
मध्य
प्रदेश
सरकार
द्वारा
नियंत्रित
एक
अथॉरिटी
के
अध्यक्ष
ने
सरकार
के
ही
अंग
दो
आईएएस
ऑफिसर्स
के
खिलाफ
एफआईआर
कराने
की
संस्तुति
की
है।
मध्य
प्रदेश
और
संभवतः
देश
के
इतिहास
में
यह
पहला
मामला
है।
भ्रष्टाचार
के
मुद्दे
पर
इस
मामले
के
सुलझने
में
जितनी
देर
हो
रही
है
उतनी
ही
सरकार
की
किरकिरी
हो
रही
है।
रोचक
तथ्य
यह
है
कि
एफआईआर
की
संस्तुति
करने
वाले
स्टेट
एनवायरनमेंट
इम्पैक्ट
असेसमेंट
अथॉरिटी
(सिया)
के
चेयरमैन
शिवनारायण
चौहान
स्वयं
एक
आईएएस
अफसर
रह
चुके
हैं,
जिन्होंने
रिटायरमेंट
के
बाद
भाजपा
की
सदस्यता
ग्रहण
की।
इतना
ही
नहीं
राजगढ़
जिले
के
एक
विधानसभा
क्षेत्र
से
भाजपा
उम्मीदवार
के
रूप
में
उनका
नाम
काफी
चर्चा
में
था
(हालांकि
उन्हें
टिकट
नहीं
मिला
था)।
यह
सर्वविदित
है
कि
उनको
वर्तमान
पद
भाजपा
के
सदस्य
होने
के
कारण
मिला।
मुख्य
सचिव
को
लिखे
पत्र
में
उनका
आरोप
है
कि
पर्यावरण
मंजूरी
प्रक्रिया
में
भ्रष्टाचार
हो
रहा
है
और
इसके
लिए
दोषी
पर्यावरण
विभाग
के
प्रमुख
सचिव
नवनीत
कोठारी
और
पर्यावरण
नियोजन
एवं
समन्वय
संगठन
की
निदेशक
उमा
माहेश्वरी
हैं।
इस
मामले
में
सरकार
की
तब
और
किरकरी
हुई
जब
इस
मामले
को
उठाने
के
बाद
चौहान
को
अपने
ऑफिस
पर
ताला
लगा
मिला।
स्टाफ
ने
बताया
कि
ताला
प्रमुख
सचिव
नवनीत
मोहन
कोठारी
के
आदेश
पर
लगाया
गया।
बाद
में
कोठारी
ने
सफाई
दी
कि
बिजली
की
शॉर्ट
सर्किट
होने
के
कारण
ऐसा
किया
गया
था।
मुख्यमंत्री
डॉक्टर
मोहन
यादव
अभी
विदेश
दौरे
पर
हैं।
उन
पर
सभी
की
निगाहें
हैं
कि
वे
वापस
आते
ही
इस
मामले
को
कैसे
सुलझाते
हैं?
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पहले
जैसा
नहीं
रहा
”सिंधिया
गुट”
का
प्रभाव
भाजपा
की
राष्ट्रीय
कार्य
परिषद
के
42
सदस्यों
में
ज्योतिरादित्य
सिंधिया
शामिल
किए
गए
हैं।
उनका
और
कोई
समर्थक
इस
लिस्ट
में
दिखाई
नहीं
दिया।
मोहन
कैबिनेट
में
भी
सिंधिया
खेमे
के
मात्र
तीन
विधायक
मंत्री
हैं।
राजनीतिक
गलियारों
में
चर्चा
है
कि
हाईकमान
अब
संगठन
और
स्थानीय
नेतृत्व
को
तरजीह
दे
रहा
है,
जबकि
सिंधिया
को
‘केंद्रीय
मंत्री’
तक
सीमित
कर
रहा
है।
कहा
जा
सकता
है
कि
मध्यप्रदेश
की
राजनीति
में
”सिंधिया
गुट”
प्रभाव
पहले
जैसा
नहीं
रह
गया
है।
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मंत्रीजी
का
जन्मदिन
और
सिविल
सेवकों
का
आचरण!
मध्यप्रदेश
के
राजगढ़
जिले
में
राज्य
मंत्री
नारायण
सिंह
पंवार
के
जन्मदिन
पर
कुछ
ऐसा
हुआ,
जिसने
अफसरशाही
की
निष्पक्षता
और
प्रशासनिक
गरिमा
पर
सवाल
खड़े
कर
दिए
हैं।
जानकारी
के
अनुसार
जिला
कलेक्टर
और
पुलिस
अधीक्षक
खुद
मंत्रीजी
के
कार्यालय
पहुंचे
और
बाकायदा
कलेक्टर-एसपी
ने
मंत्री
को
केक
खिलाकर,
हैप्पी
बर्थडे
की
तालियों
के
बीच
तस्वीरें
खिंचवाकर
उनका
जन्मदिन
मनाया।
यह
सब
“सरकारी
समय”
और
“मंत्री
के
व्यक्तिगत
कार्यालय”
में
हुआ।
इस
घटना
की
तस्वीरें
और
वीडियो
सोशल
मीडिया
में
वायरल
हो
रही
हैं।
प्रशासनिक
गलियारों
में
इस
जन्मदिन
को
लेकर
यह
चर्चा
है
कि
क्या
कलेक्टर-एसपी
का
यह
आचरण
सिविल
सेवकों
के
लिए
बनाई
गई
आचरण
नियमावली
के
अंतर्गत
था?
क्या
आईएएस
और
आईपीएस
अधिकारियों
का
किसी
मंत्री
या
राजनेता
का
बर्थडे
उनके
कार्यालय
में
जाकर
मनाना
अखिल
भारतीय
सेवा
आचरण
नियमों,
संवैधानिक
भूमिका
और
लोकतंत्र
की
आत्मा
के
अनुरूप
है?
हंगामेदार
रहेगा
संसद
का
मानसून
सत्र
दिल्ली
में
21
जुलाई
से
प्रारंभ
होने
वाला
संसद
का
मानसून
सत्र
हंगामेदार
रहने
वाला
है।
कांग्रेस
और
विपक्ष
ने
बिहार
में
मतदाता
सूची
के
विशेष
पुनरीक्षण
और
अमेरिकी
राष्ट्रपति
डोनाल्ड
ट्रंप
द्वारा
मई
में
भारत-पाकिस्तान
के
बीच
संघर्ष
विराम
पर
दिए
गए
बयान
जैसे
मुद्दों
को
उठाने
के
लिए
कमर
कस
ली
है।
सरकारी
पक्ष
भी
स्थिति
का
सामना
करने
के
लिए
तैयार
है।
अगले
सात
दिन
राजनीतिक
रूप
से
भी
काफी
व्यस्त
रहेंगे।
आईएएस
विवेक
अग्रवाल
और
प्रधानमंत्री
का
संसदीय
क्षेत्र
वाराणसी
प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
की
नजर
में
भारतीय
प्रशासनिक
सेवा
में
1994
बैच
के
मध्य
प्रदेश
कैडर
के
अधिकारी
विवेक
अग्रवाल
का
महत्व
बढ़ता
जा
रहा
है।
यह
उस
समय
देखने
को
मिला
जब
विवेक
अग्रवाल
ने
पीएम
के
संसदीय
क्षेत्र
वाराणसी
में
आयोजित
एक
अंतरराज्यीय
बैठक
की
अध्यक्षता
की।
यह
बैठक
वाराणसी
को
इंदौर
के
समान
स्वच्छ
और
साफ
सुथरा
बनाने
पर
केंद्रित
थी।
इसमें
इंदौर
के
कलेक्टर
और
निगम
आयुक्त
ने
वाराणसी
के
अधिकारियों
को
इंदौर
के
स्वच्छता
मॉडल
पर
विस्तार
से
जानकारी
दी।
वाराणसी
और
इंदौर
के
अधिकारियों
की
बैठक
की
अध्यक्षता
केंद्रीय
संस्कृति
सचिव
विवेक
अग्रवाल
ने
की।
अग्रवाल
20
साल
पहले
इंदौर
के
कलेक्टर
रहे
हैं।
माना
जा
रहा
है
कि
प्रधानमंत्री
ने
वाराणसी
को
शहर
को
स्वच्छ
और
साफ
सुथरा
बनाने
की
जवाबदारी
विवेक
अग्रवाल
को
दी
है।
डिस्क्लेमर
(अस्वीकरण):
यह
लेखक
के
निजी
विचार
हैं।
आलेख
में
शामिल
सूचना
और
तथ्यों
की
सटीकता,
संपूर्णता
के
लिए
अमर
उजाला
उत्तरदायी
नहीं
है।
डिस्क्लेमर
(अस्वीकरण):
यह
लेखक
के
निजी
विचार
हैं।
आलेख
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सूचना
और
तथ्यों
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सटीकता,
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के
लिए
अमर
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