मोदी बोले- कांग्रेस ने पूर्वोत्तर के साथ सौतेला व्यवहार किया: हमने धारणा बदली, अब नॉर्थ-ईस्ट न दिल्ली से दूर है, न दिल से दूर

मोदी बोले- कांग्रेस ने पूर्वोत्तर के साथ सौतेला व्यवहार किया: हमने धारणा बदली, अब नॉर्थ-ईस्ट न दिल्ली से दूर है, न दिल से दूर

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दिल्ली
3
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पहले

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PM मोदी ने असम के एक अंग्रेजी अखबार को दिए इंटरव्यू में नॉर्थ-ईस्ट की चुनौतियों और उससे निपटने के लिए केंद्र की पहल पर चर्चा की। - Dainik Bhaskar


PM
मोदी
ने
असम
के
एक
अंग्रेजी
अखबार
को
दिए
इंटरव्यू
में
नॉर्थ-ईस्ट
की
चुनौतियों
और
उससे
निपटने
के
लिए
केंद्र
की
पहल
पर
चर्चा
की।

आजादी
के
बाद
पूर्वोत्तर
राज्य
दशकों
तक
हाशिए
पर
रहे।
कांग्रेस
सरकारों
ने
यहां
के
लोगों
के
साथ
सौतेला
व्यवहार
किया।
हमने
इस
धारणा
को
बदला
कि
पूर्वोत्तर
बहुत
दूर
है।
आज
पूर्वोत्तर

दिल्ली
से
दूर
है
और

दिल
से
दूर
है।
पूर्वोत्तर
ने
दुनिया
को
दिखाया
है
कि
जब
नीयत
सही
होती
है,
तो
नतीजे
भी
सही
होते
हैं।

प्रधानमंत्री
नरेंद्र
मोदी
ने
‘द
असम
ट्रिब्यून’
को
दिए
एक
इंटरव्यू
में
ये
बातें
कहीं।
उन्होंने
नॉर्थ-ईस्ट
की
चुनौतियों
और
उससे
निपटने
के
लिए
केंद्र
की
पहल
पर
चर्चा
की।
उन्होंने
असम
में
उग्रवाद,
अरुणाचल
प्रदेश
को
लेकर
चीन
के
दावे,
मणिपुर
हिंसा,
नगालैंड
में
राजनीतिक
संघर्ष
और
मिजोरम
में
घुसपैठ
की
समस्या
पर
बात
की।

मोदी
ने
कहा
कि
अरुणाचल
प्रदेश
भारत
का
हिस्सा
है
और
रहेगा।
इसमें
कोई
संदेह
नहीं
होना
चाहिए।
मणिपुर
हिंसा
को
लेकर
उन्होंने
कहा
कि
वहां
की
स्थिति
से
संवेदनशीलता
से
निपटना
होगा।
यह
हम
सबकी
जिम्मेदारी
है।
PM
ने
बताया
कि
पिछले
10
साल
के
कार्यकाल
के
दौरान
उन्होंने
नॉर्थ-ईस्ट
के
विकास
के
लिए
क्या
कदम
उठाए।



पढ़िए
इंटरव्यू
के
मुख्य
अंश…


सवाल:
प्रधानमंत्री
के
रूप
में
आपने
10
साल
के
कार्यकाल
में
पूर्वोत्तर
की
किन-किन
समस्याओं
का
समाधान
किया?
आप
कई
बार
यहां
के
राज्यों
का
दौरा
कर
चुके
हैं।
आप
यहां
की
समस्याओं
और
चुनौतियों
से
परिचित
होंगे।


PM
का
जवाब:

कांग्रेस
की
पूर्व
सरकारों
ने
यहां
के
लोगों
के
साथ
सौतेला
व्यवहार
किया
क्योंकि
उन्हें
चुनावी
फायदा
कम
मिलता
था।
वे
कहते
थे
कि
पूर्वोत्तर
बहुत
दूर
है
और
इसके
विकास
के
लिए
काम
करना
मुश्किल
है।

मैं
पिछले
10
सालों
में
लगभग
70
बार
पूर्वोत्तर
आया
हूं।
यह
आंकड़ा
पूर्वोत्तर
में
मुझसे
पहले
के
सभी
प्रधानमंत्रियों
की
कुल
यात्राओं
से
भी
ज्यादा
है।
2015
के
बाद
से
हमारे
केंद्रीय
मंत्री
680
से
अधिक
बार
पूर्वोत्तर
आए
हैं।
हमने
इस
धारणा
को
बदला
है
कि
पूर्वोत्तर
बहुत
दूर
है।
आज
पूर्वोत्तर

दिल्ली
से
दूर
है
और
ना
दिल
से
दूर
है।
पूर्वोत्तर
ने
दुनिया
को
दिखाया
है
कि
जब
नीयत
सही
हो
तो
नतीजे
भी
सही
होते
हैं।

पिछले
5
साल
में
हमने
यहां
के
विकास
के
लिए
कांग्रेस
या
पिछली
किसी
भी
सरकार
के
फंड
से
लगभग
4
गुना
ज्यादा
निवेश
किया
है।
हमने
लंबे
समय
से
पेंडिंग
बोगीबील
ब्रिज
और
भूपेन
हजारिका
सेतु
जैसे
कनेक्टिविटी
प्रोजेक्ट्स
को
पूरा
किया।
कनेक्टिविटी
बढ़ने
से
लोगों
का
जीवन
आसान
हुआ
है।

हमने
पूर्वोत्तर
के
युवाओं
के
लिए
शिक्षा,
खेल,
उद्यमिता
और
कई
अन्य
क्षेत्रों
में
दरवाजे
खोले।
2014
के
बाद
से
पूर्वोत्तर
में
उच्च
शिक्षा
के
लिए
14
हजार
करोड़
रुपए
से
अधिक
खर्च
किए
गए
हैं।
मणिपुर
में
देश
का
पहला
स्पोर्ट्स
यूनिवर्सिटी
खोला
गया।
हम
पूर्वोत्तर
के
8
राज्यों
में
200
से
अधिक
खेलो
इंडिया
केंद्र
बना
रहे
हैं।

पिछले
दशक
में
इस
क्षेत्र
से
4
हजार
से
अधिक
स्टार्टअप
उभरे
हैं।
यहां
कृषि
फल-फूल
रही
है।
फलों
के
निर्यात,
जैविक
खेती
और
मिशन
ऑयल
पाम
से
काफी
समृद्धि

रही
है।
आज
पूर्वोत्तर
सभी
क्षेत्रों
में
सबसे
आगे
है।


सवाल:


पूर्वोत्तर
में
उग्रवाद
एक
बड़ी
समस्या
है।
आपके
कार्यकाल
में
असम
सहित
पूर्वोत्तर
के
अन्य
राज्यों
के
उग्रवादी
समूहों
ने
हथियार
डाल
दिए
हैं।
उग्रवाद
को
जड़
से
खत्म
करने
के
लिए
आप
क्या
कदम
उठा
रहे
हैं?


PM
का
जवाब:

विद्रोह,
घुसपैठ
और
संस्थागत
उपेक्षा
का
एक
लंबा
इतिहास
रहा
है।
हमने
उग्रवाद
को
काफी
हद
तक
कंट्रोल
किया
है।
हम
अपने
लोगों
का
विश्वास
जीतने
और
शांति
कायम
करने
में
भी
सफल
रहे
हैं।

पिछले
10
सालों
में
कुल
11
शांति
समझौतों
पर
हस्ताक्षर
किए
गए
हैं।
यह
पिछली
किसी
भी
सरकार
में
किए
गए
शांति
समझौतों
से
ज्यादा
है।
2014
से
अब
तक
9
हजार
500
से
अधिक
उग्रवादियों
ने
आत्मसमर्पण
किया
और
समाज
की
मुख्यधारा
में
शामिल
हुए।

पूर्वोत्तर
में
2014
के
बाद
से
सुरक्षा
स्थिति
बेहतर
हुई
है।
2014
की
तुलना
में
2023
में
उग्रवाद
की
घटनाओं
में
71
फीसदी
की
कमी
आई
है।
सुरक्षाबलों
के
शहीद
होने
की
संख्या
60
फीसदी
कम
हुई
है।
नागरिकों
की
मौत
के
मामले
82
फीसदी
कम
हुए
हैं।
पूर्वोत्तर
के
अधिकांश
हिस्सों
से
AFSPA
हटा
लिया
गया
है।

हमने
असम
और
अरुणाचल
प्रदेश
के
बीच
सीमा
विवाद
का
समाधान
निकाला,
जिससे
123
गांवों
को
लेकर
लंबे
समय
से
चल
रहा
विवाद
खत्म
हुआ।
असम
और
मेघालय
के
बीच
50
साल
पुराना
विवाद
हमने
सुलझाया।
बोडो
और
ब्रू-रियांग
जैसे
शांति
समझौतों
के
कारण
कई
उग्रवादियों
ने
आत्मसमर्पण
किया।


सवाल:
चीन
सालों
से
अरुणाचल
प्रदेश
के
कुछ
हिस्सों
पर
दावा
करता

रहा
है।
क्या
अरुणाचल
प्रदेश
सुरक्षित
है?
राज्य
का
हर
इंच
भारत
के
भीतर
रहे,
यह
सुनिश्चित
करने
के
लिए
आप
क्या
कर
रहे
हैं
?


PM
का
जवाब:

अरुणाचल
प्रदेश
भारत
का
हिस्सा
है
और
रहेगा।
इसमें
कोई
संदेह
नहीं
होना
चाहिए।
आज
सूरज
की
पहली
किरण
की
तरह
अरुणाचल
और
नॉर्थ-ईस्ट
तक
विकास
के
काम
पहले
से
कहीं
ज्यादा
तेज
गति
से
पहुंच
रहे
हैं।
पिछले
महीने
मैं
‘विकसित
भारत,
विकसित
पूर्वोत्तर’
कार्यक्रम
के
लिए
ईटानगर
गया
था।
मैंने
वहां
55
हजार
करोड़
रुपए
की
विकास
परियोजनाओं
का
अनावरण
किया,
जो
विकसित
नॉर्थ-ईस्ट
की
गारंटी
देती
है।

अरुणाचल
में
लगभग
35
हजार
परिवारों
को
पक्के
घर
मिले।
45
हजार
परिवारों
को
पेयजल
आपूर्ति
परियोजना
का
लाभ
मिला।
मैंने
हाल
ही
में
13
हजार
फीट
की
ऊंचाई
पर
बने
सेला
टनल
का
उद्घाटन
किया,
जो
तवांग
को
हर
मौसम
में
कनेक्टिविटी
देकर
एक
गेम-चेंजर
की
भूमिका
निभाएगी।

हमने
अरुणाचल
को
देश
के
बाकी
हिस्सों
से
जोड़ने
के
लिए
2022
में
डोनयी
पोलो
एयरपोर्ट
का
उद्घाटन
किया।
लगभग
125
गांवों
के
लिए
नई
सड़क
परियोजनाएं
और
150
गांवों
में
पर्यटन
और
अन्य
बुनियादी
ढांचे
से
संबंधित
परियोजनाएं
शुरू
कीं।
सरकार
ने
10
हजार
करोड़
रुपए
की
उन्नति
योजना
भी
शुरू
की
है,
जो
उत्तर-पूर्वी
क्षेत्र
में
निवेश
और
नौकरियों
के
लिए
नई
संभावनाएं
लाएगी।


सवाल:


आप
मणिपुर
की
स्थिति
को
कैसे
आंकते
हैं?
राज्य
में
शांति
के
लिए
क्या
कदम
उठाए
जा
रहे
हैं?
मणिपुर
मुद्दे
पर
विपक्ष
ने
आपकी
आलोचना
की
थी।
उस
पर
आप
क्या
कहेंगे?


PM
का
जवाब:

मैं
इस
बारे
में
पहले
ही
संसद
में
बोल
चुका
हूं।
मणिपुर
की
स्थिति
से
संवेदनशीलता
से
निपटना
होगा।
यह
हम
सबकी
जिम्मेदारी
है।
हमने
हिंसा
खत्म
करने
के
लिए
अपना
सबसे
बेहतर
संसाधन
और
प्रशासनिक
मशीनरी
तैनात
की
है।

समय
पर
केंद्र
के
हस्तक्षेप
और
मणिपुर
सरकार
के
प्रयासों
के
कारण
राज्य
की
स्थिति
में
काफी
सुधार
हुआ
है।
जब
संघर्ष
अपने
चरम
पर
था,
तब
गृह
मंत्री
अमित
शाह
मणिपुर
में
जाकर
रहे
थे।
उन्होंने
15
से
अधिक
बैठकें
कीं।
राज्य
सरकार
की
जरूरत
के
हिसाब
से
केंद्र
लगातार
अपना
समर्थन
दे
रहा
है।
राहत
और
पुनर्वास
का
काम
जारी
है।


सवाल:
NSCN
(IM)
के
साथ
फ्रेमवर्क
समझौते
पर
2015
में
आपकी
मौजूदगी
में
साइन
किए
गए
थे।
इस
पर
अंतिम
समाधान
की
उम्मीद
कब
तक
की
जा
सकती
है?


PM
का
जवाब:

नगालैंड
में
दशकों
से
राजनीतिक
समस्या
चलती

रही
है।
इसके
स्थायी
समाधान
के
लिए
हमारी
सरकार
ने
पहल
की
है।
3
अगस्त
2015
को
नगालैंड
के
नेशनल
सोशलिस्ट
काउंसिल
ऑफ
नगालैंड/इसाक
मुइवा
ग्रुप
के
साथ
एक
फ्रेमवर्क
समझौते
पर
साइन
किए
गए।

इस
समझौते
के
आधार
पर
अंतिम
समझौते
पर
काम
किया
जाएगा।
भारत
सरकार
के
प्रतिनिधि
NSCN
(IM)
और
अन्य
नगा
समूहों
के
साथ
बातचीत
कर
रहे
हैं।
केंद्र
सरकार
नगा
समूहों
के
साथ
शांति
वार्ता
को
जल्द
से
जल्द
पूरा
करने
की
कोशिश
कर
रही
है।


सवाल:
पिछले
कुछ
समय
से
मिजोरम
में
म्यांमार
से
लोगों
के
घुसपैठ
के
कारण
परेशानी
काफी
बढ़ी
है।
सरकार
इसको
लेकर
क्या
कदम
उठा
रही
है?


PM
का
जवाब:

भारत
में
म्यांमार
के
लोगों
की
घुसपैठ
का
सबसे
बड़ा
कारण
म्यांमार
के
भीतर
हो
रही
घटनाएं
हैं।
हमने
कई
बार
म्यांमार
के
सामने
इस
मुद्दे
को
उठाया
है
क्योंकि
इसका
सीधा
असर
भारत
खासकर
पूर्वोत्तर
राज्यों
पर
पड़ता
है।

घुसपैठ
को
रोकने
और
हमारी
सीमाओं
को
सुरक्षित
करने
के
लिए
हमने
भारत
और
म्यांमार
के
बीच
फ्री
मूवमेंट
रिजीम
को
खत्म
करने
का
फैसला
लिया।
दोनों
देशों
के
बॉर्डर
पर
तैनात
सुरक्षाबलों
की
संख्या
में
बढ़ोतरी
की
गई
है।
सुरक्षा
एजेंसियों
के
बीच
तालमेल
बढ़ाया
गया
है।

केंद्र
ने
भारत-म्यांमार
बॉर्डर
पर
फेंसिंग
का
काम
शुरू
कर
दिया
है।
हमने
मिजोरम
सरकार
से
राज्य
में
अवैध
प्रवासियों
के
बायोमेट्रिक
डेटा
को
इकट्ठा
करने
के
लिए
एक
अभियान
चलाने
को
कहा
है।
भारत
सरकार
बायोमेट्रिक
कैप्चर
योजना
को
पूरा
करने
के
लिए
राज्य
सरकार
जरूरी
सहायता
पहुंचा
रही
है।

हम
जमीनी
स्तर
पर
बदलते
हालात
के
साथ
तालमेल
बिठाने
के
लिए
अपनी
पॉलिसी
में
बदलाव
ला
रहे
हैं।
हम
म्यांमार
में
जल्द
से
जल्द
शांति
और
स्थिरता
लौटते
देखना
चाहते
हैं
ताकि
उनके
लोग
अपने
देश
लौट
सकें।


खबरें
और
भी
हैं…