
हेमा
मालिनी,
कंगना
रनौत
और
ममता
बनर्जी.
लोकसभा
चुनाव
को
लेकर
पूरे
देश
में
प्रचार
चल
रहा
है.
चुनाव-प्रचार
के
साथ
ही
नेताओं
की
बयानबाजी
भी
तेज
हो
गई
है
और
बयानबाजी
में
महिला
उम्मीदवारों
पर
छींटाकशी
करने
से
भी
नेता
बाज
नहीं
आ
रहे
हैं.
इस
चुनाव
में
छींटाकशी
की
शिकार
होने
वाली
महिला
कैंडिडेट्स
में
बीजेपी
की
स्टार
उम्मीदवार
हेमा
मालिनी
और
कंगना
रनौत
और
टीएमसी
प्रमुख
ममता
बनर्जी
शामिल
हैं.
बयानबाजी
को
लेकर
विवाद
भी
पैदा
हो
चुके
हैं.
गुरुवार
को
कांग्रेस
नेता
रणदीप
सुरजेवाला
ने
हेमा
मालिनी
के
खिलाफ
एक
अपमानजनक
टिप्पणी
की
थी.
अपनी
टिप्पणी
को
लेकर
वह
विवादों
में
घिर
गए
हैं.
राष्ट्रीय
महिला
आयोग
को
उनके
खिलाफ
चुनाव
आयोग
में
शिकायत
भी
दर्ज
की.
पिछले
महीने
के
अंत
में
हरियाणा
में
एक
रैली
में
की
गई
टिप्पणी
ने
बड़े
पैमाने
पर
राजनीतिक
विवाद
पैदा
कर
दिया
था,
जिसमें
भाजपा
ने
आरोप
लगाया
था
कि
विपक्षी
दल
ने
निम्न
स्तर
की
टिप्पणी
की
थी.
पीटीआई
की
रिपोर्ट
के
अनुसार
हालांकि
कांग्रेस
नेता
ने
कहा
कि
उन्होंने
उसी
वीडियो
में
मालिनी
के
बारे
में
भी
कहा
था.
उनका
बहुत
सम्मान
किया
जाता
है,
क्योंकि
उनकी
शादी
“धर्मेंद्र
जी”
से
हुई
है
और
वह
हमारी
बहू
हैं.
बता
दें
कि
कई
साल
पहले
हेमा
मालिनी
को
लेकर
राजद
प्रमुख
लालू
यादव
ने
टिप्पणी
की
थी.
उन्होंने
कहा
था
कि
वह
बिहार
की
सड़कों
को
उनके
गालों
जितनी
चिकनी
बना
देंगे.
ये
भी
पढ़ें
सुप्रिया
श्रीनेत
की
रनौत
पर
टिप्पणी
से
हुआ
था
विवाद
सुरजेवाला
से
पहले
उनकी
पार्टी
के
नेता
सुप्रिया
श्रीनेत
और
एचएस
अहीर
अपने
सोशल
मीडिया
हैंडल
पर
रनौत
और
उनके
निर्वाचन
क्षेत्र
मंडी
को
जोड़ने
वाले
पोस्ट
को
लेकर
विवाद
में
फंस
गए
थे.
श्रीनेत
ने
कहा
था
कि
आपत्तिजनक
टिप्पणी
हटा
दी
कि
वे
उनके
द्वारा
पोस्ट
नहीं
की
गई
थीं.
इसके
अलावा,
कांग्रेस
के
कर्नाटक
विधायक
शमनूर
शिवशंकरप्पा
ने
बीजेपी
की
गायत्री
सिद्धेश्वरा
के
बारे
में
कहा
कि
वह
केवल
“खाना
बनाने
के
लायक”
थीं
और
भाजपा
के
दिलीप
घोष
ने
ममता
बनर्जी
के
वंश
पर
टिप्पणी
की
थी.
चुनाव
आयोग
ने
श्रीनेत
और
दिलीप
घोष
के
खिलाफ
कारण
बताओ
नोटिस
जारी
किया
था.
उसके
बाद
उनलोगों
ने
माफी
मांग
ली
थी.
भारतीय
राजनीति
में
सोनिया
गांधी,
मायावती,
ममता
सहित
कई
दिग्गज
हस्तियां
शामिल
हैं.
ममता
बनर्जी,
स्मृति
ईरानी,
जया
प्रदा
और
प्रियंका
गांधी
वाड्रा
सभी
किसी
न
किसी
समय
राजनीति
में
छींटाकशी
की
शिकार
होती
रही
हैं.
जया
प्रदा
से
लेकर
मायावती
तक
हुईं
हैं
शिकार
साल
2019
में
भाजपा
नेता
और
उनकी
पूर्व
सहयोगी
जया
प्रदा
पर
समाजवादी
पार्टी
के
नेता
आजम
खान
की
अभद्र
टिप्पणी
की
थी.
इसी
तरह
की
घटनाएं
2019
के
आम
चुनावों
के
दौरान
देखी
गईं
जब
राजनीतिक
दिग्गजों
ने
अपनी
महिला
प्रतिद्वंद्वियों
पर
अरुचिकर
टिप्पणियों
के
साथ
निशाना
साधा
था.
तत्कालीन
केंद्रीय
मंत्री
अश्विनी
चौबे
ने
बिहार
की
पूर्व
मुख्यमंत्री
राबड़ी
देवी
को
“घूंघट”
के
पीछे
रहने
की
सलाह
दी.
वहीं
एक
अन्य
बीजेपी
नेता
विनय
कटियार
ने
कथित
तौर
पर
सोनिया
गांधी
और
राहुल
गांधी
को
लेकर
अभद्र
टिप्पणी
की
थी.
उसी
वर्ष,
अभिनेता
से
नेता
बनीं
उर्मीला
मातोंडकर
लैंगिक
टिप्पणी
का
निशाना
बन
गईं
थीं
और
उन्हें
लेकर
टिप्पणी
की
गई
थी.
बसपा
सुप्रीमो
मायावती
पर
भी
2016
में
भाजपा
के
दयाशंकर
सिंह
ने
अभद्र
टिप्पणी
की
थी.
तत्कालीन
भाजपा
के
उत्तर
प्रदेश
उपाध्यक्ष
की
टिप्पणी
के
परिणामस्वरूप
केशव
प्रसाद
मौर्य
और
अरुण
जेटली
जैसे
उनकी
पार्टी
के
सहयोगियों
को
संसद
में
मायावती
से
माफी
मांगनी
पड़ी
थी.
2022
में
केंद्रीय
मंत्री
स्मृति
ईरानी
के
खिलाफ
अभद्र
टिप्पणी
करने
पर
पुलिस
ने
कांग्रेस
नेता
अजय
राय
के
खिलाफ
मामला
दर्ज
किया
था.
हालांकि
राजनीतिक
प्रतिद्वंद्वियों
के
लिए
लैंगिक
भेदभावपूर्ण
और
अपमानजनक
टिप्पणियां
करना
असामान्य
नहीं
है,
खासकर
जब
प्रतिद्वंद्वी
एक
महिला
हो,
कांग्रेस
नेता
दिग्विजय
सिंह
कांग्रेस
के
ही
एक
सदस्य
पर
टिप्पणी
करके
ऐसे
राजनेताओं
की
श्रेणी
में
शामिल
हो
गए
हैं.
लैंगिक
भेदभाव
का
होती
रही
हैं
शिकार
2013
में,
सिंह
ने
मंदसौर
से
तत्कालीन
सांसद
मीनाक्षी
नटराजन
को
“सौ
टका
टंच
माल”
(100
प्रतिशत
शुद्ध
सामग्री
या
पूरी
तरह
से
बेदाग)
बताया,
जिसके
परिणामस्वरूप
पार्टी
लाइनों
से
आलोचना
हुई.
ऐसे
कई
और
बार-बार
होने
वाले
उदाहरण
हैं,
जहां
कई
महिला
राजनेताओं
को
उनके
सहकर्मियों,
उनके
प्रतिद्वंद्वियों
और
मतदाताओं
से
लैंगिक
टिप्पणियों
का
शिकार
होना
पड़ता
है,
उनकी
उपलब्धियों
को
उनके
लिंग
तक
सीमित
कर
दिया
जाता
है.
महिला
उम्मीदवारों
पर
टिप्पणी
को
लेकर
महिला
अधिकार
कार्यकर्ता
रंजना
कुमारी
का
कहना
है
कि
केवल
विरोधी
दलों
से
ही
नहीं,
बल्कि
राजनीतिक
दलों
के
अंदर
भी
सभी
महिला
राजनेताओं
को
अपने
पुरुष
सहयोगियों
से
भेदभाव
का
सामना
करना
पड़ता
है.
आप
किसी
भी
महिला
राजनेता
से
पूछ
सकते
हैं
और
वह
आपको
यही
बताएगी.