Aiims Bhopal: भोपाल में कोरोना की आहट, एम्स में तैयारी हुई तेज, 20 बेड का वार्ड तैयार,टास्क फोर्स का किया गठन


देश
में
कोरोना
के
दो
नए
वैरिएंट
के
मामले
एक
बार
फिर
से
रफ्तार
पकड़ने
लगे
हैं।
मध्यप्रदेश
में
अब
तक
इंदौर
में
6
मामले
ही
सामने
आए
हैं।
स्वास्थ्य
विभाग
ने
स्वास्थ्य
संस्थाओं
को
सारी
तैयारियां
करने
के
निर्देश
भी
दिए
हैं।
एम्स
भोपाल
ने
भी
कोरोना
मरीजों
के
उपचार
के
लिए
तैयारियां
तेज
कर
दी
है।
जानकारी
के
मुताबिक
एम्स
में
20
बेड
का
जनरल
वार्ड
तैयार
कर
लिया
गया
है।
वहीं
वेंटीलेटर
से
युक्त
एक
आईसीयू
भी
कोविड
मरीजों
के
लिए
तैयार
किया
गया
है।
टास्क
फोर्स
का
भी
गठन
किया
गया
है। जबकि
जिला
अस्पताल
जेपी
और
हमीदिया
में
किसी
तरह
की
तैयारी
नहीं
दिख
रही
है। 


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लोगों
को
जागरूक
होना
जरूरी 

कोरोन
के नए
वैरिएंट
ओमिक्रॉन
वैरिएंट
(जेएन.
1)
के
दो
सब-वैरिएंट
(एनबी.
1.8.1
और
आईएफ
7)
एक्टिव
हैं।
एमपी
में
अभी
तक
इंदौर
में
6
मरीज
मिले
हैं।
जिसमें
से
एक
वृद्धा
की
मौत
हो
चुकी
है।
डॉक्टरों
का
कहना
है
कि
कोरोना
नियंत्रण
में
है,
लेकिन
लोगों
को
जागरूक
होना
जरूरी
है।
जो
लोग
विदेश
से
यात्रा
कर
लौटे
हैं,
उन्हें
एहतियातन
जांच
कराना
चाहिए।
यदि
सर्दी-जुकाम
या
वायरल
से
पीड़ित
होते
हैं
तो
डॉक्टर
को
जरूर
दिखाएं
और
ट्रैवल
हिस्ट्री
भी

छिपाएं।


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के
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दिन
भी
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प्रदेश
का
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रहेगा
मौसम,
30
जिलों
में
आंधी-बारिश
का
अलर्ट


चार
साल
में
धूल
खा
रही
मशीन

हमीदिया
अस्पताल
में
कोरोना
के
वैरिएंट
की
जांच
करने
वाली
जीनोम
सिक्वेसिंग
मशीन
धूल
खा
रही
है।
गौरतलब
है
कि
चार
साल
पहले
कोरोना
लहर
के
दौरान
तत्कालीन
स्वास्थ्य
मंत्री
विश्वास
सारंग
ने
जीएमसी
में
पांच
करोड़
रुपए
की
लागत
से
जीनोम
सिक्वेंसिंग
मशीन
स्थापित
की
थी।
लेकिन
तब
से
अब
तक
इस
मशीन
से
एक
भी
टेस्ट
नहीं
हो
सका।
यही
नहीं
जीएमसी
की
वायरोलॉजी
लैब
की
हालत
भी
खराब
है।
यहां
कोरोना
टेस्ट
के
लिए
रिएजेंट
तक
नहीं
है।


यह
भी
पढ़ें-जीआईएस
2025
के
बाद
प्रदेश
में
1744
एकड़
भूमि
पर
46
औद्योगिक
इकाइयों
को
आवंटन


नए
वैरिएंट
को
लेकर
घबराने
की
जरूरत
नहीं

एम्स
भोपाल
के
निदेशक
डॉ.
अजय
सिंह
ने
कहा
कि नए
वैरिएंट
को
लेकर
घबराने
की
जरूरत
नहीं
है।
एम्स
पूरी
तरह
तैयार
है।
समय
पर
जांच,
बेहतर
इलाज
और
सही
जानकारी
देने
के
लिए
हम
प्रतिबद्ध
हैं।
हमारा
लक्ष्य
है
कि
हर
नागरिक
को
सही
जानकारी
मिले
और
डर
की
जगह
सतर्कता
बरती
जाए।
संस्थान
ने
तेज
जांच
और
इलाज
के
लिए
जरूरी
स्वास्थ्य
ढांचा
मजबूत
किया
है।