
दुराचार
पीड़ित
नाबालिग
को
हाईकोर्ट
से
गर्भपात
की
अनुमति
मिल
गई
है। हाईकोर्ट
जस्टिस
अमित
सेठ
की
एकलपीठ
ने
सुनवाई
के
बाद
पाया
कि
गर्भ
अवस्था
वर्तमान
में
28
सप्ताह
से
अधिक
है।
एकलपीठ
ने
याचिका
की
सुनवाई
के
बाद
पीड़िता
को
गर्भपात
की
अनुमति
आवश्यक
निर्देश के
साथ
प्रदान
की
है।
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दमोह
जिला
न्यायालय
ने
दुष्कर्म पीड़ित
की
गर्भवती
16
वर्षीय
किशोरी
की
गर्भ
अवधि
20
सप्ताह
से
अधिक
होने
के
कारण
गर्भपात
की
अनुमति
के
हाईकोर्ट
में
पत्र
लिखा
था।
हाईकोर्ट
ने
मामले
की
सुनवाई
याचिका
की
रूप
में
करने
के
आदेश
जारी
किए
थे।
हाईकोर्ट
ने
याचिका
की
सुनवाई
करते
हुए
पीड़ित
की
मेडिकल
रिपोर्ट
पेश
करने
के
आदेश जारी
किए
थे।
दो
डॉक्टर
की
तरफ
से
21
मई
2025
को
पीड़िता
का
मेडिकल
टेस्ट
किया
गया
था।
मेडिकल
रिपोर्ट
के
अनुसार
पीड़िता
की
गर्भ
अवधि
24
सप्ताह
से
अधिक
थी।
गर्भपात
करना
एक
जोखिम
भरा
कार्य
होगा।
पीड़ित
तथा
उसकी
मां ने
हाईकोर्ट
को
बताया
था
कि
सभी
जोखिम
के
बावजूद
भी
वह
गर्भपात
के
लिए
तैयार
है।
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में
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की
संदिग्ध
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में
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ने
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जाने
के
लगाए
आरोप
एकलपीठ
ने
सुप्रीम
कोर्ट तथा
हाईकोर्ट
द्वारा
पारित
आदेश
का
हवाला
देते
हुए
कहा
है
कि
30
सप्ताह
तक
गर्भपात
की
अनुमति
प्रदान
की
गई
है।
वर्तमान
में
गर्भावधि
28
सप्ताह
से
अधिक
है।
पीड़िता
को
गर्भपात
की
अनुपति
प्रदान
करते
हुए
एकलपीठ
ने
अपने
आदेश
में
माता-पिता
के
साथ
नेताजी
सुभाष
चंद्र
बोस
मेडिकल
कॉलेज
जबलपुर
भेजा
जाए।
गर्भावस्था
को
समाप्त
करने
की
प्रक्रिया
डॉक्टरों
की
विशेषज्ञ
टीम
की
उपस्थिति
में
की
जाएगी।
विशेषज्ञ
डॉक्टर
परिवार
के
सदस्यों
के
साथ-साथ
याचिकाकर्ता
को
गर्भावस्था
को
समाप्त
करने
के
जोखिम
और
अन्य
कारकों
के
बारे
में
समझाएंगे।
गर्भावस्था
को
समाप्त
करते
समय
डॉक्टरों
द्वारा
हर
संभव
सावधानी
बरती
जाएगी।
उसे
सभी
चिकित्सकीय
देखभाल
और
अन्य
चिकित्सकीय
सुविधाएं
उपलब्ध
कराई
जाएंगी,
जिसमें
शिशु
रोग
विशेषज्ञ
के
साथ-साथ
रेडियोलॉजिस्ट
और
अन्य
आवश्यक
डॉक्टर
शामिल
होंगे।
ऑपरेशन
के
बाद
की
देखभाल
याचिकाकर्ता
को
दी
जाएगी।
बच्चा
जीवित
पैदा
होता
है,
तो
उसकी
देखभाल
करना
राज्य
सरकार
का
कर्तव्य
होगा।
डॉक्टर
यह
भी
सुनिश्चित
करेंगे
कि
भ्रूण
का
नमूना
डीएनए
जांच
के
लिए
सुरक्षित
रखा
जाए।
डॉक्टरों
की
एक
विशेष
टीम
यह
निर्णय
लेगी
कि
गर्भावस्था
को
कब
समाप्त
किया
जाए।