
मध्य
प्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
में
शिक्षा
और
शोध
से
जुड़ा
हुआ
एक
आयोजन
राजीव
गांधी
प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय
में
किया
जा
रहा
है।
यहां
पर
प्रदेश
भर
में
1600
से
अधिक
प्राप्त
पंजियन
में
से,
चयनित
150
नवाचारी
प्रोजेक्ट्स
का
लाइव
प्रदर्शन
किया
जा
रहा
है। राष्ट्रीय
प्रौद्योगिकी
दिवस
के
उपलक्ष्य
में
हो
रहे
सृजन
कार्यक्रम
में
पहुंचे
उच्च
शिक्षा,
तकनीकी
शिक्षा
एवं
आयुष
मंत्री
इन्दर
सिंह
परमार
ने
अमर
उजाला
से
विशेष
चर्चा
की।
मंत्री
ने
कहा
कि
प्रदेश
में नई
शिक्षा
नीति
के
4
साल
पूरे
हो
गए
हैं।
इस
साल
हम
फर्स्ट
ईयर
में
भारतीय
ज्ञान
परंपरा
का
समावेश
करने
जा
रहे
हैं।
शिक्षाविद
इस
पर
लगातार
काम
कर
रहे
हैं।
सिलेबस
तैयार
किया
जा
रहा।
आगे
भारतीय
ज्ञान
परंपरा
को
हर
सब्जेक्ट
में
शामिल
किया
जाएगा।
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विज्ञापन
वैज्ञानिक
दृष्टिकोण
वाला
था भारत
का
समाज
परमार
ने
कहा
कि
जो
दुनिया
के
लोग
नहीं
जानते
तो
है
वह
भारत
के
लोग
पहले
से
जानते
थे।
वह
हम
कोर्स
में
शामिल
करेंगे
ताकि
विद्यार्थियों
के
मन
में
आए
कि
हमारे
पूर्वज
ज्ञानवान
थे।
यह
धारणा
बना
ली
गई
है
कि
हमले
पूर्वज
अशिक्षित
थे,
चरवाहे
थे,
गड़डिया
थे।
परमार
ने
कहा
कि
भारत
का
समाज
सुसंगठित
समाज
था,
भारत
का
समाज
वैज्ञानिक
दृष्टिकोण
वाला
समाज
था।
भारत
का
समाज
रूढ़िवादी
नहीं
था।
भारत
के
समाज
से
जो
भी
विज्ञान
उपलब्ध
होता
है
उसको
हम
सामने
लाएंगे।
और
उसे
विद्यार्थियों
तक
पहुंचाएंगे।
तकनीकी
और
नवाचार
को
लगातार
दे
रहे
बढ़ावा
परमार
ने
बताया
कि
नई
शिक्षा
नीति
2020
के
तहत
मध्य
प्रदेश
में
विज्ञान
तकनीकी
और
नवाचार
को
लगातार
बढ़ावा
दिया
जा
रहा
है।
शोध
के
माध्यम
से
शिक्षा
को
उत्कृष्ट
करने
की
पहल
की
जा
रही
है।
मंत्री
परमार
ने
कहा
कि
सृजन
कार्यक्रम
में
प्रदेश
भर
से
एक
से
बढ़कर
एक
मॉडल
आए
हैं,
जिसमें
कहीं
ड्रोन
टेक्नोलॉजी
के
बारे
में
बताया
गया
है
तो
कहीं
कृषि
नवाचार
की
अवधारणा
को
प्रस्तुत
किया
गया
है।
नवाचारी
प्रोजेक्ट्स
का
लाइव
प्रदर्शन
राजीव
गांधी
प्रौद्योगिकी
विश्वविद्यालय
के
कुलगुरु
डॉ
राजीव
त्रिपाठी
ने
बताया
कि
सृजन
कार्यक्रम
के
तहत
पूरे
प्रदेश
से
इंजीनियरिंग
एवं
तकनीकी
विषय
के
पॉलिटेक्निक
कॉलेज
के
विद्यार्थियों
ने
अपने
मॉडल
प्रस्तुत
किए
हैं।
वही
कुलसचिव
डॉ.
मोहन
सेन
ने
बताया
कि
प्रदेश
भर
से
चयनित
150
नवाचारी
प्रोजेक्ट्स
का
लाइव
प्रदर्शन
किया
जा
रहा
है।
सृजन
कार्यक्रम
का
उद्देश्य
बच्चों
में
रिसर्च
की
प्रवृत्ति
को
बढ़ाना
है।
यह
कार्यक्रम
आने
वाले
वर्षों
में
संपूर्ण
प्रदेश
में
संचालित
किया
जाएगा।