Bhopal: जीआई समिट में पहुंचे माहेश्वरी के साड़ी मेकर, डिंडोरी के नृत्य कलाकार और देवास के चूड़ी बनाने वाले


मध्य
प्रदेश
की
राजधानी
भोपाल
में
सोमवार
24
फरवरी
से
शुरू
हुए
ग्लोबल
इन्वेस्टर
समिट
मैं
जहां
विश्व
भर
के
उद्योगपति
पहुंचे
हैं
वहीं,
मध्य
प्रदेश
के
लघु
उद्योग
को
बढ़ावा
देने
के
लिए
माहेश्वरी
और
चंदेरी
के
साड़ी
साड़ी
मेकर
भी
पहुंचे
हैं।
और
अपने
कला
का
प्रदर्शन
लोगों
को
दिख
रहे
हैं।
साथ
ही
साथ
डिंडोरी
जैसे
आदिवासी
जिलों
से
नृत्य
कलाकार
भी
पहुंचे
हैं
और
अपने
नृत्य
से
देश
ही
नहीं
विश्व
भर
के
उद्योगपतियों
का
मन
मोह
रहे
हैं। 


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माहेश्वरी
के
नाम
पर
बिक
रही
नकली
साड़ियां 

महेश्वरी
साड़ी
बनाने
वाले
कलाकार
अशोक
कुशवाहा
ने
अमर
उजाला
से
बात
करते
हुए
बताया
कि
उन्हें
सबसे
बड़ी
पीड़ा
यह
है
कि
महेश्वरी
नाम
पर
मशीनों
से
बनी
साड़ियां
बेची
जाती
है
जिससे
उनके
धंधे
को
काफी
घाटा
लग
रहा
है।
जबकि
हाथ
से
बनी
हुई
साड़ियां
बहुत
ही
मेहनत
के
बाद
बनती
हैं।
इन
कलाकारों
को
उम्मीद
है
कि
इस
ग्लोबल
इन्वेस्टर
समिट
में
कोई
उद्योगपति
उनके
कार्य
में
मदद
करेगा
और
उन्हें
बड़े
लेवल
पर
ले
जाएगा। 


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मध्य
प्रदेश
में
लघु
उद्योग
को
बढ़ावा
देने
का
प्रयास

जानकारी
के
लिए
बता
दें
कि
ग्लोबल
इन्वेस्टर
समिट
के
साथ-साथ
मध्य
प्रदेश
में
अर्थव्यवस्था
को
गति
देने
और
रोजगार
के
अवसर
बढ़ाने
के
लिए
सरकार
सूक्ष्म,
लघु
एवं
मध्यम
श्रेणी
के
उद्योगों
पर
विशेष
ध्यान
दे
रही
है।
केंद्र
सरकार
ने
महिला,
अनुसूचित
जाति
और
जनजाति
वर्ग
के
नव
उद्यमियों
के
लिए
आगामी
पांच
वर्षों
में
दो
करोड़
रुपये
तक
का
सावधि
ऋण
देने
की
योजना
बनाई
है।
इससे
राज्य
के
नए
उद्यमियों
को
बड़ा
लाभ
मिलेगा
और
वे
अपने
व्यवसाय
को
मजबूती
से
स्थापित
कर
सकेंगे।केंद्र
सरकार
ने
सूक्ष्म,
लघु
एवं
मध्यम
उद्यमों
(MSME)
की
परिभाषा
में
बदलाव
कर
निवेश
और
टर्नओवर
की
सीमा
बढ़ा
दी
है।
अब
12.5
करोड़
रुपये
तक
निवेश
और
100
करोड़
रुपये
तक
का
टर्नओवर
वाले
उद्योग
भी
MSME
की
श्रेणी
में
आएंगे।
इससे
उन
उद्यमियों
को
लाभ
होगा
जो
पहले
इस
दायरे
में
नहीं
आते
थे।
पहले
यह
सीमा
क्रमशः
5
करोड़
और
50
करोड़
रुपये
थी।सरकार
का
मानना
है
कि
इस
बदलाव
से

केवल
उद्यमियों
को
सरकारी
योजनाओं
का
लाभ
मिलेगा
बल्कि
उन्हें
भुगतान
के
लिए
भी
अधिक
समय
उपलब्ध
होगा।
इसके
अतिरिक्त,
उद्यम
पोर्टल
पर
पंजीकृत
उद्योगों
को
पांच
लाख
रुपये
तक
के
कस्टमाइज्ड
क्रेडिट
कार्ड
मिलेंगे,
जिनका
उपयोग
वे
अपनी
जरूरतों
के
अनुसार
कर
सकेंगे।