधा
संवाद
बढ़ाना
होगा।