
मप्र
लोकसभा
चुनाव
2024
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
मध्यप्रदेश
का
क्षेत्र
जो
मैग्नीज
नगरी
के
नाम
से
भी
जाना
जाता
है,
उसका
राजनीतिक
इतिहास
भी
खास
है।
आदिवासी
और
जनजाति
बाहुल
वाले
बालाघाट
की
खनिज,
वन
से
भरपूर
आच्छादित
क्षेत्र
के
रूप
में
अलग
ही
पहचान
है।
बालाघाट
की
सीमा
महाराष्ट्र
और
छत्तीसगढ़
के
संपर्क
में
हैं।
मध्यप्रदेश
का
बालाघाट
लाल
गलियारा
(नक्सल
प्रभावित
क्षेत्र)
का
हिस्सा
है,
जो
हमेशा
चर्चा
में
रहता
है।
पिछले
2023
प्रदेश
के
विधानसभा
चुनाव
में
बालाघाट
लोकसभा
के
8
क्षेत्रों
में
से
चार
कांग्रेस
और
चार
भाजपा
को
प्राप्त
हुए
थे।
लोकसभा
क्षेत्र
में
भाजपा
और
कांग्रेस
को
प्राप्त
मतों
में
कांग्रेस
के
उम्मीदवार
56697
मतों
की
और
भाजपा
के
उम्मीदवारों
ने
60203
मतों
की
बढ़त
ली
थी।
इस
तरह
यदि
लोकसभा
क्षेत्र
के
अनुसार
देखें
तो
भाजपा
की
3533
मत
अधिक
प्राप्त
हुए
हैं।
जाहिर
है
विधानसभा
चुनाव
में
बालाघाट
के
लोकसभा
क्षेत्र
में
भाजपा
का
प्रदर्शन
काफी
कमजोर
रहा
है।
लोकसभा
और
विधानसभा
की
वोट
देने
की
प्रकृति
मतदाता
की
कुछ
अलग
रही
है।
1998
से
क्षेत्र
के
लोकसभा
चुनाव
में
भाजपा
का
उम्मीदवार
विजय
होता
रहा
है।
अन्य
दलों
को
भी
मिला
मौका
बालाघाट
में
1962
में
प्रजा
सोशलिस्ट
पार्टी
के
भोलाराम
राम
जी
चुने
गए
थे।
प्रजा
सोशलिस्ट
पार्टी
का
गठन
जयप्रकाश
नारायण
ने
1952
में
किया
था।
1972
तक
यह
पार्टी
अस्तित्व
में
रही,
बाद
में
इसका
अन्य
दल
में
विलय
हो
गया
था।
1977
में
रिपब्लिक
पार्टी
इंडिया
खोबरागडे
दल
का
गठन
भाऊ
राव
खोबरागडे
के
नाम
पर
किया
गया
था।
इस
दल
का
भी
यहां
प्रभाव
रहा।
1977
के
चुनाव
में
जब
देश
में
भारतीय
लोकदल
जनता
पार्टी
की
आंधी
चल
रही
थी,
उस
वक्त
यहां
से
रिपब्लिक
पार्टी
इंडिया
खोबरागडे
के
कचरमल
जैन
विजय
रहे
थे।
हस्तियों
से
मिलते-जुलते
नाम
बालाघाट
लोकसभा
निर्वाचन
में
1957
से
चुनावी
मैदान
में
खड़े
हुए
उम्मीदवारों
के
नाम
में
राम
जरूर
रहे
हैं।
जैसे
भोलाराम
राम
जी,
शंकरलाल
राजाराम,
फदलराम,
रघुनाथ,
रामचरण,
श्योराम
और
दयाराम
नाम
के
उम्मीदवार
खड़े
हुए।
प्रख्यात
लेखक
मुल्कराज
आनंद
अंग्रेजी
साहित्य
के
चिंतक
और
विचारक
थे।
आपने
कई
किताबों
का
लेखन
किया।
भारत
सरकार
ने
पद्मभूषण
से
सम्मानित
किया
था।
एक
संयोग
रहा
है
कि
1998
में
बालाघाट
से
एक
निर्दलीय
उम्मीदवार
चुनाव
मैदान
में
था,
जिनका
नाम
मुल्कराज
आनंद
था।
इस
निर्दलीय
उम्मीदवार
की
जमानत
जब्त
हो
गई
थी।
अभिनेता
महिपाल
के
नाम
का
प्रत्याशी
भी
चुनाव
लड़
चुका
है।
1999
के
लोकसभा
चुनाव
में
क्षेत्र
से
एक
निर्दलीय
उम्मीदवार
चुनावी
मैदान
में
थे
उनका
नाम
महिपाल
था।
इन
महिपाल
का
फिल्मों
से
कोई
वास्ता
नहीं
था।
कंकर
मुंजारे
कई
पार्टियों
से
रहे
उम्मीदवार
बालाघाट
में
1989
में
निर्दलीय
उम्मीदवार
और
क्षेत्र
के
कद्दावर
नेता
कंकर
मुंजारे
विजय
रहे
थे।
इससे
पूर्व
कंकर
मुंजारे
1984
में
निर्दलीय
चुनाव
में
खड़े
हुए
थे।
1991
में
जनता
दल,
1996
में
क्रान्तिकारी
समाजवादी
दल,
1998
में
समता
पार्टी,
1999
में
सिवनी
लोकसभा
से
जनता
पार्टी,
2004
जनता
पार्टी,
2009
में
राष्ट्रीय
जनता
दल
और
2019
में
बहुजन
समाज
पार्टी
से
बालाघाट
लोकसभा
से
चुनाव
लड़
चुके
हैं।
इस
बार
2024
लोकसभा
चुनाव
में
कंकर
मुंजारे
बसपा
के
उम्मीदवार
के
रूप
में
अपना
भाग्य
आजमा
रहे
हैं।
कंकर
मुंजारे
की
पत्नी
अनुभा
मुंजारे
2014
में
बालाघाट
से
सपा
से
लोकसभा
चुनाव
लड़
चुकी
हैं।
वर्तमान
में
अनुभा
मुंजारे
बालाघाट
से
कांग्रेस
की
विधायक
हैं
और
क्षेत्र
में
कांग्रेस
उम्मीदवार
का
प्रचार
कर
रही
हैं।
बालाघाट
लोकसभा
चुनाव
2024
में
13
उम्मीदवार
चुनाव
मैदान
में
हैं।
कांग्रेस
से
अशोक
सिंह
सरस्वर,
बसपा
से
कंकर
मुंजारे
और
भाजपा
से
भारती
पारधी
मुख्य
उम्मीदवार
हैं।
पूर्व
सांसद
ढालसिंह
बिसेन
को
इस
बार
टिकट
नहीं
दिया
है।
भारती
पारधी
महिला
मोर्चा
से
जुड़ी
हैं
और
पार्षद
हैं।
उन्हें
सीधे
लोकसभा
का
टिकट
मिला
है।
वे
अच्छी
वक्ता
हैं
और
उनके
ससुर
भोलाराम
पारधी
1962
में
क्षेत्र
के
सांसद
रहे
हैं।
पिछले
लोकसभा
चुनाव
में
भाजपा
के
ढालसिंह
बिसेन
2
लाख
42
हज़ार
66
मतों
से
विजय
रहे
थे।
विज्ञापन
रोचक
जानकारी
*
क्षेत्र
में
7
बार
कांग्रेस
और
6
बार
भाजपा
शेष
अन्य
3
उम्मीदवार
विजय
रहे
हैं।
*
सबसे
कम
मतों
से
विजय
1996
में
कांग्रेस
उम्मीदवार
विश्वेश्वर
भगत
की
1257
मतों
से
और
सबसे
बड़ी
विजय
भाजपा
के
2019
में
ढालसिंह
बिसेन
की
242066
मतों
से
रही
थी।
*
सबसे
कम
उम्मीदवार
वर्ष
1957
और
1962
में
चार
थे,
सर्वाधिक
उम्मीदवार
वर्ष
1996
और
2019
में
23
थे।
*
क्षेत्र
में
सबसे
न्यूनतम
मतदान
वर्ष
1962
में
45.18
प्रतिशत
और
सर्वाधिक
मतदान
वर्ष
2019
में
77.61
प्रतिशत
रहा
था।
*
1999
में
भाजपा
के
वरिष्ठ
नेता
प्रह्लाद
पटेल
बालाघाट
से
विजय
रहे
थे।
*
नंदकिशोर
शर्मा
और
विश्वेश्वर
भगत
दोनों
कांग्रेस
की
उम्मीदवारों
के
लगातार
दो
-दो
बार
विजय
होने
का
रिकॉर्ड
है।