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महाशिवरात्रि
पर्व
के
अवसर
पर
महाकालेश्वर
मंदिर
में
विशेष
पूजन-अर्चन
का
आयोजन
किया
जाता
है।
इस
दौरान
भगवान
महाकाल
की
आराधना
विशेष
विधियों
से
की
जाती
है।
महाशिवरात्रि
के
दिन
मंदिर
में
सुबह
भस्म
आरती
के
स्थान
पर
मंगला
आरती
होती
है,
जो
अपने
आप
में
एक
अनूठा
और
दिव्य
अनुभव
होता
है।
महाकालेश्वर
मंदिर
के
पुजारी
पंडित
महेश
शर्मा
ने
बताया
कि
महाशिवरात्रि
पर्व
मंदिर
में
नौ
दिनों
तक
मनाया
जाता
है।
इस
दौरान
भगवान
महाकाल
को
विभिन्न
स्वरूपों
में
सजाया
जाता
है
और
उन्हें
दूल्हे
के
रूप
में
पूजित
किया
जाता
है।
महाशिवरात्रि
की
रात
विशेष
पूजन
के
बाद
भस्म
आरती
का
आयोजन
रात्रि
2:30
बजे
किया
जाता
है,
जिसके
बाद
लगातार
44
घंटे
तक
दर्शन
की
प्रक्रिया
जारी
रहती
है।
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पंडित
महेश
पुजारी
ने
बताया
कि
महाशिवरात्रि
की
रात
भगवान
महाकाल
विश्राम
नहीं
करते।
इसलिए
अगले
दिन
उन्हें
विशेष
श्रृंगार
कर
दूल्हे
के
रूप
में
सजाया
जाता
है
और
सप्तधान
एवं
विभिन्न
फलों
से
उनका
अलंकरण
किया
जाता
है।
इसी
कारण
महाशिवरात्रि
के
अगले
दिन
प्रातःकाल
भस्म
आरती
नहीं
होती,
बल्कि
दोपहर
12
बजे
इस
विशेष
आरती
का
आयोजन
किया
जाता
है।
पंडित
आशीष
गुरु
के
अनुसार,
महाशिवरात्रि
के
अगले
दिन
भस्म
आरती
के
स्थान
पर
मंगला
आरती
की
जाती
है,
जो
वर्ष
में
केवल
एक
बार
ही
इस
अवसर
पर
संपन्न
होती
है।
वहीं,
पंडित
अर्पित
पुजारी
ने
बताया
कि
महाशिवरात्रि
के
दौरान
रात्रि
में
भगवान
महाकाल
की
विशेष
पूजा-पद्धति
के
अंतर्गत
भस्म
धारण,
रुद्राक्ष
धारण
और
विभिन्न
आध्यात्मिक
प्रयोग
किए
जाते
हैं।
इन
प्रक्रियाओं
के
कारण
अगले
दिन
प्रातः
भस्म
आरती
नहीं
हो
पाती
और
भगवान
को
फूलों
से
सजाया
जाता
है।
उज्जैन
के
महाकालेश्वर
मंदिर
की
भस्म
आरती
शिव
भक्तों
के
लिए
विशेष
आकर्षण
का
केंद्र
रहती
है।
इसमें
शामिल
होने
के
लिए
देशभर
से
श्रद्धालु
उज्जैन
पहुंचते
हैं।
प्रतिदिन
लगभग
ढाई
हजार
भक्तों
को
भस्म
आरती
में
सम्मिलित
होने
की
अनुमति
मिलती
है,
जबकि
चलित
भस्म
आरती
के
दर्शन
10,000
से
अधिक
श्रद्धालु
करते
हैं।