
पूर्व
सांसद
धनंजय
सिंह
(फाइल
फोटो).
उत्तर
प्रदेश
के
जौनपुर
से
पूर्व
बाहुबली
सांसद
धनंजय
सिंह
की
मुश्किलें
बढ़
गई
हैं.
सात
साल
की
सजा
मामले
इलाहाबाद
हाई
कोर्ट
से
उन्हें
फौरी
राहत
नहीं
मिली
है.
कोर्ट
ने
सुनवाई
पूरी
हुए
बिना
धनंजय
सिंह
की
सजा
पर
रोक
लगाने
से
इनकार
कर
दिया
है.
इसके
साथ-साथ
कोर्ट
ने
निचली
अदालत
के
रिकॉर्ड
तलब
हुए
बिना
सुनवाई
किए
जाने
की
धनंजय
सिंह
के
वकीलों
की
मांग
भी
ठुकरा
दी
है.
सोमवार
को
हाई
कोर्ट
ने
धनंजय
सिंह
की
अर्जी
पर
सुनवाई
के
लिए
जौनपुर
की
जिला
अदालत
से
रिकॉर्ड
तलब
किया
है.
इसके
साथ-साथ
कोर्ट
ने
यूपी
सरकार
से
भी
इस
बारे
में
जवाब
मांगा
है.
कोर्ट
ने
यूपी
सरकार
को
22
अप्रैल
तक
अपना
जवाब
दाखिल
करने
का
निर्देश
दिया
है.
वहीं,
धनंजय
सिंह
की
अर्जी
पर
अगली
सुनवाई
के
लिए
कोर्ट
ने
24
अप्रैल
की
तारीख
तय
की
है.
ऐसे
में
जौनपुर
की
जिला
अदालत
को
24
अप्रैल
से
पहले
ही
केस
से
जुड़े
ओरिजिनल
रिकॉर्ड
हाई
कोर्ट
को
मुहैया
कराने
होंगे.
वकीलों
के
अनुरोध
को
कोर्ट
ने
ठुकराया
माना
जा
रहा
है
कि
अगर
24
अप्रैल
को
होने
वाली
सुनवाई
के
दौरान
हाई
कोर्ट
धनंजय
सिंह
की
सजा
पर
रोक
नहीं
लगाया
तो
उनकी
लोकसभा
चुनाव
लड़ने
की
उम्मीद
भी
धूमिल
हो
जाएंगी.
धनंजय
सिंह
की
तरफ
से
अदालत
में
केस
को
मेंशन
कर
यह
अनुरोध
किया
गया
था
कि
निचली
अदालत
का
रिकॉर्ड
आए
बिना
हलफनामे
और
सर्टिफाइड
कॉपी
के
आधार
पर
केस
की
सुनवाई
की
जाए.
हालांकि,
हाई
कोर्ट
ने
धनंजय
सिंह
के
वकीलों
के
अनुरोध
को
स्वीकार
करने
से
इनकार
कर
दिया.
दरअसल,
धनंजय
सिंह
ने
जौनपुर
की
जिला
अदालत
से
मिली
सात
साल
की
सजा
के
खिलाफ
हाई
कोर्ट
में
याचिका
दायर
की
है.
20
मार्च
और
1
अप्रैल
को
केस
टेकअप
नहीं
होने
की
वजह
से
हाई
कोर्ट
में
इस
मामले
की
सुनवाई
नहीं
हो
पाई
थी.
अब
अगर
हाई
कोर्ट
स्पेशल
कोर्ट
से
मिली
7
साल
की
सजा
रोक
नहीं
लगाता
है
तो
धनंजय
सिंह
चुनाव
में
नामांकन
नहीं
कर
पाएंगे.
धनंजय
सिंह
को
जौनपुर
की
स्पेशल
एमपी
एमएलए
कोर्ट
ने
सात
साल
की
सजा
सुनाई
है.
धनंजय
सिंह
ने
क्रिमिनल
अपील
दाखिल
की
है
कोर्ट
से
मिली
7
साल
की
सजा
के
खिलाफ
धनंजय
ने
क्रिमिनल
अपील
दाखिल
की
है.
अपील
में
सजा
को
रद्द
किए
जाने
और
फैसला
आने
तक
जमानत
पर
रिहा
किए
जाने
की
गुहार
लगाई
गई
है.
अगर
अदालत
फैसला
आने
तक
सजा
पर
रोक
लगा
देते
है
तो
फिर
धनंजय
सिंह
के
चुनाव
लड़ने
के
रास्ते
खुल
जाएंगे.
पीपुल्स
रिप्रजेंटेशन
एक्ट
के
तहत
2
साल
से
ज्यादा
की
सजा
पाने
वाला
व्यक्ति
चुनाव
नहीं
लड़
सकता
है.
जौनपुर
की
अदालत
ने
अपहरण
के
एक
मामले
में
धनंजय
सिंह
को
दोषी
करार
हुए
6
मार्च
को
को
7
साल
की
सजा
सुनाई
थी.