Bhopal: मंत्री के मामले में कोर्ट के फैसले का कांग्रेस ने किया स्वागत, SC ने भी माना सरकार क्यों नहीं मान रही


मध्य
प्रदेश
के
कैबिनेट
मंत्री
विजय
शाह
को
सुप्रीम
कोर्ट
ने
विवादित
बयान
देने
के
मामले
में
फटकार
लगाई
है।
इस
मामले
पर
मध्यप्रदेश
के
नेता
प्रतिपक्ष
उमंग
सिंघार
ने
भाजपा
सरकार
पर
हमला
बोलते
हुए
कहा
कि
मैं
सुप्रीम
कोर्ट
के
निर्णय
का
स्वागत
करता
हूं।
उन्होंने
कहा
कि
सुप्रीम
कोर्ट
ने
भी
शाह
के
बयान
को
‘अयोग्य’
मानकर
अपना
फैसला
सुनाया,
मगर
भाजपा
अब
भी
इसे
‘योग्य’
मानती
है
और
तभी
अब
तक
मौन
है।
पीसीसी
चीफ
जीतू
पटवारी
ने
सरकार
से
तत्काल
कार्रवाई
की
मांग
की
है।
उन्होंने
कहा,
“कर्नल
सोफिया
कुरैशी
इस
देश
की
बेटी
हैं,
भारतीय
सेना
का
गौरव
हैं,
और
ऑपरेशन
सिंदूर
के
माध्यम
से
उन्होंने
विश्व
मंच
पर
भारत
का
परचम
लहराया
है। 


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पूरा
देश
इस
बयान
की
निंदा
कर
रहा

नेता
प्रतिपक्ष
ने
कहा
कि
पूरा
देश
इस
बयान
की
निंदा
कर
रहा
है
मगर
भाजपा
फिर
भी
कोई
कार्रवाई
नहीं
कर
रही।
नेता
प्रतिपक्ष
उमंग
सिंघार
ने
कहा
कि
कोर्ट
जाग
गया,
लेकिन
सरकार
नहीं
जगी।
 दिल्ली
और
मध्य
प्रदेश
की
सरकार
को
लगता
है
कि
ये
कृत्य
योग्य
है।
अगर
भाजपा
सुप्रीम
कोर्ट
के
फैसले
को
मानती
है
तो
तुरंत
इस्तीफा
होना
चाहिए।
उन्होंने
कहा
कि
भाजपा
अब
खुद
को
सेना
और
जनभावना
से
भी
ऊपर
समझने
लगी
है। 


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ने
की
शिकायत


जब
तक
इस्तीफा
नहीं
देते
आंदोलन
जारी
रहेगा

उमंग
सिंघार
ने
आगे
कहा
कि
मंत्री
पद
से
विजय
शाह
जब
तक
इस्तीफा
नहीं
देते,
तब
तक
आंदोलन
जारी
रहेगा।
उन्होंने
यह
भी
कहा
कि
आम
व्यक्ति
पर
केस
दर्ज
होते
ही
उसके
घर
परिवार
को
पुलिस
उठा
लेती
है
जबकि
आरोपी
मंत्री
को
सरकारी
संरक्षण
मिल
रहा
है।
मंत्री
विजय
शाह
कहां
हैं,
सरकार
की
इंटेलिजेंस
को
पता
है।
उन्होंने
कहा
कि
अगर
भाजपा
में
नैतिकता
बची
है
तो
सरकार
को
तत्काल
विजय
शाह
से
इस्तीफा
लेना
चाहिए।


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बेसिस
पर
जारी
रिजल्ट
से
संतुष्ट
नहीं
है
अभ्यर्थी,
MPESB
पहुंचकर
अभ्यर्थियों
ने
किया
प्रदर्शन


भाजपा
का
दोहरा
चरित्र
और
चुप्पी

जीतू
पटवारी
ने
कहा
कि
जब
बात
राष्ट्रवाद
और
सेना
के
सम्मान
की
आती
है,
तो
भाजपा
बड़े-बड़े
दावे
करती
है।
लेकिन
जब
उनके
ही
मंत्री
भारतीय
सेना
की
एक
वीरांगना
का
अपमान
करते
हैं,
तो
उनकी
चुप्पी
उनके
राष्ट्रवाद
के
खोखलेपन
को
उजागर
करती
है।
मध्य
प्रदेश
हाई
कोर्ट
ने
विजय
शाह
के
खिलाफ
FIR
दर्ज
करने
का
आदेश
दिया
था।
क्या
भाजपा
अपने
इस
बदजुबान
नेता
को
तब
तक
मंत्रिमंडल
में
बनाए
रखेगी,
जब
तक
सुप्रीम
कोर्ट
इसका
आदेश

दे
यह
सवाल
आज
हर
देशवासी
के
मन
में
है।