
आपराधिक
प्रकरण
लंबित
होने
के
कारण
मध्य
प्रदेश
राज्य
अधिवक्ता
परिषद
द्वारा
अधिवक्ता
के
रूप
में
पंजीयन
नहीं
किए
जाने
के
खिलाफ
हाईकोर्ट
में
याचिका
दायर
की
गई।
याचिका
पर
कार्यवाहक
मुख्य
न्यायाधीश
संजीव
सचदेवा
और
न्यायमूर्ति
विनय
सराफ
की
युगलपीठ
ने
सुनवाई
करते
हुए
राज्य
अधिवक्ता
परिषद
के
सचिव
और
नामांकन
समिति
के
अध्यक्ष
को
नोटिस
जारी
कर
जवाब
तलब
किया
है।
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मांग
पर
होगी
सुनवाई
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भोपाल
निवासी
आयुष
त्रिपाठी
की
ओर
से
दायर
याचिका
में
कहा
गया
है
कि
उन्होंने
विधि
स्नातक
(एलएलबी)
की
डिग्री
प्राप्त
की
है
और
ऑल
इंडिया
बार
एसोसिएशन
द्वारा
आयोजित
परीक्षा
भी
सफलतापूर्वक
उत्तीर्ण
कर
ली
है।
अधिवक्ता
के
रूप
में
पंजीयन
के
लिए
उन्होंने
मध्य
प्रदेश
राज्य
अधिवक्ता
परिषद
में
आवेदन
किया
था,
लेकिन
परिषद
ने
उनके
खिलाफ
आपराधिक
प्रकरण
लंबित
होने
के
कारण
आवेदन
निरस्त
कर
दिया।
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करेंगे
915
किमी
की
दूरी
आयुष
त्रिपाठी
की
ओर
से
तर्क
दिया
गया
कि
अधिवक्ता
अधिनियम
के
प्रावधानों
के
अनुसार,
केवल
दोष
सिद्ध
होने
की
स्थिति
में
ही
किसी
अभ्यर्थी
का
पंजीयन
रोका
जा
सकता
है।
जबकि
उनके
खिलाफ
दर्ज
आपराधिक
प्रकरण
अभी
विचाराधीन
है
और
न्यायालय
द्वारा
उन्हें
दोषी
नहीं
ठहराया
गया
है।
ऐसे
में
परिषद
द्वारा
पंजीयन
आवेदन
अस्वीकार
करना
अधिनियम
के
विपरीत
है।
युगलपीठ
ने
याचिका
की
प्रारंभिक
सुनवाई
के
बाद
प्रतिवादियों
को
नोटिस
जारी
कर
जवाब
मांगा
है।
याचिकाकर्ता
की
ओर
से
अधिवक्ता
मनोज
चतुर्वेदी
ने
पैरवी
की।