Bhopal: बच्ची के रीढ़ की हड्डी में भर गया था 1 लीटर मवाद,हमीदिया में हुई जटिल सर्जरी,दिल्ली से मगानी पड़ी मशीन


बड़ी
बीमारी
होने
पर
लोग
निजी
अस्पतालों
की
ओर
रुख
करते
हैं।
वहीं
दूसरी
तरफ
राजधानी
भोपाल
के
सबसे
बड़े
सरकारी
अस्पताल
हमीदिया
के
चिकित्सकों
ने
एक
15
साल
की
बच्ची
की
जटिल
सर्जरी
कर
उसको
नया
जीवन
दिया
है
दरअसल भोपाल
में
एक 15
वर्ष
की
बच्ची
इशरा
खान
की
रीढ़
की
हड्डी
में
टीबी
के
चलते
हड्डी
में
अत्याधिक
मवाद
भर
गया
था।
जिससे
रीढ़
की
हड्डी
पूरी
तरह
गल
चुकी
थी
और
हड्डी
में
विकृति
जिसे
कूबड़
भी
कहा
जाता
है,
निकल
आया
था।
इशरा
भोपाल
के
एक
निज
अस्पताल
में
भर्ती
थी
लेकिन
सुधार
नहीं
हो
रहा
था। इशरा
के
पिता
रईस
खॉन
जो
कि
एक
निजी
कंपनी
में
माली
का
कार्य
करते
है।
कंपनी
के
एमडी
के
सलाहं 
पर
मरीज
को
हमीदिया
अस्पताल
में
भर्ती
करया
गया
और
यहां
के
चिकित्सकों
ने
मरीज
का
जटिल
सर्जरी
कर
पूरी
तरह
ठीक
कर
दिया।
मरीज
को
गुरुवार
को
अस्पताल
से
डिस्चार्ज
कर
दिया
गया
है। 


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खराब
हो
सकते
थे
दोनो
पैर

हमीदिया
के
चिकित्सकों
ने
बताया
कि मरीज
की
संपूर्ण
जांच
के
बाद
रीढ़
की
हड्डी
का
ऑपरेशन
किया
गया।
ऑपरेशन
के
दौरान
लगभग
1
लीटर
से
अधिक
मवाद
निकाला
गया
एवं
कूबड़
हुई
टेड़ी
हड्डी
को
पेडिकल
स्क्रू
तकनीक
एवं
रॉड
के
सहारे
सीधा
किया
गया।
अत्यधिक
चुनौती
यह
थी
कि
ऑपरेशन
के
दौरान
एवं
हड्डी
सीधी
करने
पर
रीढ़
की
हड्डी
की
नस
यदि
दब
जाती
तो
इशरा
के
दोनों
पैर
की
ताकत
जाने
का
खतरा
होता
है।


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दूध
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चाय
में
डाली
पांच
KG
चीनी


दिल्ली
से
बुलाई
मशीन

हमीदिया
चिकित्सालय
के अधीक्षक द्वारा
दिल्ली
से
विशेष
रूप
से
मल्टी
मोडल
सिस्टम
फॉर
इन्ट्रा
ऑपरेटिव
मॉनीटर
की
मशीन
बुलाई
गई,
जो
कि
ऑपरेशन
के
दौरान
मस्तिष्क,
रीढ़
की
हड्डी
एवं
पैरों
की
नसों
को
मॉनीटर
करती
रहती
है,
जिससे
कि
किसी
भी
नस
की
ताकत
ऑपरेशन
के
दौरान
मॉनीटर
की
जा
सकती
है।
लगभग
2
घण्टे
में
ऑपरेशन
पूर्ण
किया
गया
और
इशरा
पूर्णतः
स्वस्थ्य
होकर
चलने
भी
लगी
है।
वह
गुरुवार
को
हमीदिया
चिकित्सालय
से
डिस्चार्ज
की
गई
है। इस
चुनौतीपूर्ण
कार्य
को
अस्थिरोग
विभाग
की
टीम
डॉ.
वैभव
जैन,
डॉ.
राहुल
वर्मा,
डॉ.
आशीष
गोहिया
एवं
डॉ.
सुनीत
टण्डन
द्वारा
सम्पूर्ण
किया
गया,
जिसमें
विशेष
सहयोग
निश्चेतना
विभाग
के
डॉ.
ट्यूिंकल
केवल,
डॉ.
उर्मिला
केसरी,
डॉ.
आरपी
कौशल
द्वारा
प्रदान
किया
गया।

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ट्रैक
पर
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किया
पानी,रेलवे
ने
जताई
आपत्ति


पिता
बोले-हम
तो
बिल्कुल
निराश
हो
चुके
थे

इशरा
का
सम्पूर्ण
ईलाज
आयुष्मान
भारत
योजना
के
अंतर्गत
पूरी
तरह
निःशुल्क
किया
गया
है।
मरीज
के
परिजनों
ने
भी
अस्पताल
प्रशासन
और
डॉक्टर्स
के
प्रति
गहरा
आभार
व्यक्त
किया।
मरीज
के
पिता
ने
कहा,
हम
तो
बिल्कुल
निराश
नेराश
हो
चुके
थे।
इस
अस्पताल
ने
हमारी
बेटी
को
एक
नई
जिंदगी
दी
है”-
रईस
खॉन,
इशरा
के
पिता