संवाद में सम्मान: प्रदेश की तीन विभूतियां जो फर्श से अर्श पर पहुंचीं, सीएम मोहन यादव के हाथों हुए सम्मानित

अमर
उजाला
संवाद
मध्य
प्रदेश
के
भोपाल
में
आयोजित
कार्यक्रम
में
शिक्षा
एवं
समाज
में
विशेष
योगदान
की
दिशा
में
काम
करने
वालों
का
सम्मान
किया
गया।
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
ने
उनके
कार्यों
को
सराहा
और
खुलेदिल
से
उनके
प्रयासों
की
तारीफ
की।
सम्मानित
प्रदेश
की
विभूतियों
ने
अपने
कार्य
के
प्रति
गहरी
निष्ठा
और
समर्पण
से
कामयाबी
हासिल
की
है।
आज
हम
प्रदेश
की
तीन
और
हस्तियों
की
कामयाबी
की
कहानी
आप
तक
पहुंचा
रहे
हैं।
उन्होंने
बातचीत
में
बताया
कि
वे
कैसे
फर्श
से
अर्श
पर
पहुंचे।
निसंदेह
में
उनकी
दूरदृष्टि,
लक्ष्य
के
प्रति
समर्पण
और
समाज
के
प्रति
दायित्व
की
अहम
भूमिका
रही।
आइये
पढ़ते
हैं
इन
तीन
महारथियों
के
बारे
में
सब
कुछ:


स्पष्ट
विजन,
आध्यात्मिक
मूल्य
और
समर्पण
बने
संजीव
अग्रवाल
की
कामयाबी
के
आधार

मध्य
प्रदेश
की
धरती
पर
जन्मे
और
साधारण
पृष्ठभूमि
से
उठकर
देश
के
प्रमुख
उद्योगपति,
शिक्षाविद
और
समाजसेवी
बने
इंजीनियर
संजीव
अग्रवाल
आज
”दे
सेज
ग्रुप”
के
चेयरमैन
एवं
मैनेजिंग
डायरेक्टर
हैं।
सेज
यूनिवर्सिटी
(भोपाल
एवं
इंदौर)
के
चांसलर
भी
हैं।
उनकी
सफलता
के
मूल
मंत्र
स्पष्ट
दृष्टिकोण,
आध्यात्मिक
मूल्य
और
समाज
के
प्रति
समर्पण
हैं।

उन्होंने
1983
में
एक
स्वप्न
के
साथ
अपने
करियर
की
शुरुआत
की
थी।
अग्रवाल
ने
मैनिट
भोपाल
से
सिविल
इंजीनियरिंग
की
स्नातक
डिग्री
प्राप्त
की।
इसके
बाद
रियल
एस्टेट
क्षेत्र
में
अग्रवाल
कंस्ट्रक्शन
कंपनी
(अब
सेज
रियल्टी)
की
स्थापना
की,
जो
आज
मध्य
भारत
की
सबसे
बड़ी
और
विश्वसनीय
निर्माण
कंपनियों
में
से
एक
है।
2003
में
उन्होंने
एसआईआरटी
कॉलेज
की
स्थापना
की।
आज
सेज
यूनिवर्सिटी
और
सेज
इंटरनेशनल
स्कूल्स
के
माध्यम
से
वे
हजारों
विद्यार्थियों
को
”भविष्य-संरेखित”
शिक्षा
प्रदान
कर
रहे
हैं,
जो
नवाचार,
नेतृत्व
और
वैश्विक
प्रतिस्पर्धा
के
लिए
उन्हें
तैयार
करती
है।
जनवरी
2023
में
इंजीनियर
अग्रवाल
ने
अपोलो
सेज
हॉस्पिटल
के
माध्यम
से
भोपाल
को
अत्याधुनिक
350-बेड
के
मल्टी-स्पेशियलिटी
हॉस्पिटल
की
सौगात
दी।
यह
परियोजना
समाज
के
हर
वर्ग
को
सुलभ,
गुणवत्तापूर्ण
चिकित्सा
सेवाएं
उपलब्ध
कराने
की
दिशा
में
एक
ऐतिहासिक
पहल
है।
इंजीनियर
अग्रवाल
की
कंपनी
अग्रवाल
पावर
प्रालि
मध्य
प्रदेश,
छत्तीसगढ़
और
महाराष्ट्र
में
पावर
और
इंफ्रास्ट्रक्चर
के
क्षेत्र
में
उल्लेखनीय
काम
कर
रही
है,
इससे
देश
की
आत्मनिर्भरता
और
आर्थिक
विकास
को
बल
मिल
रहा
है।

इंजीनियर
अग्रवाल
ट्रू
सेज
फाउंडेशन
के
माध्यम
से
अब
तक
122
से
अधिक
एकल
विद्यालयों
की
स्थापना
कर
चुके
हैं।
इसके
अलावा
वनबंधु
और
जरूरतमंदों
के
लिए
नियमित
सामाजिक
पहल
भी
संचालित
कर
रहे
हैं।


इन
पदों
पर
हैं
आसीन

  • चेयरमैन

    सेज
    ग्रुप
  • चेयरमैन,
    पीएची
    चैंबर
    ऑफ
    कॉमर्स
    एंड
    इंडस्ट्री
    (एमपी
    चैप्टर)
  • अध्यक्ष,
    म.प्र.
    प्राइवेट
    यूनिवर्सिटीज
    एसोसिएशन
  • सलाहकार,
    क्रेडाइ
    भोपाल
    चैप्टर


ये
सम्मान
मिले

इंजीनियर
अग्रवाल
को
फोर्ब्स
और
फॉरच्यून
जैसी
अंतरराष्ट्रीय
पत्रिकाओं
में
स्थान
मिला
है।
वे
“टाइम्स
मैन
आफ

ईयर
2020”,
“आइकॉन्स
आफ

मध्य
प्रदेश”,
“मोस्ट
प्रॉमिसिंग
ग्रुप
आफ
एमपी”
जैसे
कई
राष्ट्रीय
और
अंतरराष्ट्रीय
पुरस्कारों
से
सम्मानित
हो
चुके
हैं।


शिक्षा
का
अलख
जगा
रहे
डॉ.
अजीत
सिंह
पटेल,
सबसे
युवा
प्रो-चांसलर

डॉ.
अजीत
सिंह
पटेल
का
जन्म
25
जुलाई
1984
को
मध्य
प्रदेश
के
सीधी
जिले
में
हुआ।
आपने
मानव
संसाधन
प्रबंधन
में
एमबीए
और
प्रबंधन
में
डॉक्टरेट
की
उपाधि
प्राप्त
की
है।
वर्ष
2002
से
उन्होंने
पटेल
ग्रुप
ऑफ
इंस्टीट्यूशंस
की
स्थापना
से
लेकर
उसे
आज
की
ऊंचाइयों
तक
पहुंचाने
में
अहम
भूमिका
निभाई।
उनके
नेतृत्व
में
समूह
ने
भोपाल
से
इंदौर
तक
विस्तार
किया।
डॉ.
पटेल
मध्य
प्रदेश
के
सबसे
युवा
उपाध्यक्षों
और
प्रो-चांसलर
में
से
एक
हैं।
वे
15,000
से
अधिक
छात्रों
वाले
पीजीओई
और
एमपीयू
का
संचालन
कर
रहे
हैं।
उनका
सपना
एमपीयू
और
पटेल
ग्रुप
को
अंतरराष्ट्रीय
स्तर
पर
पहचान
दिलाना
है।
वे
आधुनिक
तकनीक,
शोध
और
जॉब-ओरिएंटेड
एजुकेशन
के
प्रबल
समर्थक
हैं।
वे
समाज
के
अंतिम
व्यक्ति
तक
गुणवत्तापूर्ण
शिक्षा
पहुंचाने
के
लक्ष्य
में
जुटे
हैं।


इन
महत्वपूर्ण
पदों
पर
विराजित

  • उपाध्यक्ष

    एसोसिएशन
    ऑफ
    टेक्निकल
    एंड
    प्रोफेशनल
    इंस्टिट्यूट्स,
    म.प्र.
  • सचिव

    एसोसिएशन
    ऑफ
    प्राइवेट
    यूनिवर्सिटीज,
    म.प्र.
  • सदस्य

    भोपाल
    मैनेजमेंट
    एसोसिएशन
  • सदस्य

    एसाचैम
  • अध्यक्ष

    एआईएम
    वेलफेयर
    सोसाइटी
  • कोषाध्यक्ष

    वंशपति
    स्मृति
    शिक्षा
    समिति

    पटेल
    एजुकेशन
    सोसाइटी
  • सम्मान

    पुरस्कार:
    इंडियन
    अचीवर
    अवॉर्ड
    फॉर
    एजुकेशनल
    एक्सीलेंस

डॉ.
सिद्धार्थ
चतुर्वेदी
ने
संवारी
लाखों
युवाओं
की
तकदीर

डॉ.
सिद्धार्थ
चतुर्वेदी
देश
के
उन
युवा
शिक्षाविदों
और
सामाजिक
उद्यमियों
में
शामिल
हैं,
जिन्होंने
कौशल,
शिक्षा
और
रोजगार
के
क्षेत्र
में
ठोस
नवाचार
कर
लाखों
युवाओं
को
नई
दिशा
दी
है।
वे
वर्तमान
में
मध्य
भारत
के
पहले
कौशल-आधारित
निजी
विश्वविद्यालय-
स्कोप
ग्लोबल
स्किल्स
यूनिवर्सिटी
(एसजीएसयू),
भोपाल
के
चांसलर
हैं,
जिसकी
स्थापना
2023
में
“कौशल
के
साथ
शिक्षा”
के
सिद्धांत
पर
की
गई।

18
वर्षों
से
अधिक
का
अनुभव
रखने
वाले
डॉ.
सिद्धार्थ
चतुर्वेदी
आईसेक्ट
(एआईएसईसीटी)
ग्रुप
के
कार्यकारी
उपाध्यक्ष
भी
हैं।
उनके
नेतृत्व
में
आईसेक्ट
समूह
ने
29
राज्यों
और
4
केंद्र
शासित
प्रदेशों
के
605
जिलों,
2100
ब्लॉकों
और
8500
से
अधिक
ग्राम
पंचायतों
में
31,000
से
अधिक
केंद्रों
के
माध्यम
से
20
लाख
से
ज्यादा
युवाओं
को
कौशल
प्रशिक्षण
और
50
लाख
से
अधिक
लोगों
के
जीवन
को
प्रभावित
किया
है।

डॉ.
सिद्धार्थ
चतुर्वेदी
प्रबंधन
में
पीएचडी
धारक
हैं।
उन्होंने
इंजीनियरिंग
की
डिग्री
मौलाना
आजाद
राष्ट्रीय
प्रौद्योगिकी
संस्थान
(मैनिट),
भोपाल
से
और
एमबीए
एसपी
जैन
इंस्टीट्यूट
ऑफ
मैनेजमेंट
एंड
रिसर्च
से
प्राप्त
किया।
करियर
की
शुरुआत
आईटीसी
एग्री
बिजनेस
और
आईबीएम
जैसी
प्रतिष्ठित
कंपनियों
से
की,
लेकिन
जल्दी
ही
उन्होंने
सामाजिक
क्षेत्र
में
कदम
रखा।
उनके
द्वारा
स्थापित
स्कोप
ग्लोबल
स्किल्स
यूनिवर्सिटी
राष्ट्रीय
शिक्षा
नीति
के
अनुरूप
देश
का
पहला
कौशल
विश्वविद्यालय
है,
जो
युवाओं
को
डिजिटल,
तकनीकी
और
व्यवहारिक
कौशल
के
साथ
रोजगार,
आजीविका
और
उद्यमशीलता
के
लिए
तैयार
कर
रहा
है।

वे
छत्तीसगढ़
के
डॉ.
सी.वी.
रमन
विश्वविद्यालय,
मध्यप्रदेश
के
रवींद्रनाथ
टैगोर
विश्वविद्यालय
और
अन्य
राज्यों
में
आईसेक्ट
समूह
की
यूनिवर्सिटीज
की
गवर्निंग
बॉडी
का
भी
हिस्सा
हैं।
आज
भी
वे
युवाओं
के
लिए
स्किल
स्मार्ट
इंडिया
के
विजन
को
लेकर
प्रतिबद्ध
हैं
और
मानते
हैं
कि
”सही
शिक्षा,
सही
कौशल
और
सही
दिशा
ही
किसी
भी
राष्ट्र
की
सबसे
बड़ी
ताकत
होती
है।
डॉ.
सिद्धार्थ
चतुर्वेदी
सीआईआई,
एनएसडीसी,
एसाचैम,
नैसकॉम
जैसे
राष्ट्रीय
मंचों
पर
शिक्षा,
स्टार्टअप
और
स्किल
डेवलपमेंट
को
लेकर
सक्रिय
भूमिका
निभा
रहे
हैं।


ये
पुरस्कार
मिले

  • एशियाज
    मोस्ट
    इंफ्लूएंशियल
    यंग
    लीडर
    (2020–21)
    सम्मान
  • वर्ल्ड
    बैंक,
    हार्वर्ड
    बिजनेस
    स्कूल
    जैसे
    प्रतिष्ठित
    मंचों
    ने
    सराहा