
दमोह
जिले
की
सड़कों
पर
मौतों
का
सिलसिला
लगातार
जारी
है।
तीन
साल
में
739
लोगों
ने
दम
तोड़ा
है।
अब
हादसों
की
वजह
पता
करने
मौलाना
आजाद
राष्ट्रीय
प्रौद्योगिकी
संस्थान
भोपाल
की
टीम
शनिवार
को
जांच
करने
दमोह
पहुंची।
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टीम
में
अनुज
जायसवाल
प्राध्यापक,
प्रीतिकना
दास
सहायक
प्राध्यापक,
परिजात
जैन
अरवन
प्लानर
और
मेघनाद
पीएचडी
स्कॉलर
शामिल
थे।
साथ
ही
दमोह
यातायात
टीआई
दलवीर
सिंह
मार्को
और
आरटीओ
क्षितिज
सोनी
की
मौजूदगी
रही।
टीम
ने
तेंदूखेड़ा,
जबेरा,
मारा,
सिग्रामपुर
और
समन्ना
पहुंचकर
ब्लॉक
स्पॉट
और
हादसों
वाली
जगह का
बारीकी
से
अवलोकन
किया।
इसके
बाद
रात
को
कलेक्ट्रेट
कार्यालय
में
कलेक्टर
ने
टीम
के
साथ
बैठक
की।
बता
दें
कि
कलेक्टर
सुधीर
कोचर
ने
मौलाना
आजाद
राष्ट्रीय
प्रौद्योगिकी
संस्थान
के
निदेशक
को
पत्र
लिखकर
टीम
भेजने
की
मांग
की
थी।
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अस्पताल
की
कैथलैब
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रजिस्ट्रेशन
सही,
झूठी
निकली
डॉ.
अखिलेश
दुबे
की
शिकायत
मौतों
का
आंकड़ा
बढ़ता
गया
2022
से
अब
तक
2329
सड़क
हादसे
हुए
जिसमें
2203
लोग
घायल
हुए।
इनमें
से
कई
लोग
जीवन
भर
के
लिए
अपाहिज
हो
गए।
तो,
पिछले
तीन
सालों
में
739
की
जान
चली
गई।
बात
साल
2024
से
अब
तक
की
करें,
तो
स्थिति
और
भयावह
हो
गई।
इस
बीच
1003
दुर्घटनाएं
और
205
मौतें
दर्ज
हो
चुकी
हैं।
जबकि
इससे
पहले
साल
2022
में
234
मौत
हुईं,
वहीं
2023
में
210
लोगों
की
जान
चलीं
गईं।
इधर,
आंकड़ों
पर
नजर
दौड़ाएं,
तो
हर
महीने
औसतन
70
हादसे
और
20
मौतें
दर्ज
हो
रहीं
हैं।
बताया
जा
रहा
है
कि
जिले
में
सबसे
ज्यादा
हादसे
तेंदुखेड़ा
क्षेत्र
में
हो
रहे
हैं।
दमोह
के
हाईवे
हों
या
ग्रामीण
क्षेत्रों
की
टूटी
सड़कें,
इनके
अंधे
मोड़ों
पर
लोग
हर
दिन
अपनी
किस्मत
लेकर
निकलते
हैं।
कहीं
गड्ढा
है,
तो
कहीं
संकेतक
गायब।
जब
हादसे
होते
हैं,
तो
प्रशासनिक
अमला
मौके
पर
खानापूर्ति
करने
पहुंच
जाता
है।
ये
भी
पढ़ें- अधिकारियों
के
जाते
ही
थम
गई
अतिक्रमण
हटाने
की
कार्रवाई,
पार्षद
प्रतिनिधि
ने
लगाया
लापरवाही
का
आरोप
सड़क
हादसों
के
प्रमुख
कारण
अनियंत्रित
गति
पर
वाहन
चलाना
हादसों
का
सबसे
बड़ा
और
आम
कारण
बन
चुका
है।
नियमों
की
अनदेखी
जिसमें
हेलमेट
न
पहनना,
गलत
दिशा
में
वाहन
चलाना
भी
हादसों
को
बढ़ा
रहे
हैं।
जिले
की
कई
सड़कें
जर्जर
हालत
में
हैं।
इससे
वाहन
असंतुलित
होकर
टकरा
जाते
हैं।
शराब
या
नशीले
पदार्थ
का
सेवन
कर
वाहन
चलाने
से
नियंत्रण
खोकर
दुर्घटनाएं
हुई।
ज्यादा
सवारी
या
ज्यादा
माल
ढोने
वाले
वाहन
असंतुलित
होकर
हादसों
की
वजह
बन
रहे
हैं।
कई
सड़कों
पर
अंधे
मोड़
हैं,
जहां
संकेतक,
रेलिंग
या
स्पीड
कंट्रोल
के
उपाय
ही
नहीं
हैं।
अब
जागा
प्रशासन
जिला
प्रशासन
ने
अब
सड़क
सुरक्षा
पर
रिपोर्ट
तैयार
करनी
शुरू
की
है।
संकेत
दिए
गए
हैं
कि
ठोस
कदम
उठाए
जाएंगे,
लेकिन
ज़मीनी
हकीकत
यह
है
कि
जब
तक
परिवहन
व
यातायात
नियमों
का
पालन
सही
से
नहीं
होता
तब
तक
हादसों
की
रोकथाम
होना
या
कमी
आना
संभव
नहीं
है।
हाइवे
पर
लगाए
रेडियम
सिंग्रामपुर
पुलिस
ने
कई
अंधे
मोड
और
ब्लैक
स्पॉट
पर
रेडियम
पट्टी
लगाई
है।
सिंग्रामपुर
चौकी
प्रभारी
आलोक
तिरपुडे
ने
बताया
कि
उनकी
टीम
ने
सिंग्रामपुर
से
जबेरा
तक
रेडियम
लगवाए
हैं
ताकि
हादसे
होने
से
बच
सकें।
यहां
अंधे
मोड
पर
कई
बड़े
हादसे
हो
चुके
हैं।