
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
की
अध्यक्षता
में
मंत्रि-परिषद
की
बैठक
मंगलवार
को
मंत्रालय
में
सम्पन्न
हुई।
इस
बैठक
में
कई
बड़े
निर्णय
लिए
गए
हैं।
गांधीनगर
(गुजरात)
स्थित
राष्ट्रीय
रक्षा
विश्वविद्यालय
(RRU)
का
कैम्पस
भोपाल
में
खोलने
का
निर्णय
लिया
गया
है।
इस
विश्वविद्यालय
के
लिए
राजीव
गांधी
प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय
(आरजीपीवी)
में
10
एकड़
जमीन
देने
का
निर्णय
लिया
है।
इसके
साथ
ही
प्रधानमंत्री
ग्राम
सड़क
योजना
के
तहत
जर्जर
1766
पुलों
की
मरम्मत
के
लिए
4572
करोड़
रुपए
मंजूर
किए
हैं।
कैबिनेट
ने
वृंदावन
ग्राम
योजना
का
भी
अनुमोदन
कर
दिया
है।
प्रत्येक
विधानसभा
(230)
में
एक
वृंदावन
ग्राम
विकसित
किया
जाएगा।
जिसके
27
मानक
होंगे।
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एक
बगिया
मां
के
नाम
योजना
शुरू
होगी
कैबिनेट
बैठक
के
दौरान
मुख्यमंत्री
डॉ
यादव
ने
कहा
कि
राज्य
सरकार
‘एक
बगिया
मां
के
नाम’
से
नई
योजना
प्रारंभ
करने
जा
रही
है,
जिसमें
स्व-सहायता
समूह
की
30
हजार
महिलाएं
आजीविका
संवर्धन
के
लिए
30
हजार
एकड़
भूमि
पर
30
लाख
उद्यानिकी
पौधों
का
रोपण
करेंगी।
इस
पर
करीब
900
करोड़
रुपए
खर्च
किए
जाएंगे।
उन्होंने
कहा
कि
इस
भूमि
पर
फल
उद्यान
का
विकास
किया
जाएगा।
सीएम ने
बताया
कि
इस
योजना
में
हितग्राहियों
को
पौधे,
खाद,
गड्ढे
खोदने
के
साथ
ही
पौधों
की
सुरक्षा
के
लिए
तारफेंसिंग
और
सिंचाई
के
लिए
जल
कुंड
बनाने
के
लिए
भी
राशि
दी
जाएगी।
उद्यान
विकास
के
लिए
महिला
हितग्राहियों
को
प्रशिक्षण
भी
दिया
जाएगा।
“एक
पेड़
मां
के
नाम”
अभियान
1
जुलाई
से
15
सितंबर
तक
चलाया
जाएगा।
इसमें
पंचायत
एवं
ग्रामीण
विकास,
नगरीय
विकास,
वन,
उद्यानिकी
सहित
सभी
विभाग
सहभागिता
करेंगे
।
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1.23
लाख
मैट्रिक
टन
उड़द
उपार्जन
लक्ष्य
मुख्यमंत्री
डॉ.
यादव
ने
बताया
कि
भारत
सरकार
ने
एमएसपी
पर
मूंग
उपार्जन
के
लिए
3.51
लाख
मैट्रिक
टन
और
उड़द
उपार्जन
के
लिए
1.23
लाख
मैट्रिक
टन
का
लक्ष्य
निर्धारित
किया
है।
मूंग
के
लिए
30
जून
तक
2
लाख
94
हजार
किसानों
और
उड़द
के
लिए
11
हजार
495
किसानों
का
पंजीयन
किया
जा
चुका
है।
पंजीयन
के
लिए
6
जुलाई
तक
तिथि
निर्धारित
है।
मूंग
और
उड़द
का
उपार्जन
7
जुलाई
से
6
अगस्त
तक
किया
जाएगा।
85
हजार
खेत
तालाबों
का
निर्माण
हुआ
बैठक
शुरू
होने
से
पहले
मुख्यमंत्री
ने
प्रदेश
में
जल
गंगा
संवर्धन
अभियान
के
सफल
आयोजन
के
लिए
सभी
को
बधाई
दी।
उन्होंने
बताया
कि
इस
अभियान
के
अंतर्गत
खेत
का
पानी
खेत
में
संचित
करने
के
उद्देश्य
से
प्रदेश
में
85
हजार
से
अधिक
खेत
तालाबों
का
निर्माण
किया
है।
भूजल
संवर्धन
के
लिए
1
लाख
से
अधिक
कुओं
का
पुनर्भरण
किया।
पानी
की
अमृत
बूंद
को
सहेजने
के
लिए
अमृत
सरोवर
2.0
के
तहत
1000
से
अधिक
नए
अमृत
सरोवरों
का
निर्माण
प्रारंभ
हुआ
है।
शहरी
क्षेत्र
में
समाज
की
सहभागिता
से
3300
से
अधिक
जल
स्रोतों
का
पुनर्जीवन,
2200
नालों
की
सफाई
और
4000
वर्षा
जल
संचयन
संरचनाएं
बनाई
गईं।