
शुक्रवार
को
कक्षा
5वीं
और
8वीं
बोर्ड
परीक्षा
का
रिजल्ट
जारी
कर
दिया
गया
है।
इस
बार
गवों
के
बच्चों
ने
शहरी
बच्चों
को
पीछे
छोड़ा
है। कक्षा
5वीं
की
परीक्षा
में
शहरी
स्कूलों
के
करीब
89.15
प्रतिशत
छात्र
उत्तीर्ण
हुए।
जबकि
ग्रामीण
क्षेत्रों
के
स्कूलों
में
93.97
प्रतिशत
छात्र
उत्तीर्ण
हुए।
यानि
शहरी
स्कूलों
की
अपेक्षा
ग्रामीण
स्कूलों
में
4
प्रतिशत
अधिक
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए।
वहीं
8वीं
कक्षा
में
शहरी
स्कूलों
में
88.07
प्रतिशत
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए,
जबकि
ग्रामीण
क्षेत्रों
के
90.80
प्रतिशत
विद्यार्थी
सफल
हुए।
जो
शहरी
क्षेत्रों
से
2
प्रतिशत
अधिक
है। ज्वाइन
डायरेक्टर
राज्य
शिक्षा
केंद्र
की जय
श्री
पिल्लई
शर्मा
ने
बताया
कि ग्रामीण
क्षेत्रों
में
ज्यादातर
स्कूलों
में
पढ़ते
हैं,
इसलिए
वहां
का
रिजल्ट
अच्छा
रहा।
शिक्षा
के
प्रति
जागरूकता
बढ़ी
है।
उन्होंने
कहा
है
कि
जन्म
दर
कम
हो
रही
है
इसलिए
स्कूलों
में
बच्चे
घटे
हैं।
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पिछड़े
मदरसे
के
बच्चे
सरकारी
स्कूलों
में
कक्षा
5वीं
में
93.24
प्रतिशत
छात्र,
निजी
स्कूलों
में
91.99
प्रतिशत
और
मदरसों
के
76.83
प्रतिशत
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए।
इसी
प्रकार
कक्षा
8वीं
में
सरकारी
स्कूलों
के
89.13
प्रतिशत,
प्राइवेट
के
91.73
प्रतिशत
और
मदरसों
के
67.72
प्रतिशत
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए।
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पढ़ें-लड़कियों
ने
मारी
बाजी,
5वीं
में
92.70
और
8वीं
में
90.02
प्रतिशत
बच्चे
पास
तीन
फीसदी
ज्यादा
पास
हुए
बच्चे
5वीं
की
बोर्ड
परीक्षा
का
रिजल्ट
92.70
प्रतिशत
रहा,
जो
पिछले
सत्र
से
लगभग
2
प्रतिशत
अधिक
है। इस
बार
5वीं
की
बोर्ड
परीक्षा
में
11,17,961
विद्यार्थी
शामिल
हुए
थे.
इनमें
10,36,368
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए।
इसी
प्रकार
8वीं
की
बोर्ड
परीक्षा
में
11,68,866
विद्यार्थी
शामिल
हुए
थे,
इनमें
10,52,256
विद्यार्थी
पास
हुए
हैं।
इस
बार
8वीं
की
परीक्षा
में
90.02
प्रतिशत
विद्यार्थी
उत्तीर्ण
हुए।
जो
कि
पिछले
सत्र
से
करीब
3
प्रतिशत
अधिक
है.
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शर्मा
बोले-
वक्फ
की
जमीन
से
केवल
दो-चार-दस
परिवार
पलते
रहे
इससे
काम
नहीं
चलेगा
लड़कियों
ने
किया
टॉप,
ये
संभाग
रहे
अव्वल
कक्षा
5वीं
की
परीक्षा
में
बालिकाओं
ने
टॉप
किया।
बालिकाओं
के
उत्तीर्ण
होने
का
प्रतिशत
94.12
रहा।
जबकि
बालकों
के
उत्तीर्ण
होने
का
प्रतिशत
91.38
रहा।
यानि
बालिकाओं
की
तुलना
में
करीब
3
प्रतिशत
बालक
कम
उत्तीर्ण
हुए।
इसी
प्रकार
कक्षा
8वी
में
बालिकाओं
के
उत्तीर्ण
होने
का
प्रतिशत
91.72
रहा।
जबकि
बालकों
के
उत्तीर्ण
होने
का
प्रतिशत
88.41
रहा
है.
इसमें
भी
3
प्रतिशत
का
अंतर
है।