
कांग्रेस.
महाराष्ट्र
में
महाविकास
अघाड़ी
की
सीट
शेयरिंग
में
उत्तर
मुंबई
की
लोकसभा
सीट
कांग्रेस
के
हिस्से
में
गई
है,
लेकिन
कांग्रेस
के
सामने
मुसीबत
ये
है
कि
इस
सीट
के
लिए
उनके
पास
उम्मीदवार
नहीं
है.
कांग्रेस
अध्यक्ष
नाना
पटोले
ने
शिवसेना
यूबीटी
के
नेता
विनोद
घोसालकर
को
ही
प्रस्ताव
दिया
कि
वो
कांग्रेस
के
चुनाव
चिह्न
पर
लड़ें,
लेकिन
घोसालकर
ने
इंकार
कर
दिया.
घोसालकर
कहना
है
कि
पहला
वो
कट्टर
शिवसैनिक
हैं.
कांग्रेस
के
निशान
पर
चुनाव
नहीं
लड़
सकते.
दूसरा
ये
कि
कांग्रेस
के
निशान
पर
लड़ने
से
जीतने
के
चांस
भी
नहीं
है.
वो
अगर
चुनाव
लड़ेंगे
तो
एमवीए
उम्मीदवार
के
तौर
पर
और
यूबीटी
के
चुनाव
चिह्न
मशाल
पर.
घोसालकर
अब
ये
भी
सवाल
उठा
रहे
हैं
कि
अगर
उम्मीदवार
ही
नहीं
था
तो
शीट
शेयरिंग
में
सीट
लेने
का
मतलब
ही
क्या
है?
उत्तर
मुंबई
बीजेपी
का
रहा
है
गढ़
दरअसल
इस
सीट
पर
राम
नाईक
गोपाल
शेट्टी
लड़ते
रहे
हैं,
जबकि
इस
बार
पीयूष
गोयल
मैदान
में
हैं.
उत्तर
मुंबई
बीजेपी
का
गढ़
मानी
जाती
है.
संजय
निरुपम
से
लेकर
उर्मिला
मातोंडकर
इस
सीट
से
चुनाव
हार
चुकी
हैं.
ये
भी
पढ़ें
कांग्रेस
में
नाराजगी
और
उम्मीदवारों
की
कमी
को
लेकर
बीजेपी
ने
भी
तंज
कसा
है.
विधायक
राम
कदम
ने
कटाक्ष
किया
कि
कांग्रेस
उद्धव
और
शरद
पवार
के
सामने
लाचार
हो
गई
है.
उन्हें
सीट
भीख
मांग
कर
मिली
वो
भी
ऐसी
सीट
मिली
है,
जहां
उनके
पास
उम्मीदवार
नहीं
हैं.
अब
कांग्रेसी
यूबीटी
के
ही
नेता
को
लड़ाने
के
कोशिश
में
है.
जानबूझकर
ऐसी
सीट
कांग्रेस
की
दी
गई
है,
जो
वो
जीत
नहीं
सकती.
बीजेपी
ने
कांग्रेस
पर
कसा
तंज
बीजेपी
नेता
राम
कदम
साफ
आरोप
लगा
रहे
हैं
कि
उद्धव
और
शरद
पवार
मिलकर
राजनीतिक
साजिश
कर
रहे
हैं
और
कांग्रेस
को
खत्म
कर
रहे
हैं,
जो
कि
एक
राष्ट्रीय
पार्टी
है.
विशाल
पाटिल
से
लेकर
लेकर
वर्षा
गायकवाड
और
निरुपम
जैसे
नेता
नाराज
हैं.
भिवंडी
सीट
भी
नहीं
मिलने
से
स्थानीय
कांग्रेसी
नाराज
हैं.
सांगली
सीट
वसंत
पाटिल
की
विरासत
रही
है,
इसलिए
विश्वजीत
कदम
और
विशाल
पाटिल
नाराज
हैं.
संजय
निरुपम
ने
नाराज
होकर
पार्टी
छोड़
दिया
है.
अब
जान
बूझकर
ऐसी
सीट
कांग्रेस
को
दो
गई
है,
जहां
उनके
पास
नेता
नही
है
उम्मीदवार
नहीं
है.
मुंबई
में
उत्तर
मुंबई
के
बाद
उत्तर
मध्य
मुंबई
सीट
भी
कांग्रेस
को
दी
गई
है,
लेकिन
इस
पर
भी
कांग्रेस
के
पास
उम्मीदवार
नहीं
है.
वर्षा
गायकवाड
चुनाव
लडना
चाहती
थी,
लेकिन
वो
दक्षिण
मध्य
सीट
चाहती
थी
जो
कि
उनके
पिता
की
परपरागत
सीट
थी,
वो
सीट
भी
उद्धव
ने
हथिया
ली
है.