भ्रष्टाचार: MP के अफसरों ने एक घंटे में खा लिए 14 किलो ड्रायफ्रूट्स, छह लीटर दूध की चाय में डाली पांच KG चीनी


मध्य
प्रदेश
में
नित
नए
भ्रष्टाचार
के
मामले
सामने

रहे
हैं।
हाल
ही
में
सामने
आए
ऑइल
पेंट
घोटाले
की
चर्चा
रुक
भी
नहीं
सकी
अब
नया
मामला
सामने

गया।
मामला
शहडोल
का
है। 


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जल
गंगा
संवर्धन
अभियान
के
तहत
आयोजित
एक
कार्यक्रम
में
मध्यप्रदेश
के
आला
अधिकारियों
के
द्वारा
की
गई
अनियमितताओं
का
मामला
प्रकाश
में
आया
है।
शहडोल
के
गोहपारू
ब्लॉक
के
भदवाही
ग्राम
पंचायत
में
आयोजित
इस
कार्यक्रम
के
दौरान,
अधिकारियों
ने
मात्र
एक
घंटे
में
14
किलो
ड्रायफ्रूट्स
का
सेवन
कर
लिया,
जिसका
खर्च
जनता
के
पैसों
से
उठाया
गया।
इस
कार्यक्रम
में
कलेक्टर,
जिला
पंचायत
सीईओ,
एसडीएम
और
अन्य
कई
आला
अधिकारी
शामिल
हुए
थे।
इन
अधिकारियों
ने
5
किलो
काजू,
6
किलो
बादाम
और
3
किलो
किसमिस
खाकर
एक
अनोखा
रिकॉर्ड
बनाया।
इसके
अलावा,
उन्होंने
6
लीटर
दूध
में
5
किलो
शक्कर
मिलाकर
चाय
का
भी
सेवन
किया।
इस
आयोजन
का
आयोजन
भदवाही
ग्राम
पंचायत
द्वारा
किया
गया
था,
जिसके
लिए
दी
गई
राशि
का
भुगतान
विवादित
बिलों
के
माध्यम
से
किया
गया
है।


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पेंट
घोटाला,
जानें
पूरा
मामला


जल
गंगा
संवर्धन
अभियान
क्या
है?

मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
के
नेतृत्व
में
जल
गंगा
संवर्धन
अभियान
का
उद्देश्य
गांवों
में
जल
संरचनाओं
की
सफाई
करना
है।
इस
अभियान
के
तहत
सरकार
ने
गांवों
में
कुएं,
तालाब
और
नदियों
की
सफाई
का
कार्य
शुरू
किया
है।
हाल
ही
में
मुख्यमंत्री
ने
इस
अभियान
की
प्रगति
की
जानकारी
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
को
दी
थी।

भदवाही
में
क्या
हुआ?

भदवाही
ग्राम
पंचायत
में
जल
चौपाल
का
आयोजन
किया
गया,
जिसमें
अधिकारी
और
ग्रामीण
दोनों
शामिल
हुए।
पता
चला
है
कि
इस
आयोजन
में
सर्व
किया
गया
भोजन
खिचड़े,
पूड़ी
और
सब्जी
के
रूप
में
था,
जबकि
अधिकारियों
के
नाम
पर
जो
बिल
जारी
किए
गए
उसमें
ड्रायफ्रूट्स
का
खर्च
दिखाया
गया।
यह
भी
चर्चा
है
कि
अधिकारियों
के
आगमन
के
लिए
ग्राम
पंचायत
ने
उचित
व्यवस्था
की
थी,
लेकिन
यह
सब
सरकारी
धन
के
दुरुपयोग
की
कहानी
बयां
करता
है।

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व्यवस्था
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तरह
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बगैया-बंगवार
पुल
बहा


फर्जी
बिलिंग
का
मामला

सरकारी
दस्तावेजों
के
अनुसार,
13
किलो
ड्रायफ्रूट्स
के
लिए
19,010
रुपये
का
भुगतान
किया
गया,
जिसमें
अन्य
सामग्री
जैसे
30
किलो
नमकीन
और
20
पैकेट
बिस्कुट
का
भी
खर्च
शामिल
है।
इस
मामले
में
सबसे
चौंकाने
वाला
तथ्य
यह
है
कि
काजू
की
कीमत
में
भारी
अंतर
देखा
गया
है।
एक
किलो
काजू
1000
रुपये
में
खरीदा
गया,
जबकि
उसी
दिन
एक
अन्य
विक्रेता
से
काजू
600
रुपये
प्रति
किलो
में
उपलब्ध
था। मुद्रिका
सिंह,
प्रभारी
जिला
पंचायत
सीईओ
ने
कहा
 कार्यक्रम
में
मैं
खुद
मौजूद
था,
लेकिन
मुझे
जानकारी
नहीं
है
पता
करता
हूं।