
स्वच्छ भारत
सर्वेक्षण
की
रैंकिंग गुरुवार
को
जारी
होगी।
दिल्ली
के
विज्ञान
भवन
में
राष्ट्रपति
द्रौपदी
मूर्मू
की
मौजूदगी
में
स्वच्छता
की अलग-अलग
रैंकिंग
की
श्रेणियों
में
बेहतर
प्रदर्शन
करने
वाले
शहरों
को
पुरस्कार
मिलेंगे। इस
बार
इंदौर
सहित
अन्य
12
शहरों
की
स्वच्छता
का
पैमाना
अलग
रहेगा।
लगातार
तीन
वर्षों
तक
रैंकिंग
में
टाॅप
रहे
शहरों
की
केंद्रीय
शहरी
मंत्रालय
ने
अलग
केटेगरी
बनाई
है।
इन
शहरों
को
प्रीमियर
लीग
में
रखा
गया
है।
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सात
साल
से
लगातार
देश
में
स्वच्छता
का
ताज
बरकार
रखने
वाले
इंदौर
का
दावा
इस
बार
मजबूत
है,
लेकिन
सूरत
की
तरफ
से
कड़ी
टक्कर
इंदौर
को
मिल
रही
है।
सूरत
ने
पिछले
साल
भी
इंदौर
के
साथ
स्वच्छता
का
पुरस्कार
साझा
किया
था।
सफाई
में
इस
बार
स्वच्छता
की
अलग-अलग
श्रेणियां
रखी
गई
है।
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लीग
में
जो
शहर
पहले
स्थान
पर
होगा,
उसे
स्वच्छता
लीग
पुरस्कार
दिया
जाएगा,जबकि
लीग
से
बाहर
के
शहरों
के
पुरस्कारों
की
घोषणा
अलग
से
रैंकिंग
के
आधार
पर
होगी।
इस
रैंकिंग
में
गुजरात
का
अहमदाबाद
शहर
पहले
स्थान
पर
हो
सकता
है।
दूसरे
नंबर
पर
भोपाल
शहर
है।
विजेता
शहरों
को
राष्ट्रपति
के
हाथों
पुरस्कृत
किया
जाएगा।
दिल्ली
के
विज्ञान
भवन
में
आयोजित
होने
वाले
कार्यक्रम
में
शामिल
होने
के
लिए
इंदौर
से
अफसर
रवाना
हो
गए
है।
चार
हजार
से
अधिक
शहरों
की
रैंकिंग
स्वच्छता
सर्वेक्षण
रैंकिंग
में
4
हजार
700
शहर
शामिल
है।
इन
शहरों
को
12
हजार
500
में
से
अंक
दिए
जाएंगे।
कचरा
प्रबंधन,
निपटान,
पब्लिक
फीडबैक,
कचरा
संग्रहण
सहित
अन्य
केटेगरी
में
अलग-अलग
नंबर
दिए
जाएंगे।
इंदौर
का
दावा
इसलिए
मजबूत
इंदौर
में
सड़कों
की
सफाई,
कचरा
कलेक्शन
और
कचरा
निपटना
का
सिस्टम
सबसे
मजबूत
है।
इंदौर
के
लोग
भी
सफाई
को
लेकर
सजग
है।
कचरा
सड़कों
पर
नहीं
फेंकते
है।
दूसरे
शहरों
में
यह
सिस्टम
नियमित
तौर
पर
काम
नहीं
कर
पा
रहा
है।
सूरत
ने
पिछले
साल
डोर
डू
डोर
कचरा
संग्रहण
पर
काफी
काम
किया
था
और
उसमे
समान
नंबर
आने
के
कारण
रैंकिंग
में
इंदौर
के
समान
नंबर
पाए
थे।