
श्रावण
मास
की
शुरुआत
के
साथ
ही
उज्जैन
स्थित
विश्वप्रसिद्ध
श्री
महाकालेश्वर
मंदिर
में
श्रद्धालुओं
की
भारी
भीड़
उमड़
रही
है।
7
जुलाई
से
लेकर
13
जुलाई
2025
तक
करीब
11
लाख
6
हजार
270
श्रद्धालु
बाबा
महाकाल
के
दर्शन
कर
चुके
हैं।
यही
नहीं,
श्रद्धालुओं
की
सुविधा
के
लिए
मंदिर
प्रबंधन
ने
अतिशीघ्र
दर्शन
व्यवस्था
को
भी
प्रभावी
रूप
से
लागू
किया
है,
जिससे
भक्त
बिना
लंबा
इंतजार
किए
भगवान
के
दर्शन
कर
पा
रहे
हैं।
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भस्म
आरती
के
दर्शन
में
भी
भारी
संख्या
मंदिर
प्रशासन
के
अनुसार,
26,996
श्रद्धालुओं
ने
इस
अवधि
में
चलित
भस्म
आरती
में
भाग
लिया।
श्रावण
के
पहले
सोमवार
को
ही
4498
भक्तों
ने
प्रातः
कालीन
भस्म
आरती
के
दर्शन
किए।
श्रद्धालुओं
के
उत्साह
और
बढ़ती
भीड़
को
देखते
हुए
श्री
महाकालेश्वर
मंदिर
प्रबंध
समिति
ने
व्यापक
इंतजाम
किए
हैं,
जिससे
दर्शन
व्यवस्था
सुचारू
रूप
से
संचालित
हो
सके।
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₹250
में
‘अतिशीघ्र
दर्शन
व्यवस्था’
बनी
सहारा
भगवान
महाकाल
के
दर्शनों
के
लिए
अब
भक्त
लंबी
कतारों
से
बचने
के
लिए
₹250
की
रसीद
कटवाकर
‘अतिशीघ्र
दर्शन
व्यवस्था’
का
लाभ
ले
रहे
हैं।
मंदिर
के
सहायक
प्रशासक
मूलचंद
जूनवाल
ने
बताया
कि
इस
व्यवस्था
के
अंतर्गत
भक्तों
को
औसतन
10
से
20
मिनट
में
दर्शन
मिल
जाते
हैं,
जिससे
उन्हें
लंबे
इंतजार
से
राहत
मिलती
है।
यह
सुविधा
मंदिर
परिसर
में
उपलब्ध
काउंटरों
पर
सुबह
भस्म
आरती
के
बाद
से
लेकर
रात्रि
शयन
आरती
तक
जारी
रहती
है।
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जारी
दिनभर
होती
हैं
छह
विशेष
आरतियां
मंदिर
में
प्रतिदिन
6
प्रमुख
आरतियां
होती
हैं।
-
भस्म
आरती
(सुबह
2:30
बजे
सोमवार
को,
अन्य
दिनों
3:00
बजे) -
दध्योदक
आरती
(सुबह
7:00
से
7:30
बजे) -
भोग
आरती
(सुबह
10:00
से
10:30
बजे) -
संध्या
आरती
(शाम
5:00
से
5:30
बजे) -
श्रृंगार
आरती
(शाम
7:00
से
7:30
बजे) -
शयन
आरती
(रात्रि
10:30
बजे)
श्रावण
मास
के
चलते
उज्जैन
में
धार्मिक
वातावरण
चरम
पर
है
और
बाबा
महाकाल
के
दर्शन
हेतु
देशभर
से
श्रद्धालु
यहां
पहुंच
रहे
हैं।
मंदिर
समिति
ने
श्रद्धालुओं
से
अनुरोध
किया
है
कि
वे
दर्शन
के
दौरान
संयम
बनाए
रखें
और
मंदिर
की
व्यवस्थाओं
में
सहयोग
करें।