
श्रावण-भाद्रपद
मास
में
इस
बार
उज्जैन
राजाधिराज
महाकाल
चांदी
की
नई
पालकी
में
सवार
होकर
नगर
भ्रमण
पर
निकलेंगे।
मंदिर
प्रशासन
के
अनुसार,
करीब
10
साल
बाद
सवारी
में
नई
पालकी
को
शामिल
किया
जा
रहा
है।
नवंबर
2024
में
छत्तीसगढ़
के
एक
भक्त
ने
गुप्तदान
के
रूप
में
मंदिर
समिति
को
यह
पालकी
भेंट
की
थी।
ज्योतिर्लिंग
महाकाल
मंदिर
में
श्रावण-भाद्रपद
मास
में
महाकाल
की
सवारी
निकलती
है।
इस
बार
14
जुलाई
को
पहली
और
18
अगस्त
को
श्रावण-भाद्रपद
मास
की
राजसी
सवारी
निकलेगी।
इसे
लेकर
तैयारियां
शुरू
हो
गई
हैं।
मंदिर
समिति
ने
हर
बार
की
तरह
इस
बार
भी
लोक
निर्माण
विभाग
से
पालकी
का
परीक्षण
कराया
है।
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इंच
से
ज्यादा
बारिश,
कल
के
लिए
अलर्ट
यह
है
पालकी
की
खासियत
चांदी
की
नई
पालकी
का
वजन
करीब
100
किलो
है।
लकड़ी
से
बनी
पालकी
पर
20
किलो
चांदी
का
आवरण
है।
पालकी
को
उठाने
के
लिए
स्टील
के
पाइप
लगाए
गए
हैं।
पालकी
का
ऊपरी
हिस्सा
भी
स्टील
के
पाइप
से
बना
है।
वर्षों
पहले
सवारी
में
लकड़ी
की
पालकी
का
उपयोग
होता
था।
ठोस
लकड़ी
से
निर्मित
पालकी
का
वजन
डेढ़
क्विंटल
से
अधिक
था।
बाद
में
लकड़ी
और
स्टील
के
पाइप
से
बनी
पालकी
का
उपयोग
शुरू
हुआ।
इसका
वजन
करीब
130
किलो
बताया
जाता
है।
यह
तीन
फीट
चौड़ी
और
पांच
फीट
लंबी
है।
पालकी
को
उठाने
वाले
हत्थे
पर
सिंहमुख
की
आकृति
बनाई
गई
है।
चांदी
के
आवरण
पर
सूर्य,
स्वास्तिक,
कमल
पुष्प
और
दो
शेरों
की
नक्काशी
की
गई
है।
भगवान
महाकाल
की
पालकी
उठाने
के
लिए
70
कहार
सेवा
देते
हैं।
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करोड़
का
‘नशा’
जब्त
श्रावण-भाद्रपद
मास
में
निकलेगी
छह
सवारियां
पहली
सवारी
14
जुलाई
को
होगी।
इसके
बाद
21
जुलाई,
28
जुलाई,
4
अगस्त,
11
अगस्त
और
अंतिम
राजसी
सवारी
18
अगस्त
को
निकलेगी।
मंदिर
प्रशासन
ने
दर्शन
व्यवस्था
और
सवारी
की
तैयारियां
शुरू
कर
दी
हैं।