Satta Ka Sangram: मंडला के युवाओं के लिए रोजगार मुद्दा, बोले- धर्म नहीं, शिक्षा-स्वास्थ्य बनें चुनावी मुद्दे

Satta Ka Sangram: मंडला के युवाओं के लिए रोजगार मुद्दा, बोले- धर्म नहीं, शिक्षा-स्वास्थ्य बनें चुनावी मुद्दे
Satta Ka Sangram in Mandla Youth raised issues of employment education and health

Satta
Ka
Sangram:
युवाओं
ने
उठाए
रोजगार,
शिक्षा
और
स्वास्थ्य
के
मुद्दे।


फोटो
:
अमर
उजाला

विस्तार

अमर
उजाला
के
चुनावी
रथ
‘सत्ता
का
संग्राम’
की
शुरुआत
नौ
अप्रैल
को
मध्यप्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
से
हुई।
आज
शुक्रवार
को
दिन
भर
मंडला
लोकसभा
क्षेत्र
में
सत्ता
का
संग्राम
जारी
है।
यहां
भाजपा
ने
छह
बार
के
सांसद
फग्गन
सिंह
कुलस्ते
और
कांग्रेस
ने
ओंकार
सिंह
मरकाम
को
चुनावी
मैदान
में
उतार
है।
पढ़िए,
सुबह
मंडला
बस
स्टैंड
के
सामने
लोगों
के
साथ
चाय
पर
चर्चा
की
गई।
जिसमें
लोगों
दिल
खोलकर
अपनी
बात
रखी।
वहीं,
दोपहर
में
युवाओं
से
चर्चा
की
गई।
जानिए,
क्या
बोले
युवा? 

शिक्षक
सुनील
कुमार
मनोरिया
ने
कहा
कि
मप्र
में
सबसे
बड़ी
समस्या
भर्तियों
की
हैं।
यहां,
भर्तियां
नहीं
निकलती
हैं
और
जब
निकलती
हैं
तो
परीक्षांए
नहीं
होती
हैं।
अगर,
परीक्षाएं
होती
हैं
तो
रिजल्ट
अटका
रहा
है।
हाल
ही
में
हुई
पटवारी
परीक्षा
में
जो
बच्चे
टॉपर
बने
उन्हें
जिला
भी
नहीं
पता
था।
यह
बात
एक
टीवी
चैनल
के
इंटरव्यू
में
सामने
आया
था।
लेकिन,
जांच
में
कुछ
नहीं
हुआ,
बाद
में
उनकी
ज्वाइनिंग
हो
गई।
चुनाव
में
असल
मुद्दे
बेरोजगार,
भुखमरी
और
स्वास्थ्य
सुविधाएं
होनी
चाहिए।
लेकिन,
नेता
इन
मुद्दों
से
ध्यान
भटकाकर
जाति
और
धर्म
ले
आते
हैं।
उन्होंने
कहा
कि
अगर,
मप्र
में
1000
लोगों
की
भर्ती
निकलती
है
तो
500
जगह
सेटिंग
से
भरी
जातीं
है
और
500
पर
कड़ी
फाइट
होती
है।
मेरा
सुझाव
है
कि
सरकार
प्रदेश
में
एक
कलेंडर
जारी
करे,
जिसमें
वैकंसी
को
लेकर
पूरी
जानकारी
दी
जाए।
सरकार
धर्म
की
राजनीति

करे,
युवाओं
के
भविष्य
को
लेकर
काम
करे। 

छात्रा
जयंती
ने
कहा
कि
सरकार
वैंकसी
बहुत
कम
नहीं
आती
हैं।
अगर,
वैंकसी
आती
है
तो
उसमें
कुछ

कुछ
गड़बड़
हो
जाती
है।
जिससे
नौकरी
नहीं
मिलती,
हमारी
मांग
है
कि
सरकार
इस
पर
फोकस
रखकर
काम
करे। 

एक
अन्य
छात्र
सुभाष
ने
कहा
कि
चुनाव
में
मुख्य
मुद्दे
शिक्षा
स्वास्थ्य
और
रोजगार
होने
चाहिए।
मंडला
जिले
में
शिक्षका
की
हालत
ये
है
कि
मवई
और
घुघरी
विकासखंड
के
ज्यादतर
सरकारी
स्कूलों
में
एक
शिक्षक
है।
अतिथि
शिक्षकों
की
भर्ती
नहीं
हो
पाई
है।
ऐसा
लगता
है
कि
यहां
ठेके
पर
शिक्षा
का
काम
किया
जा
रहा
है।
रोजगार
की
बात
करें
तो
यहां
ऐसा
कुछ
है
ही
नहीं
जिससे
लोगों
को
रोजगार
मिल
सके।
जिन
लोगों
के
पास
मास्टर
की
डिग्री
वे
मजदूरी
का
काम
कर
रहे
हैं।
 



Satta
Ka
Sangram:
मंडला
में
लोगों
की
मिली-जुली
राय,
चाय
पर
चर्चा
में
लोग
बोले-
गारंटी
तो
मोदी
की
ही
चलेगी,
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