
गर्मियों
की
दस्तक
के
साथ
ही
प्रदेश
में
बिजली
संकट
गहराने
की
आशंका
जताई
जा
रही
है।
उमरिया
जिले
के
बिरसिंहपुर
पाली
स्थित
संजय
गांधी
ताप
विद्युत
केंद्र
की
210
मेगावॉट
क्षमता
वाली
एक
नंबर
यूनिट
बीते
9
महीनों
से
बंद
पड़ी
है।
4
अगस्त
2024
से
ठप
पड़ी
इस
यूनिट
ने
अब
तक
उत्पादन
में
करोड़ों
की
चपत
पहुंचाई
है।
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जानकारों
के
अनुसार,
इस
यूनिट
से
प्रतिदिन
औसतन
50.4
लाख
यूनिट
बिजली
का
उत्पादन
होता
है।
ऐसे
में
अगर
4
अगस्त
2024
से
8
मई
2025
तक
की
अवधि
को
देखा
जाए,
तो
कुल
279
दिन
में
लगभग
14.06
करोड़
यूनिट
बिजली
का
नुकसान
हुआ
है।
यह
केवल
उत्पादन
की
दृष्टि
से
नुकसान
है,
जबकि
मेंटेनेंस
और
अन्य
खर्चों
को
जोड़ें
तो
ये
आंकड़ा
और
भी
अधिक
हो
सकता
है।
बिजली
उत्पादन
में
आई
इस
बाधा
से
केवल
विभागीय
अर्थव्यवस्था
ही
नहीं,
बल्कि
आम
जनता
पर
भी
असर
पड़ने
की
संभावना
है।
गर्मियों
में
बढ़ती
मांग
के
बीच
यह
यूनिट
चालू
नहीं
हो
सकी,
तो
लोड
शेडिंग
और
अघोषित
बिजली
कटौती
की
समस्या
उत्पन्न
हो
सकती
है।
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पढ़ें- संजय
गांधी
ताप
विद्युत
केंद्र
में
बढ़ाई
गई
सुरक्षा,
अनावश्यक
व्यक्तियों
का
प्रवेश
वर्जित
जब
इस
संबंध
में
संजय
गांधी
ताप
विद्युत
केंद्र
के
मुख्य
अभियंता
एच.
के.
त्रिपाठी
से
बात
की
गई,
तो
उन्होंने
बताया
कि
अगस्त
माह
में
जनरेटर
मोटर
में
तकनीकी
खराबी
आने
के
कारण
यूनिट
को
बंद
करना
पड़ा।
मरम्मत
का
कार्य
प्रगति
पर
है
और
जून
माह
तक
यूनिट
को
पुनः
चालू
कर
दिया
जाएगा।
हालांकि,
सूत्रों
की
मानें
तो
मेंटेनेंस
के
नाम
पर
हर
साल
लाखों
रुपये
खर्च
किए
जाते
हैं,
बावजूद
इसके
इस
तरह
की
तकनीकी
खराबियों
का
बार-बार
सामने
आना
प्रबंधन
की
कार्यप्रणाली
पर
सवाल
खड़े
करता
है।
विशेषज्ञों
का
मानना
है
कि
समय
रहते
समुचित
निरीक्षण
और
पूर्वानुमान
तकनीकों
का
उपयोग
किया
जाए,
तो
इस
प्रकार
की
बड़ी
तकनीकी
विफलताओं
से
बचा
जा
सकता
है।
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आदेश
प्रदेश
में
लगातार
बढ़ती
ऊर्जा
की
मांग
और
सीमित
उत्पादन
क्षमताएं
आने
वाले
समय
में
और
भी
बड़ी
चुनौतियां
खड़ी
कर
सकती
हैं।
ऐसे
में
आवश्यकता
है
कि
थर्मल
प्लांट्स
के
रखरखाव
और
संचालन
में
पारदर्शिता
लाई
जाए
और
समयबद्ध
तरीके
से
क्षतिग्रस्त
यूनिट्स
को
पुनः
चालू
किया
जाए।