
गांधीसागर
अभ्यारण
में
चीतों
की
संख्या
बढ़ने
वाली
है।
यहां
पर
पांच
और
चीते
लाए
जाएंगे।
इसको
लेकर
सारी
तैयारियां
पूरी
कर
ली
गई
है।
फिलहाल
ये
काम
15
अगस्त
के
बाद
कभी
भी
हो
सकता
है। गांधीसागर
चीता
प्रोजेक्ट
से
जुड़े
सूत्रों
के
अनुसार
प्रभास
और
पावस
के
गांधीसागर
क्षेत्र
में
रमने
के
बाद
यहां
पर
चीतों
की
संख्या
बढ़ाने
के
बारे
में
विचार
किया
गया।
अब
तारीख
तय
हो
गई
है।
15
अगस्त
के
बाद
दक्षिण
अफ्रीका
से
5
और
चीतों
को
लाने
की
तैयारी
हो
गई
है।
इनमें
3
नर
और
दो
मादा
चीता
को
शामिल
किया
जा
सकता
है।
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से
आए
चीतों
को
भाया
गांधीसागर
अभयारण्य,
हर
दूसरे
दिन
कर
रहे
शिकार,
रास
आ
रही
नीलगाय
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चीतों
को
गांधीसागर
लाने
के
लिए
भोपाल
व
दिल्ली
की
टीमों
ने
अफ्रीका
का
दौरा
कर
लिया
है।
अब
नर
व
मादा
चीतों
की
संख्या
पर
विचार
हुआ
है।
सभी
स्थितियों
का
आंकलन
कर
संख्या
तय
की
जा
रही
है।
फिलहाल
तीन
नर
और
दो
मादा
चीता
को
लाने
की
संभावना
बताई
जा
रही
है।
गांधीसागर
अभयारण्य
में
ईको
सिस्टम
को
बनाए
रखने
के
लिए
रामपुरा
पठार
क्षेत्र
में
इस
साल
अप्रैल
में
प्रभास
व
पावक
नाम
के
दो
चीतों
को
छोड़ा
था।
ढाई
माह
से
वे
यहां
अच्छे
से
रह
रहे
हैं।
इनकी
सेहत
में
सुधार
हुआ
है।
दोनों
चीते
दूसरे
व
तीसरे
दिन
शिकार
कर
रहे
हैं।
इसी
वजह
से
यहां
चीतों
को
बढ़ाया
जा
रहा
है।मंदसौर
डीएफओ
संजय
रायखेरे
ने
बताया
कि
ये
चीते
अफ्रीका
से
आएंगे।
ऐसे
में
इन्हें
पहले
कूनो
की
तरह
एक
से
दो
माह
तक
क्वारंटाइन
रखा
जाएगा।
इससे
ये
जांच
हो
सकेगी
कि
ये
किसी
तरह
के
वायरस
को
तो
साथ
में
नहीं
लाए
है।
इनके
स्वस्थ
होने
पर
कुछ
समय
बाद
जंगल
में
छोड़ा
जाएगा।
ये
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पढ़ें-कूनो
के
प्रभास-पावक
को
मिला
नया
ठिकाना,
CM
यादव
ने
अभ्यारण्य
में
छोड़ा;
ऐसा
देश
में
पहली
बार
प्रभास
व
पावक
ने
ढाई
माह
में
35
बार
शिकार
किया
गांधीसागर
में
अप्रैल
में
सीएम
डॉ.
मोहन
यादव
ने
कूनो
से
लाए
दो
चीतों
प्रभास
व
पावक
को
छोड़ा
था।
अधिकारियों
के
अनुसार
इन्होंने
ढाई
माह
में
35
बार
शिकार
किया।
इसमें
से
17
बार
नीलगाय
का
शिकार
किया,
जिसमें
8
वयस्क
नीलगायें
शामिल
हैं।
अब
तक
दोनों
स्वस्थ
हैं।
इन्हें
उपचार
की
आवश्यकता
नहीं
पड़ी
है।
चीतों
की
देखभाल
के
लिए
गांधीसागर
में
डॉक्टर
नियुक्त
हैं।