Damoh News: हरई सिंगौरगढ़ गौशाला में मवेशियों की मौत का मामला, प्रशासनिक लापरवाही उजागर; जानें मामला


दमोह
जिले
के
तेंदूखेड़ा
ब्लॉक
के
अंतर्गत
हरई
सिंगौरगढ़
ग्राम
पंचायत
में
संचालित
गौशाला
में
मवेशियों
की
मौत
का
मामला
सामने
आया
है।
इस
घटना
में
प्रशासनिक
अधिकारियों
और
जिम्मेदार
व्यक्तियों
की
अनदेखी
स्पष्ट
रूप
से
उजागर
हुई
है।
हालांकि,
अधिकारी
दोषियों
को
बचाने
का
प्रयास
कर
रहे
हैं।


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गौशाला
की
दुर्दशा
और
लापरवाही

प्रशासनिक
निरीक्षण
के
दौरान
यह
स्पष्ट
हुआ
कि
गौशाला
की
देखरेख
और
संचालन
की
जिम्मेदारी
किसी
ने
भी
ठीक
से
नहीं
निभाई।
यह
गौशाला
एक
दिव्यांग
व्यक्ति
के
भरोसे
संचालित
हो
रही
थी,
लेकिन
इस
ओर
किसी
ने
ध्यान
नहीं
दिया।


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गौशाला
संचालन
का
जिम्मा
स्व-सहायता
समूह
को
सौंपा
गया
था,
लेकिन
समूह
संचालक
ने
अपने
पद
का
फायदा
उठाया।
वहीं,
पंचायत
के
सचिव
और
सरपंच
ने
भी
अपनी
जिम्मेदारियों
से
मुंह
मोड़
लिया।
पशु
चिकित्सा
अधिकारी
भी
समय
पर
निरीक्षण
के
लिए
नहीं
पहुंचे।
जब
तेंदूखेड़ा
के
एसडीएम
ने
उनसे
इस
बारे
में
जानकारी
मांगी,
तो
उन्होंने
पूरा
दोष
तेंदूखेड़ा
पशु
चिकित्सा
अधिकारी
पर
डाल
दिया।


गौशाला
की
बदहाल
स्थिति

हरई
ग्राम
पंचायत
की
यह
गौशाला
गांव
से
लगभग
दो
किलोमीटर
दूर,
एक
सुनसान
इलाके
में
स्थित
है।
निरीक्षण
के
दौरान
अधिकारियों
ने
पाया
कि
यहां
मवेशियों
के
लिए
भोजन
और
पानी
की
उचित
व्यवस्था
नहीं
थी।
शुक्रवार
को
तीन
मवेशियों
की
मौत
की
खबर
मिलने
के
बाद
जब
अधिकारी
निरीक्षण
के
लिए
पहुंचे,
तो
वहां
बनी
पानी
की
टंकी
पूरी
तरह
खाली
पड़ी
थी।
मवेशी
भोजन
के
अभाव
में
कई
महीनों
पुराने
गन्ने
के
डंठल
खाने
को
मजबूर
थे।
एसडीएम
सौरभ
गंधर्व
ने
इस
स्थिति
पर
गहरी
नाराजगी
व्यक्त
की।
उन्होंने
पाया
कि
गौशाला
में
कई
मवेशी
मरणासन्न
स्थिति
में
थे।
दूसरी
ओर,
जनपद
सीईओ
मनीष
बागरी
ने
पंचायत
कर्मियों
को
इस
मामले
में
बेकसूर
ठहराते
हुए
कहा
कि
गौशाला
के
संचालन
की
जिम्मेदारी
स्व-सहायता
समूह
की
थी।
उनका
यह
बयान
पंचायत
कर्मियों
को
बचाने
का
एक
प्रयास
प्रतीत
हुआ।
वहीं,
पशु
चिकित्सा
अधिकारी
का
कहना
था
कि
पंचायत
कर्मियों
को
नियमित
रूप
से
गौशाला
की
व्यवस्थाओं
की
निगरानी
करनी
चाहिए
थी,
जो
उन्होंने
नहीं
की।


पशु
विभाग
की
जांच
में
अनियमितताएं
उजागर

कलेक्टर
के
निर्देश
पर
पहुंची
पशु
विभाग
की
टीम
और
तेंदूखेड़ा
पशु
चिकित्सा
अधिकारी
डॉ.
हरिकांत
बिल्बार
ने
निरीक्षण
के
दौरान
कई
अनियमितताएं
पाईं।
गौशाला
में
गोबर
फैला
हुआ
था,
जो
संचालन
में
लापरवाही
को
दर्शाता
है।
समूह
संचालक
ने
बताया
कि
पानी
की
टंकी
में
दरार
थी,
लेकिन
इस
संबंध
में
कोई
लिखित
शिकायत
नहीं
की
गई
थी।

आठ
फरवरी
के
निरीक्षण
में
गौशाला
में
98
मवेशी
दर्ज
थे
और
घटना
के
बाद
भी
उनकी
संख्या
उतनी
ही
पाई
गई।
दो
मृतक
मवेशियों
के
पेट
में
भूषा
मिला,
जिससे
संकेत
मिलता
है
कि
उन्हें
पर्याप्त
मात्रा
में
चारा
नहीं
मिल
रहा
था।
स्थानीय
पशु
चिकित्सक,
सरपंच
और
सचिव
को
नियमित
रूप
से
गौशाला
का
दौरा
करना
चाहिए
था,
लेकिन
उन्होंने
इस
जिम्मेदारी
की
अनदेखी
की।


सरपंच
और
सचिव
रहे
अनुपस्थित

जब
गौशाला
में
मवेशियों
की
मौत
की
सूचना
मिली,
तो
तेंदूखेड़ा
के
एसडीएम,
जनपद
सीईओ
और
अन्य
अधिकारी
तुरंत
मौके
पर
पहुंचे।
हालांकि,
पंचायत
के
सरपंच
मौके
पर
नहीं
पहुंचे।
एसडीएम
और
जनपद
सीईओ
के
जाने
के
बाद
ही
पंचायत
सचिव
वहां
से
चले
गए।

पशु
विभाग
की
टीम
ने
राजस्व
विभाग
की
टीम
के
साथ
मिलकर
मृत
मवेशियों
का
पोस्टमार्टम
किया।
इसके
बाद
राजस्व
निरीक्षक
(आरआई)
द्वारा
पंचनामा
तैयार
किया
गया।
पंचनामा
में
भी
यह
दर्ज
किया
गया
कि
निरीक्षण
के
दौरान
सरपंच
और
सचिव
मौके
से
अनुपस्थित
थे।