Rajgarh News: राजगढ़ में निकली नाल साहब की अंतिम सवारी, या अली या हुसैन के नारों से गूंजी सड़कें


मध्यप्रदेश
के
राजगढ़
में
परम्परा
के
मुताबिक
मुहर्रम
पर्व
की
7
और
9
तारीख
को
प्रतिवर्ष
शहर
के
पुरा
मोहल्ले
से
परायण
चौक
तक
नाल
साहब
की
सवारी
का
आयोजन
किया
जाता
है,
जिसमें
हजारों
की
तादाद
में
मुस्लिम
धर्मावलंबी
या
अली
या
हुसैन
का
नारा
लगाते
हुए
सड़क
पर
दौड़ते
हैं। उसी
क्रम
में
रविवार
की
शाम
शहर
के
पुरा
मोहल्ले
से
गंज
मुहल्ले
तक
नाल
साहब
की
अंतिम
सवारी
का
विशेष
आयोजन
किया
गया,जिसमे
हजारों
की
संख्या
में
मुस्लिम
धर्मावलंबी
शामिल
हुए,
जो
सड़कों
पर
नाल
साहब
के
साथ
या
अली
या
हुसैन
का
नारा
लगाते
हुए
दौड़
रहे
थे।

बता
दें
शहर
के
पुरा
मोहल्ले
से
शुरू
होने
वाली
नाल
साहब
की
सवारी
पुरे
में
स्थित
ताजियों
वा
उनकी
चौकियों
पर
सलामी
देते
हुए
लगभग
2
से
3
किलोमीटर
का
पैदल
सफर
तय
करते
हुए
गंज
मुहल्ले
का
रुख
करती
है,
जिनमें
मुस्लिम
युवा
बुजुर्ग
वा
बच्चे
बड़ी
संख्या
में
शामिल
होते
हैं।
वहीं
राजगढ़
सहित
आसपास
के
इलाके
की
पुलिस
भी
सुरक्षा
व्यवस्था
में
तैनात
रहती
है
और
सवारी
के
साथ
सड़क
पर
दौड़
लगाती
है,
ताकि
कोई
भी
अप्रिय
घटना
घटित

हो।

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मुख्य
सचिव
बने

पुराने
बस
स्टैंड
से
नाल
साहब
की
सवारी
का
रुख
किला
मोहल्ले
की
और
डायवर्ट
कर
दिया
जाता
है।
किले
में
बनाए
जाने
वाले
बड़े
साहब
के
ताज़िए
को
सलामी
देने
के
बाद
नाल
साहब
की
सवारी
गंज
मुहल्ले
का
रुख
करती
है
और
गणेश
मार्ग
वा
पारायण
चौक
पर
स्थित
ताजियों
की
चौकी
पर
सालामी
दी
जाती
है।
पारायण
चौक
में
सलामी
देने
के
बाद
नाल
साहब
की
सवारी
उसी
रूट
से
वापस
लौट
जाती
है
और
यह
कार्यक्रम
लगभग
दो
घंटे
में
समाप्त
हो
जाता
है।

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ने
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को
साकार
किया

गौरतलब
है
कि
नाल
साहब
की
सवारी
में
शामिल
होने
वाली
भीड़
की
संख्या
हज़ारों
की
तादाद
में
होती
है,
जिसमें
शांति
और
कानून
व्यवस्था
कायम
रखने
के
लिए
जिला
वा
पुलिस
प्रशासन
पूरी
तरह
से
मुस्तैद
रहता
है।
वहीं
रात
में
निकलने
वाली
नाल
साहब
की
सवारी
के
रूट
पर
सड़क
की
सफाई
और
रोशनी
की
व्यवस्था
स्थानीय
प्रशासन
की
होती
है।
रविवार
को
नाल
साहब
की
अंतिम
सवारी
राजगढ़
शहर
में
निकाली
गई।
रातभर
ताजियों
के
जुलूस
और
अखाड़े
के
आयोजन
के
बाद
सोमवार
की
सुबह
मेहंदी
वाले
बाबा
के
यहां
स्थित
कर्बला
नामक
घाट
पर
ताजियों
का
विसर्जन
कर
दिया
जाएगा।