Bhopal: मंत्री के बंगले के सामने निजी स्कूल संचालकों ने किया प्रदर्शन, बोले-स्कूलों में ताला लगाने की नौबत


मध्य
प्रदेश
में शिक्षा
विभाग
के
नए
नियमों
से
छोटे
और
मध्यम
प्राइवेट
निजी
स्कूलों
की
स्थिति
खराब
हो
गई
है।
संचालकों
का
कहना
है
कि
स्कूलों
में
ताला
लगाने
की
नौबत

गई
है।
मध्य
प्रदेश
प्राइवेट
स्कूल
वेलफेयर
संचालक
मंच
ने
इसके
विरोध
में
बुधवार
को
74
बंगला
स्थित
स्कूल
शिक्षा
मंत्री
राव
उदय
प्रताप
सिंह
के
घर
के
बाहर
प्रदर्शन
किया।
हलाकि
मंत्री
संचालकों
नहीं
मिले,
औऱ
ना
ही
पुलिस
ने
उन्हें
यहां
रुकने
की
अनुमति
दी।
जिसके
सभी
सभी
संचालक
वापस
चले
गए
और
कहा
है
कि
अब
वो
कोट
में
जाएंगे। इस
दौरान
रीवा,
जबलपुर,
सागर
समेत
प्रदेशभर
से
प्रभावित
निजी
स्कूल
संचालक
एकत्र
हुए।


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छोटे
स्कूलों
के
लिए
असंभव

मध्य
प्रदेश
प्राइवेट
स्कूल
वेलफेयर
संचालक
मंच
के
प्रदेश
अध्यक्ष
शैलेष
तिवारी
ने
बताया
कि
सरकार
ने
मान्यता
के
लिए
कई
ऐसे
नियम
थोप
दिए
हैं,
जो
छोटे
स्कूलों
के
लिए
असंभव
हैं।
इनमें
रजिस्टर्ड
किरायानामा,
सुरक्षा
निधि
और
भारी-भरकम
मान्यता
शुल्क
प्रमुख
हैं।
रजिस्टर्ड
किरायानामा
सबसे
बड़ी
समस्या
बनकर
उभरा
है,
क्योंकि
मकान
मालिक
इसके
लिए
तैयार
नहीं
हो
रहे
या
फिर
किराया
और
एडवांस
बढ़ाने
की
मांग
कर
रहे
हैं।
नए
भवन
में
स्कूल
बदलना
भी
एक
महीने
में
संभव
नहीं
है
और
खुद
की
जमीन
पर
बिल्डिंग
बनाना
तो
दूर
की
बात
है।


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4,820
स्कूलों
ने
मान्यता
के
लिए
नहीं
किया आवेदन

तिवारी
ने
बताया
कि
सरकार
की
तानाशाही
और
अव्यवहारिक
नियमों
के
चलते
4,820
स्कूलों
ने
मान्यता
के
लिए
आवेदन
ही
नहीं
किया
है।
इससे
60
से
70
हजार
शिक्षकों
के
बेरोजगार
होने
और
शिक्षा
का
अधिकार
अधिनियम
(RTE)
के
तहत
पढ़ने
वाले
सवा
लाख
से
अधिक
गरीब
बच्चों
के
शिक्षा
से
वंचित
होने
का
खतरा
मंडरा
रहा
है।


ईमानदारी
से
अपनी
बात
रख
रहे
हैं,
तो
कोई
सुनवाई
नहीं

जबलपुर
से
आए
निजी
स्कूल
संचालकों
ने
आरोप
लगाया
कि
अब
नियम
है
कि
रजिस्टर्ड
किरायानामा
जमा
करना
होगा।
इसके
बाद
भी
कई
स्कूलों
ने
पुराने
तरीके
वाला
सामान्य
किरायानामा
ही
पोर्टल
पर
जमा
किया,
उन्हें
मान्यता
भी
दे
दी
गई।
हम
ईमानदारी
से
अपनी
बात
रख
रहे
हैं,
तो
कोई
सुनवाई
नहीं
हो
रही।
22
दिन
पहले
हमने
राज्य
शिक्षा
केंद्र
के
सामने
भी
प्रदर्शन
किया
था।
अब
तक
अधिकारियों
से
लेकर
जिम्मेदार
लगातार
हमारी
मांगों
को
नजरअंदाज
करते

रहे
हैं।


यह
भी
पढ़ें-उज्जैन
में
सोमवार
को
स्कूलों
में
छुट्टी
पर
विधायक
आरिफ
मसूद
ने
खड़े
किए
सवाल,
मंत्री
सारंग
का
पलटवार


प्राइवेट
स्कूलों
को
आर्थिक
रूप
से
कमजोर
करने
की साजिश

संचालक
मंच
के
कोषाध्यक्ष
मोनू
तोमर
ने
कहा
कि
यह
सब
प्राइवेट
स्कूलों
को
आर्थिक
रूप
से
कमजोर
करने
की
सोची-समझी
साजिश
है।
सरकार
पिछले
कई
साल
से
RTE
के
तहत
गरीब
बच्चों
की
फीस
का
भुगतान
भी
नहीं
कर
रही
है।
2016
से
2022
तक
के
पैसे
भी
अधिकांश
स्कूलों
को
नहीं
मिले
हैं,
जबकि
वे
खुद
एक
दिन
की
देरी
पर
स्कूलों
पर
जुर्माना
लगा
देते
हैं।
उन्होंने
सवाल
किया
कि
जब
2011
में
नोटरी
कृत
किराए-नामे
पर
मान्यता
मिल
जाती
थी,
तो
अब
शिक्षा
मंत्री
उदय
प्रताप
सिंह
ने
ये
नए
नियम
क्यों
थोपे
हैं?
यह
सिर्फ
राजस्व
बढ़ाने
और
बड़े-बड़े
स्कूलों
को
फायदा
पहुंचाने
की
कोशिश
है।


यह
भी
पढ़ें-किसानों
को
राहत,
जल
कर
माफ,
49
हजार
से
अधिक
पद
मंजूर,
विदेश
जाएंगे
CM


स्कूलों
को
बंद
करने
का
दबाव

मोनू
तोमर
ने
कहा
कि
इन
नियमों
के
विरोध
में
4,820
स्कूलों
ने
शुरू
से
ही
मान्यता
के
लिए
आवेदन
नहीं
किया
है।
इन
स्कूलों
को
बंद
करने
का
दबाव
बनाया
जा
रहा
है,
जबकि
संचालक
इन्हें
चलाना
चाहते
हैं।
मोनू
तोमर
ने
कहा
कि
भोपाल
में
इकट्ठा
हुए
सभी
प्राइवेट
स्कूल
संचालकों
ने
चेतावनी
दी
है
कि
अगर
मान्यता
पोर्टल
नहीं
खोला
गया
और
RTE
का
पुराना

दो
साल
से
रुका
हुआ
पैसा
नहीं
मिला,
तो
वे
अनिश्चितकालीन
हड़ताल
करेंगे
और
उग्र
आंदोलन
छेड़ेंगे।