
रमजान
का
आखिरी
अशरा
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
रमजान
माह
में
इस्लाम
की
पाक(पवित्र)
किताब
कुरआन
आसमान
से
उतारी
गई
थी।
इसके
लिए
एक
विशेष
रात
की
तस्दीक
नहीं
है।
बल्कि
रमजान
के
आखिरी
दस
दिनों
में
ही
इसके
होने
की
बात
कही
गई
है।
इनमें
रमजान
माह
की
21,
23,
25,
27
और
29वीं
रात
में
से
किसी
एक
को
शब
ए
कद्र
होने
की
संभावना
जताई
जाती
है।
जिसके
चलते
इस्लामी
धर्मावलंबी
इन
सभी
रातों
को
खास
इबादत
का
सिलसिला
बनाते
हैं।
रविवार
को
इस
कड़ी
की
पहली
यानी
21वीं
शब
होगी।
अहतेकाफ:
सिर्फ
अल्लाह
की
बात
रमजान
माह
के
तीसरे
और
आखिरी
अशरे
(अंतिम
10
दिन)
में
अहतेकाफ
(एकांतवास)
किया
जाता
है।
पूरे
गांव,
कस्बे,
बस्ती
या
मुहल्ले
से
एक
व्यक्ति
भी
इस
अरकान
(क्रिया)
को
पूरा
करने
बैठ
जाए,
तो
माना
जाता
है
कि
इसका
सवाब
(पुण्य)
उस
पूरे
गांव,
कस्बे,
बस्ती
या
मुहल्ले
के
लोगों
को
मिलता
है।
नेकी
और
अल्लाह
के
बेहतर
फैसलों
की
उम्मीद
के
साथ
देश
दुनिया
में
में
लोग
इस
अरकान
को
पूरा
करते
हैं।
अहतेकाफ
में
बैठने
वाले
अपने
परिवार,
समाज,
बाहरी
लोगों
और
दुनियावी
कामों
से
पूरी
तरह
दूरी
बना
लेते
हैं।
इस
दौरान
वे
सिर्फ
नमाज,
रोजा,
कुरआन
की
तिलावत,
तस्बीह
और
अल्लाह
के
जिक्र
में
ही
वक्त
गुजारते
हैं।
21वीं
रात
से
शुरू
हुआ
ये
अहतेकाफ
ईद
का
चांद
दिखाई
देने
पर
पूरा
होता
है।
मुकम्मल
कुरान
का
जश्न
रमजान
माह
में
अदा
की
जाने
वाली
खास
नमाज
तरावीह
का
समापन
भी
अधिकांश
मस्जिदों
में
27वीं
रात
को
किया
जाता
है।
जिसके
चलते
मस्जिदों
में
बड़े
जलसे,
उलेमाओं
की
तकरीरें
और
तबर्रुक
(प्रसाद)
वितरण
के
कार्यक्रम
भी
होते
हैं।
घरों
में
पढ़े
जा
रहे
कुरआन
का
मुकम्मल
और
इसके
कुबूल
किए
जाने
के
लिए
दुआएं
भी
की
जाती
हैं।
और
अब
भागमभाग
माह
ए
रमजान
के
अपने
अंतिम
पढ़ाव
की
तरफ
बढ़ने
के
साथ
लोग
ईद
की
तैयारियों
की
तरफ
भी
बढ़
गए
हैं।
बाजारों
में
खरीद
फरोख्त
की
भीड़
बढ़
गई
हैं।
मुसाफिर
अपने
घरों
की
तरफ
बढ़ने
लगे
हैं।
ईद
का
त्योहार
अपनों
के
साथ
मनाने
के
लिए
लोगों
ने
अपनी
छुट्टियों
और
कामकाज
का
एडजस्टमेंट
भी
शुरू
कर
दिया
है।
खान
आशु