कांग्रेस के घोषणा पत्र पर विवाद जारी, खरगे ने बीजेपी को दिलाई उनके पुरखों की याद

कांग्रेस के घोषणा पत्र पर विवाद जारी, खरगे ने बीजेपी को दिलाई उनके पुरखों की याद
कांग्रेस के घोषणा पत्र पर विवाद जारी, खरगे ने बीजेपी को दिलाई उनके पुरखों की याद


मल्लिकार्जुन
खड़गे

कांग्रेस
के
घोषणा
पत्र
जारी
करने
के
बाद
से
ही
BJP
कांग्रेस
पर
निशाना
साध
रही
है.
भारतीय
जनता
पार्टी
के
राष्ट्रीय
अध्यक्ष
जेपी
नड्डा
और
PM
मोदी
ने
कहा
“इसको
देखकर
पता
ही
नहीं
चलता
कि
यह
कांग्रेस
का
घोषणापत्र
है
या
फिर
मुस्लिम
लीग
का
है.”
जिसको
लेकर
पहले
सुप्रिया
श्रीनेत
ने
BJP
पर
पलटवार
किया
था.
अब
इसके
ऊपर
कांग्रेस
अध्यक्ष
मल्लिकार्जुन
खड़गे
ने
एक्स
पर
प्रतिक्रिया
दी
है.
मल्लिकार्जुन
ने
प्रतिक्रिया
देते
हुए
पीएम
मोदी
और
अमित
शाह
पर
कई
गंभीर
आरोप
लगाए
हैं.

मल्लिकार्जुन
ने
कहा,
“मोदी-शाह
के
राजनीतिक

वैचारिक
पुरखों
ने
स्वतंत्रता
आंदोलन
में
भारतियों
के
खिलाफ,
अंग्रेज़ों
और
मुस्लिम
लीग
का
साथ
दिया.
आज
भी
वो
आम
भारतियों
के
योगदान
से
बनाए
गए
‘कांग्रेस
न्याय
पत्र’
के
खिलाफ
मुस्लिम
लीग
की
दुहाई
दे
रहे
हैं.”

ये
भी
पढ़ें

घोषणा
पत्र
पर
फैला
रहे
भ्रांतियां

मल्लिकार्जुन
खड़गे
ने
एक्स
के
जरिए
नरेद्र
पर
कई
सवाल
खड़े
किए
हैं.
इसके
अलावा
उन्होंने
कहा,
“मोदी-शाह

उनके
‘Nominated’
अध्यक्ष
आज
कांग्रेस
घोषणापत्र
के
बारे
में
उल्टी-सीधी
भ्रांतियां
फैला
रहें
हैं.
जेपी
नड्डा
ने
घोषणा
के
बाद
कहा
था
कि
कांग्रेस
का
ये
घोषणा
पत्र
मुस्लिम
लीग
का
घोशणा
पत्र
लगता
है.

खड़गे
ने
कहा,
“मोदी
जी
की
भाषणों
में
केवल
RRS
की
बू
आती
है,
दिन
बा
दिन
भाजपा
की
चुनावी
हालत
इतनी
खस्ता
होती
जा
रही
है,
कि
RRS
को
अपने
पुराने
मित्र

मुस्लिम
लीग
की
याद
सताने
लगी
है.”

मोदी
काल
का
अंत
करेगा
घोषणा
पत्र

मल्लिकार्जुन
खड़गे
ने
आगे
कहा,
“कांग्रेस
न्याय
पत्र
में
हिंदुस्तान
के
140
करोड़
लोगों
की
आशाओं

आकांक्षाओं
की
छाप
है.
ये
घोषणा
पत्र
मोदी
जी
के
10
सालों
के
अन्याय
काल
का
अंत
करेगा.

कांग्रेस
न्याय
पत्र

कांग्रेस
के
न्याय
पत्र
में
5
न्याय,
25
गारंटी
और
300
से
ज्यादा
वादे
शामिल
है.
काग्रेस
48
पन्नों
के
इस
घोषणा
पत्र
को
भारत
की
जनता
की
उम्मीदों
का
घोषणा
पत्र
बता
रही
है.
घोषणा
पत्र
के
अहम
मु्द्दों
में
मानहानी
के
जुर्म
को
अपराधमुक्त
करना,
इंटरनेट
का
मनमाने
ढंग
से
बैन
करवाने
को
खत्म
करना,
शांतिपूर्वक
प्रदर्शन
करने
के
अधिकार
को
बनाए
रखने
के
साथ-साथ
सरकार
का
खाने,
पहनावे,
प्यार,
शादी
में
दखल

देना
शामिल
है.