MP News: सागर में पक्षियों के लिए बना पहला बर्ड टॉवर, 800 घोंसलों में 2500 पक्षी रह सकेंगे


मध्यप्रदेश
के
सागर
जिले
में
पक्षियों
के
लिए
एक
विशेष
आशियाना
बनाया
गया
है।
50
फीट
से
अधिक
ऊंचाई
वाला
यह
बर्ड
टॉवर
राज्य
का
पहला
ऐसा
टावर
है,
जो
पूरी
तरह
से
पक्षियों
के
रहवास
के
लिए
समर्पित
है।

गौरतलब
है
कि
वर्तमान
में
बढ़ती
जनसंख्या
के
कारण
छोटे
गांव
कस्बों
में
और
छोटे
नगर
शहरों
में
तब्दील
हो
रहे
हैं।
अंधाधुंध
जंगलों
की
कटाई
और
तेजी
से
बढ़ते
कंक्रीटीकरण
ने
हमारे
पारिस्थितिक
तंत्र
को
खतरे
में
डाल
दिया
है।
इसका
असर
कई
पक्षी
प्रजातियों
पर
पड़ा
है,
जिनमें
से
कई
अब
लुप्तप्राय
हो
चुकी
हैं।
इन्हीं
समस्याओं
के
समाधान
के
लिए
बुंदेलखंड
अंचल
के
सागर
में
एक
अनूठी
पहल
की
गई
है,
जो

केवल
पक्षियों
को
सुरक्षित
घर
मुहैया
कराएगी,
बल्कि
पर्यावरण
संरक्षण
की
दिशा
में
भी
अहम
कदम
साबित
होगी।

दरअसल,
सागर
के
मंगलगिरी
क्षेत्र
स्थित
सिटी
फॉरेस्ट
में
प्रदेश
का
पहला
पक्षी
टॉवर
(बर्ड
हाउस)
बनाया
गया
है।
इसे
विशेष
रूप
से
पक्षियों
के
लिए
सुरक्षित
आवास
के
रूप
में
विकसित
किया
गया
है।
यह
पक्षी
टॉवर
विषम
मौसमों
में
पक्षियों
के
लिए
सुरक्षित
आश्रय
प्रदान
करेगा।
यह
छह
मंजिला
टॉवर
50
फीट
ऊंचा
है,
जिसमें
कुल
800
घोंसले
बनाए
गए
हैं।
इनमें
करीब
2000
से
2500
पक्षी
एक
साथ
रह
सकते
हैं।

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शुरू
होगी
फिल्म

इस
टॉवर
का
निर्माण
पर्यावरण
संरक्षण
के
प्रयासों
के
तहत
किया
गया
है।
पक्षी
प्रेमियों
ने
जब
पक्षियों
के
लिए
सुरक्षित
स्थान
की
कमी
की
बात
सागर
के
विधायक
शैलेन्द्र
जैन
के
समक्ष
रखी
तो
उन्होंने
सिटी
फॉरेस्ट
में
इस
टावर
के
निर्माण
का
प्रस्ताव
दिया।
दक्षिण
वन
मंडल
के
पूर्व
डीएफओ
महेंद्र
प्रताप
सिंह
के
नेतृत्व
में
इस
टॉवर
का
निर्माण
कार्य
संपन्न
हुआ।
इस
पक्षी
टॉवर
की
निर्माण
लागत
6
लाख
30
हजार
रुपये
रही।
इसके
लिए
विशेष
सामग्री
और
कुशल
कारीगरों
को
गुजरात
और
राजस्थान
से
बुलाया
गया।
टॉवर
के
पास
एक
होदी
(जलाशय)
भी
बनाई
गई
है,
जिससे
पक्षियों
को
भोजन
और
पानी
की
सुविधा
उपलब्ध
कराई
जा
सके।

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में
रह
रही;
मिलने
आया
था
बेटा

यह
सुनिश्चित
किया
गया
है
कि
हर
मौसम
में
पक्षियों
को
पर्याप्त
भोजन
और
पानी
मिल
सके
ताकि
वे
स्वस्थ
और
सुरक्षित
रहें।
साथ
ही
सिटी
फॉरेस्ट
में
एक
ऑक्सीजन
पार्क
भी
विकसित
किया
जा
रहा
है,
जिससे
पर्यावरण
की
गुणवत्ता
में
सुधार
हो
सके।
इस
टॉवर
के
निर्माण
के
बाद
से
ही
पक्षियों
ने
वहां
आकर
रहना
शुरू
कर
दिया
है।
अब
इस
क्षेत्र
में
सुबह-सुबह
पक्षियों
की
मधुर
चहचहाहट
गूंजने
लगी
है।
यह
टावर

केवल
पक्षियों
के
लिए
सुरक्षित
घर
बन
चुका
है,
बल्कि
यह
पशु-पक्षियों
के
प्रति
दया,
संवेदनशीलता
और
पर्यावरण
संरक्षण
का
प्रतीक
भी
बन
गया
है।