
देवी
अहिल्या
की
300वीं
जयंती
के
समापन
समारोह
में
वक्ताओं
ने
देवी
अहिल्या
के
जीवन
से
जुड़े
प्रसंग
सुनाए।
बास्केटबॉल
स्टेडियम
में
आयोजित
समारोह
में
पूर्व
केंद्रीय
मंत्री
स्मृति
ईरानी
ने
कहा
कि
अहिल्याबाई
निर्भीक
भी
थीं
और
निर्मल
भी।
वो
तिजोरी
भी
संभलना
जानती
थीं
और
तोपखाना
भी। उन्होंने
कहा
कि
मालवा
के
साम्राज्य
को
चुनौती
थी
तो
अहिल्याबाई
ने
मातृशक्ति
की
फौज
बनाई।
युद्ध
किए
बगैर
कूटनीतिक
जीत
हासिल
कर
ली।
वहीं, चंद्रकला
पहाड़िया
ने
कहा
कि
अहिल्याबाई
के
व्यवहार
और
सिद्धान्त
में
अंतर
नहीं
था।
सती
प्रथा
का
उन्होंने
विरोध
किया।
अहिल्याबाई
नारी
शक्ति
का
वैश्विक
प्रतिमान
थीं।
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गायिका
मालिनी
अवस्थी
ने
कहा
कि
अहिल्याबाई
के
पास
नीति
चातुर्य
था।
राज्य
को
संगठित
रखने
की
ताकत
थी।
उन्होंने
खुद
को
कभी
रानी
नहीं
माना।
उनके
लिए
राज्य
एक
परिवार
था।
उन्होंने
कहा
कि
300
साल
पहले
अहिल्याबाई
ने
दूर-दूर
की
यात्रा
कर
मंदिरों
का
पुनर्निर्माण
कराया।
उनकी
दृष्टि
सांस्कृतिक
राष्ट्रवाद
की
थी।
वहीं,
नृत्यांगना
सोनल
मान
सिंह
ने
कहा
कि
अहिल्याबाई
धर्मनिष्ठ
थीं।
वे
प्रजा
की
भलाई
के
बारे
में
हमेशा
सोचती
थीं।
उन्होंने
कहा
कि
देवी
अहिल्याबाई
गौरव
सम्मान
की
स्थापना
होनी
चाहिए।