सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी रामदेव की माफी-आयुष मंत्रालय को भी लगाई फटकार, पढ़ें शीर्ष कोर्ट की दस बड़ी टिप्पणी

सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी रामदेव की माफी-आयुष मंत्रालय को भी लगाई फटकार, पढ़ें शीर्ष कोर्ट की दस बड़ी टिप्पणी
सुप्रीम कोर्ट ने नहीं मानी रामदेव की माफी-आयुष मंत्रालय को भी लगाई फटकार, पढ़ें शीर्ष कोर्ट की दस बड़ी टिप्पणी


सुप्रीम
कोर्ट
ने
रामदेव
की
माफी
को
स्‍वीकार
नहीं
क‍िया.

बाबा
रामदेव
और
पतंजलि
आयुर्वेद
के
प्रबंध
निदेशक
आचार्य
बालकृष्ण
की
ओर
से
मांगी
गई
माफी
पर
सुप्रीम
कोर्ट
संतुष्ट
नही
है.
सुप्रीम
कोर्ट
ने
बाबा
रामदेव
और
पतंजलि
का
माफीनामा
स्वीकार
नहीं
किया
है.
इसके
साथ
ही
दोनों
को
16
अप्रैल
को
दोबारा
पेश
होने
के
लिए
कहा
गया
है.
सुनवाई
के
दौरान
कोर्ट
ने
केंद्र
सरकार
की
ओर
से
दाखिल
किए
गए
जवाब
पर
भी
असंतुष्टि
जाहिर
की.
कोर्ट
में
बाबा
रामदेव
की
तरफ
से
वरिष्ठ
वकील
मुकुल
रोहतगी
ने
दलीलें
दीं.

भ्रामक
विज्ञापन
मामले
में
बुधवार
को
बाबा
रामदेव
और
पतंजलि
के
प्रबंध
निदेशक
आचार्य
आचार्य
बालकृष्ण
ने
कोर्ट
में
हलफनामा
और
माफीनामा
दाखिल
किया.
सरकार
की
ओर
से
सुप्रीम
कोर्ट
में
पेश
सॉलिसिटर
जनरल
तुषार
मेहता
ने
कहा
कि
वकीलों
को
मेरा
सुझाव
था
कि
माफी
बिना
शर्त
होनी
चाहिए.
इस
पर
कोर्ट
ने
कहा
कि
वे
सिफारिश
पर
विश्वास
नहीं
करते.
कोर्ट
ने
मामले
की
सुनवाई
के
वक्त
कई
अहम
बातें
कहीं.

कोर्ट
की
दस
बड़ी
बातें

  1. रामदेव
    और
    आचार्य
    बालकृष्ण
    के
    मामले
    में
    की
    सुनवाई
    करते
    हुए
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    बिना
    शर्त
    माफी
    मांगने
    से
    हम
    संतुष्ट
    नहीं
    है.
    एसजी
    मेहता
    ने
    कहा
    कि
    वकीलों
    को
    मेरा
    सुझाव
    था
    कि
    माफी
    बिना
    शर्त
    होनी
    चाहिए.
    बेंच
    ने
    कहा
    कि
    वे
    सिफारिश
    में
    विश्वास
    नहीं
    करते.
    मुफ्त
    सलाह
    हमेशा
    वैसे
    ही
    स्वीकार
    की
    जाती
    है.
    हम
    दाखिल
    हलफनामे
    से
    संतुष्ट
    नहीं
    हैं.
    अचानक
    एक
    हस्तक्षेप
    आवेदन
    दाखिल
    होने
    पर
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    नाराजगी
    जताई
    और
    10
    हजार
    रुपये
    जुर्माना
    लगाकर
    इसे
    खारिज
    कर
    दिया.
  2. मुकुल
    रोहतगी
    ने
    बाबा
    रामदेव
    की
    तरफ
    से
    दलील
    दीं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    जब
    मामला
    सार्वजनिक
    चर्चा
    में

    गया
    तो
    हम
    क्यों
    हलफनामे
    में
    किसी
    आधार
    पर
    राहत
    दें.
    रोहतगी
    ने
    कहा
    कि
    हमने
    प्रक्रिया
    पूरी
    की
    थी.
    दूसरे
    पक्ष
    को
    भी
    हलफनामा
    दिया
    था.
    रोहतगी
    ने
    कहा
    कि
    मेरे
    मुवक्किल
    बिना
    शर्त
    माफी
    मांग
    रहे
    हैं,
    क्योंकि
    जो
    आश्वासन
    अदालत
    के
    समक्ष
    दिया
    गया,
    उसका
    पालन
    नहीं
    किया
    गया.
    उल्लंघन
    के
    लिए
    माफी
    दें.
    भविष्य
    में
    ऐसा
    नहीं
    होगा.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    रोहतगी
    से
    कहा
    कि
    आप
    कानून
    जानते
    हैं.
    पिछले
    हलफनामे
    में
    हेरफेर
    किया
    गया
    एनेक्चर
    में,
    यह
    बहुत
    ही
    गंभीर
    है.
    आप
    छूट
    मांग
    रहे
    हैं
    और
    वो
    भी
    उल्लंघन
    करके.

  3. सुनवाई
    के
    दौरान
    बाबा
    रामदेव
    और
    आचार्य
    बालकृष्ण
    कोर्ट
    में
    मौजूद
    रहे.
    कोर्ट
    ने
    सुनवाई
    के
    दौरान
    कहा
    कि
    अदालत
    के
    आदेशों
    को
    हल्के
    में
    नही
    लिया
    जा
    सकता.
    आपके
    खेद
    जताने
    के
    तरीके
    को
    हम
    मंजूर
    नहीं
    कर
    सकते
    हैं.
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    21
    नवंबर
    के
    कोर्ट
    के
    आदेश
    के
    बाद
    भी
    अगले
    दिन
    प्रेस
    कांफ्रेंस
    की
    गई.
    रोहतगी
    ने
    कहा
    कि
    हलफनामा
    वकील
    द्वारा
    दाखिल
    किया
    गया
    है.
    पक्षकार
    द्वारा
    नहीं.
    अदालत
    में
    पक्षकार
    ने
    कुछ
    गलत
    नहीं
    किया.
  4. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    इसमें
    निर्माताओं
    के
    लिए
    चेतावनी
    कहां
    है.
    रामदेव
    ने
    अपना
    वकील
    भी
    बदल
    लिया
    है
    इस
    बार.
    आज
    मुकुल
    रोहतगी
    पैरवी
    कर
    रहे
    थे.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    आपकी
    माफीनामा
    रिकार्ड
    पर
    नहीं
    है,
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    हम
    इसे
    जानबूझ
    कर
    किया
    गया
    डिफॉल्ट
    मान
    रहे
    हैं.
    आपको
    कई
    बार
    मौका
    दिया
    गया.
    अब
    आपको
    परिणाम
    भुगतने
    होंगे.
  5. सुप्रीम
    कोर्ट
    में
    मामले
    की
    सुनवाई
    जस्टिस
    हिमा
    कोहली
    की
    अध्यक्षता
    वाली
    पीठ
    ने
    की.
    उन्होंने
    कहा
    कि
    हमें
    आपकी
    माफ़ी
    को
    उसी
    तिरस्कार
    के
    साथ
    क्यों
    नहीं
    लेना
    चाहिए,
    जैसा
    कि
    अदालती
    उपक्रम
    को
    दिखाया
    गया
    है?
    हम
    आश्वस्त
    नहीं
    हैं.
    अब
    इस
    माफ़ी
    को
    ठुकराने
    जा
    रहे
    हैं.
    रोहतगी
    ने
    कहा
    कि
    कृपया
    10
    दिनों
    के
    बाद
    इसे
    सूचीबद्ध
    करें,
    अगर
    कुछ
    और
    है
    तो
    मैं
    कर
    सकता
    हूं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    हम
    अंधे
    नहीं
    हैं.
    रोहतगी
    ने
    कहा
    लोग
    गलतियाँ
    करते
    हैं.
    इस
    पर
    बेंच
    ने
    कहा
    कि
    तब
    उन्हें
    कष्ट
    झेलना
    होगा.
    हम
    इस
    मामले
    में
    उदार
    नहीं
    होना
    चाहते.
  6. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    अब
    समाज
    में
    एक
    संदेश
    जाना
    चाहिए,
    देखिए
    मंत्रालय
    का
    जवाब.
    हम
    इसे
    आपके
    आचरण
    का
    हिस्सा
    बना
    रहे
    हैं.
    आप
    किस
    प्रकार
    की
    दवाएं
    लेकर

    रहे
    हैं?
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    एसजी
    से
    कहा
    मिस्टर
    मेहता,
    जब
    उन्होंने
    आपको
    दिए
    गए
    बयान
    का
    उल्लंघन
    किया,
    तो
    आपने
    क्या
    किया?
    आप
    बैठो?
    आपने
    हमारे
    उकसाने
    का
    इंतज़ार
    किया?
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    सभी
    अधिकारियों
    को
    यहीं
    निलंबित
    क्यों
    नहीं
    किया
    जाना
    चाहिए?
    ड्रग
    ऑफिसर
    और
    लाइसेंसिंग
    ऑफिसर
    का
    क्या
    काम
    है?
  7. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    कानून
    का
    माखौल
    बनाया
    जा
    रहा
    है
    और
    प्राधिकार
    चुप
    बैठे
    हैं.
    बड़ी
    आसानी
    से
    आयुर्वेद
    दवाईयां

    रही
    हैं,
    जो
    चाहे
    उल्लंघन
    किया
    जा
    रहा
    है
    और
    आप
    स्वीकार
    कर
    रहे
    हैं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    आयुष
    मंत्रालय
    को
    फटकार
    लगाते
    हुए
    कहा
    कि
    आखिर
    आपने
    हलफनामे
    में
    क्या
    कहा
    है.
    देखिए,
    उससे
    क्या
    होता
    है.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    पत्र
    भेजने
    से
    क्या
    होता
    है.
    अनुपालन
    हो
    जाता
    है.
    वकील
    ने
    कहा
    कि
    एक्शन
    टेकन
    रिपोर्ट
    भी
    है.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    हिन्दी
    में
    दाखिल
    मंत्रालय
    की
    रिपोर्ट
    और
    निर्देश
    पढ़ने
    को
    कहा.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    सर्वोच्च
    अदालत
    का
    मजाक
    बन
    गया
    है.
  8. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    हिन्दी
    में
    दाखिल
    मंत्रालय
    की
    रिपोर्ट
    और
    निर्देश
    पढ़ने
    को
    कहा.
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    सर्वोच्च
    अदालत
    का
    मजाक
    बन
    गया
    है.
    अब
    हम
    माफी
    नहीं
    स्वीकार
    करेंगे.
    आप
    भी
    इसमें
    शामिल
    हैं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    आयुष
    मंत्रालय
    को
    कड़ी
    फटकार
    लगाई.
    कहा
    कि
    आप
    इस
    तरह
    से
    आदेश
    जारी
    करते
    हैं.
    किस
    बुनियाद
    पर
    आपने
    यह
    आदेश
    दिया.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    किससे
    आपने
    कानूनी
    सलाह
    ली.
    हाईकोर्ट
    ने
    रोक
    लगा
    दी,
    ऐसा
    कैसे
    लगा
    आपको.
    क्यों
    ना
    हम
    मान
    लें
    कि
    आपकी
    मिलीभगत
    है.
    आपने
    पत्र
    भेजे,
    चेतावनी
    दी,
    जबकि
    एक्ट
    में
    सीधा
    एक्शन
    लेने
    को
    कहा
    गया.
  9. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    उत्तराखंड,
    संयुक्त
    सचिव
    लाइसेंस
    प्राधिकार
    को
    कड़ी
    फटकार
    लगाई।
    आप
    लोगों
    की
    जान
    के
    साथ
    खिलवाड़
    कर
    रहे
    हैं.
    नवंबर
    से
    आदेश
    हो
    रहे
    हैं,
    फिर
    भी
    आपको
    बुद्धि
    नहीं
    आई.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    उत्तराखंड
    के
    विधि
    विभाग
    को
    भी
    तलब
    करेंगे.
    सभी
    हीलाहवाली
    कर
    रहे
    हैं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    हम
    निगरानी
    कर
    रहे
    हैं,
    फिर
    भी
    आपका
    ये
    हाल
    है.
    लोगों
    का
    क्या
    होगा.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    आप
    लोगों
    की
    सभी
    दलीलें
    बेकार
    हैं.
  10. सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    9
    महीने
    तक
    कार्यवाही
    नहीं
    की.
    आप
    लोगों
    ने
    सिर्फ
    कागजी
    कार्रवाई
    की
    है.
    कोई
    कदम
    नहीं
    उठाया,
    क्यों
    मौका
    दें
    हम.
    बाबा
    रामदेव
    के
    वकील
    ने
    कहा
    दोबारा
    ऐसा
    नहीं
    होगा.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    हम
    संतुष्ट
    नहीं
    है.
    मामला
    सिर्फ
    आपके
    लाभ
    का
    नहीं,
    बल्कि
    जनता
    के
    स्वास्थ्य
    संबंधी
    है.
    सारा
    आपका
    विभाग
    कागज
    पर
    चलता
    है
    क्या?
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    हम
    सभी
    एफएमसीजी
    को
    लेकर
    कह
    रहे
    हैं,
    जो
    उल्लंघन
    कर
    रही
    हैं.
    जनता
    को
    धोखा
    दे
    रही
    हैं.
    सुप्रीम
    कोर्ट
    ने
    कहा
    कि
    हमारे
    पास
    कोई
    विकल्प
    नहीं
    है,
    हम
    कदम
    उठाएंगे.