
आचार
संहिता
ने
रोके
कदम
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
ईदगाह
के
बड़े
मंच
से
मुखिया
से
लेकर
नेताओं
तक
की
फूल
बरसाई,
सारे
शहर
में
त्योहार
की
मुबारकबाद
देते
पोस्टर
होर्डिंग्स
का
मजमा,
ईद
मिलन
के
लिए
गलियों-गलियों,
घर-घर
दस्तक
देते
मुखिया
जी
और
नेता…आधा
महीना
जारी
रहने
वाले
ईद
मिलन
समारोह। शहर
की
उत्सव
संस्कृति
में
यह
सब
शामिल
है।
लेकिन
इस
बार
यह
नजारा
शहर
से
छिटका
हुआ
दिखाई
दे
रहा
है।
लोकसभा
चुनाव
के
लिए
लागू
आदर्श
आचार
संहिता
ने
यह
हालात
बनाए
हैं।
ईदगाह
में
होने
वाली
ईदुल-फितर
की
मुख्य
नमाज
के
बाद
यहां
एक
बड़े
मंच
पर
हाथों
में
फूल
लिए
मौजूद
रहने
वाले
प्रदेश
के
मुखिया
लोगों
को
अब
भी
याद
हैं।
पूर्व
मुख्यमंत्री
शिवराज
सिंह
चौहान
ने
इस
सिलसिले
को
अपनी
पूरी
पारी
के
दौरान
जिंदा
रखा
था।
मंच
से
नमाजियों
पर
फूल
बरसाने
के
बाद
वे
शाहजहानाबाद,
कबीटपुरा,
नारियल
खेड़ा
और
टीला
जमालपुरा
की
रंग
गलियों
में
भी
पहुंचकर
लोगों
से
ईद
मिल
लिया
करते
थे।
बड़ों
के
लिए
तोहफे
और
बच्चों
के
लिए
ईदी
भी
इस
दौरान
दिखाई
दिया
करती
थी।
सारे
शहर
पर
पोस्टर
होर्डिंग्स
की
छाया
ईद
जैसे
बड़े
त्यौहार
के
लिए
शुभकामना
और
बधाई
के
संदेश
देते
पोस्टर
होर्डिंग्स
लगाए
जाने
की
भी
एक
अघोषित
जंग
इस
शहर
ने
देखी
है।
रॉयल
मार्केट,
वीआईपी
रोड,
इकबाल
मैदान,
कमला
पार्क
रोड,
बुधवारा,
शाहजहांनाबाद,
जहांगीराबाद
जैसे
बड़े
इलाकों
से
लेकर
छोटी
गलियों
तक
में
यह
पोस्टर
दिखाई
दिया
करते
थे।
सियासी
लोगों
के
समर्थकों
के
अलावा
व्यापारी
संगठन
और
सामाजिक
कार्यकर्ता
भी
इन
पोस्टरों
पर
दिखाई
दिया
करते
थे।
मिलन
समारोह
के
नाते
जमावट
का
दौर
माह-ए-रमजान
में
बड़ी
रोजा
इफ्तार
दावतों
के
अलावा
शहर
में
बड़े
पैमाने
पर
ईद
मिलन
समारोह
आयोजित
किए
जाने
की
परंपरा
भी
रही
है।
बड़े
नेताओं
से
लेकर
छोटे
कार्यकर्ताओं
तक
मिलन
समारोह
यहां
करते
रहे
हैं।
इन
आयोजनों
में
शामिल
होना
भी
एक
प्रतिष्ठा
सिंबल
के
तौर
पर
माना
जाता
रहा
है।
चुनावी
शोर
में
सब
सूना
रमजान
माह
की
शुरुआत
और
आचार
संहिता
की
पाबंदी
साथ
साथ
ही
शुरू
हुई
हैं।
नतीजा
पहला
प्रभाव
बड़ी
सियासी
रोजा
इफ्तार
दावतों
पर
हुआ।
इसके
आगे
चलकर
होर्डिंग्स
और
पोस्टर
चकल्लस
भी
पाबंदियों
के
चलते
ठंडी
ही
बनी
रही।
बड़े
नेताओं
ने
अपने
समर्थकों
और
कार्यकर्ताओं
को
सख्ती
से
ऐसी
गतिविधियों
में
उनका
नाम
शामिल
करने
से
रोक
दिया
था।
सीएम
बनने
के
बाद
पहली
बार
ईदगाह
मंच
पर
चढ़ने
का
मौका
डॉ.
मोहन
यादव
को
नहीं
मिल
पाएगा।
उनकी
इस
मुलाकात,
जमावड़े
और
संबोधन
को
आचार
संहिता
का
उल्लंघन
या
कौम
खास
को
लुभाने
से
जोड़ा
जा
सकता
है।
जिसके
चलते
इस
तरह
के
किसी
आयोजन
की
उम्मीद
इस
ईद
पर
नहीं
की
जा
सकती।