Umaria News: मंदिर के महंत ने स्कूल में लगा दिया ताला, छात्रों की सड़क पर लगी कक्षा, जानें मामला

Umaria News: मंदिर के महंत ने स्कूल में लगा दिया ताला, छात्रों की सड़क पर लगी कक्षा, जानें मामला

त्रिवेणी
संगम
स्थित
सरस्वती
शिशु
मंदिर
स्कूल
में
उस
समय
अजीब
स्थिति
बन
गई,
जब
मंदिर
ट्रस्ट
के
महंत
दीपक
दास
ने
स्कूल
के
मुख्य
द्वार
और
कक्षाओं
में
ताले
जड़
दिए।
इसके
चलते
छात्र-छात्राओं
को
मजबूरी
में
सड़क
किनारे
चटाई
बिछाकर
पढ़ाई
करनी
पड़ी।


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इस
पूरे
घटनाक्रम
के
पीछे
ज़मीन
को
लेकर
चल
रहा
विवाद
बताया
जा
रहा
है।
महंत
दीपक
दास
ने
दावा
किया
कि
स्कूल
मंदिर
ट्रस्ट
की
भूमि
पर
संचालित
हो
रहा
है।
यह
भूमि
सिर्फ
एक
वर्ष
की
अनुमति
के
तहत
स्कूल
को
दी
गई
थी।
समयसीमा
समाप्त
होने
के
बावजूद
स्कूल
प्रबंधन
ने
भूमि
खाली
नहीं
की।
आरोप
यह
भी
लगाया
गया
कि
स्कूल
प्रबंधन
ने
मंदिर
से
जुड़े
संतों
के
परिसर
में
प्रवेश
पर
रोक
लगा
दी,
जिससे
मंदिर
ट्रस्ट
ने
नाराजगी
जताई।


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घायल

महंत
दीपक
दास
ने
इस
विवाद
को
न्यायालय
में
उठाया
था,
जहां
से
फैसला
मंदिर
ट्रस्ट
के
पक्ष
में
आया।
न्यायालय
के
आदेश
का
हवाला
देते
हुए
ट्रस्ट
ने
स्कूल
में
तालाबंदी
कर
दी।
जब
छात्रों
और
अभिभावकों
को
तालाबंदी
की
जानकारी
हुई
तो
स्थानीय
लोगों
में
आक्रोश
फैल
गया।
छात्रों
को
सड़क
पर
बैठकर
पढ़ते
देख
लोगों
ने
नाराजगी
जताई
और
विरोध
प्रदर्शन
शुरू
कर
दिया।
सूचना
मिलते
ही
प्रशासन
हरकत
में
आया।
एसडीएम
मंडला,
तहसीलदार,
आरआई,
पटवारी
और
महाराजपुर
थाना
प्रभारी
पुलिस
बल
के
साथ
मौके
पर
पहुंचे।
मंदिर ट्रस्ट द्वारा लगाया गया ताला

अधिकारियों
ने
दोनों
पक्षों
से
बातचीत
कर
मामले
को
शांत
करने
की
कोशिश
की।
करीब
दो
घंटे
की
कड़ी
मशक्कत
के
बाद
पंचनामा
तैयार
कर
स्कूल
का
ताला
खुलवाया
गया,
जिससे
बच्चों
की
पढ़ाई
दोबारा
शुरू
हो
सकी।
फिलहाल
स्थिति
सामान्य
बताई
जा
रही
है।
हालांकि
स्कूल
प्रबंधन
का
कहना
है
कि
वे
भी
अब
इस
मामले
में
न्यायालय
का
रुख
करेंगे।
स्कूल
के
प्रधानाचार्य
ने
प्रशासन
से
स्थायी
समाधान
की
मांग
की
है,
ताकि
बच्चों
की
पढ़ाई
प्रभावित

हो।

इस
घटनाक्रम
से
स्थानीय
समुदाय
में
भी
असमंजस
की
स्थिति
बनी
हुई
है।
लोगों
का
कहना
है
कि
ऐसे
विवादों
का
असर
मासूम
छात्रों
की
शिक्षा
पर
नहीं
पड़ना
चाहिए।
उन्होंने
जिला
प्रशासन
से
अपील
की
है
कि
स्थायी
समाधान
के
लिए
जल्द
हस्तक्षेप
किया
जाए।
इस
घटना
ने
एक
बार
फिर
धार्मिक
ट्रस्ट
और
शिक्षण
संस्थानों
के
बीच
स्पष्ट
समझौते
की
आवश्यकता
को
उजागर
कर
दिया
है,
ताकि
भविष्य
में
ऐसी
परिस्थितियां

बनें।