
इसी
आवास
में
रहते
थे
आप
नेता
राज
कुमार
आनंद
दिल्ली
सरकार
में
मंत्री
पद
से
इस्तीफा
देकर
इन
दिनों
जितना
राजकुमार
आनंद
चर्चा
में
हैं,
उतना
ही
चर्चा
में
सिविल
लाइंस
को
वो
बंगला
नंबर
4
भी
है,
जहां
राजकुमार
आनंद
रहते
थे.
लोग
दबी
जुबान
में
लोग
इस
बंगले
को
श्रापित
मान
रहे
हैं.
देश
की
राजधानी
दिल्ली
में
लूटियन
के
बाद
सबसे
पॉश
इलाके
में
सिविल
लाइंस
शुमार
है.
जहां
दिल्ली
के
मुख्यमंत्री
अरविंद
केजरीवाल
से
लेकर
LG
और
तमाम
मंत्री
रहते
हैं,
लेकिन
इन
दिनों
राजनैतिक
गलियारों
में
एक
चर्चा
है
और
वह
चर्चा
बंगला
को
लेकर
भी
है.
सवाल
उठ
रहे
हैं
कि
क्या
सिविल
लाइंस
का
बंगला
नंबर
4
श्रापित
है?
क्या
इस
बंगले
में
रहने
वाले
मंत्रियों
को
अपना
सब
कुछ
गंवाना
पड़ा?
जो
बंगला
कुछ
दिनों
पहले
तक
मंत्री
से
मिलने
वालों
से
गुलजार
रहता
था,
वहां
अब
गहरी
विरानी
और
सन्नाटा
छाया
हुआ
है.
अंधरे
की
गोद
में
समाया
हुआ
है
बंगला
रोशनी
से
नहाने
वाला
मंत्री
का
बंगला
अब
अंधेरे
की
गोद
में
समाया
हुआ
है.
मंत्री
के
बंगले
पर
कोई
नहीं
है.
दरवाजे
पर
ताले
लगे
हैं.
गेट
के
नीचे
बिल्ली
ने
घर
बना
लिया
है,
तो
पेड़ों
से
चमगादड़
का
बसेरा
है.
ये
भी
पढ़ें
दिल्ली
में
आम
आदमी
पार्टी
की
सरकार
बनने
के
बाद
इस
बंगले
में
तीन
कैबिनेट
मंत्री
रहे
और
तीनों
में
से
एक
भी
अपना
कार्यकाल
पूरा
नहीं
कर
पाया.
आइए
जानते
हैं
कि
कौन
हैं
वे
मंत्री.
1.
संदीप
कुमार:
2015
में
संदीप
दिल्ली
की
सुल्तानपुर
माजरा
विधानसभा
सीट
से
जीतकर
विधायक
बने
संदीप
कुमार
को
दिल्ली
का
महिला
एवं
बाल
कल्याण
मंत्री
बनाया
गया
था,
लेकिन
2016
सैक्स
स्कैंडल
सामने
आने
से
मंत्री
पद
से
बर्खास्त
किया
गया.
बाद
में
बलात्कार
के
मामले
में
गिरफ्तार
भी
हुए.
2.
राजेन्द्र
पाल
गौतम:
2020
में
आम
आदमी
पार्टी
की
सरकार
में
राजेंद्र
पाल
गौतम
दूसरी
बार
मंत्री
बने,
लेकिन
बाबा
साहेब
की
22
प्रतिज्ञाओं
को
प्रचारित
करने
और
हिंदू
देवी
देवताओं
को
ना
मानने
के
ब्यान
के
बाद
उठे
विवाद
के
चलते
राजेन्द्र
पाल
गौतम
को
अक्टूबर
2022
में
अपने
मंत्री
पद
से
इस्तीफा
देना
पड़ा.
3.राजकुमार
आनंद:
राजेन्द्र
पाल
गौतम
के
इस्तीफे
के
बाद
अरविंद
केजरीवाल
ने
राजकुमार
आनंद
पर
भरोसा
जताया
और
2020
में
पहली
बार
विधायक
बने
राजकुमार
आनंद
को
2022
में
मंत्री
बनाया.
7
विभागों
की
जिम्मेदारी
दी,
लेकिन
2
नवंबर
2023
को
राजकुमार
आनंद
के
घर
ED
का
छापा
पड़ा.
23
घंटे
तक
ED
की
टीम
घर
पर
मौजूद
रहीं.
आनंद
की
गिरफ्तारी
की
अटकलें
लगने
लगी.
21
मार्च
को
अरविंद
केजरीवाल
की
गिरफ्तारी
हुई
और
10
अप्रैल
को
राजकुमार
आनंद
ने
पार्टी
पर
काम
ना
करने
देने
और
भ्रष्टाचार
का
आरोप
लगाकर
इस्तीफा
दे
दिया.