Bhopal News: डिप्टी सीएम राजेंद्र शुक्ल पहुंचे अपने पीआरओ के घर, बच्चों के साथ बिताया वक्त

Bhopal News: Deputy CM Rajendra Shukla reached his PRO's house spent time with children

डिप्टी
सीएम
राजेंद्र
शुक्ल
अपने
पीआरओ
के
घर
पहुंचे।


फोटो
:
Bhopal
News:
Deputy
CM
Rajendra
Shukla
reached
his
PRO’s
house
spent
time
with
children

विस्तार

कद,
पद,
शान

शौकत
के
साथ
व्यस्तता
भी
पीछे
लगी
चली
ही
आती
है।
अपनों
के
लिए
वक्त
की
कमी
के
हालात
में
किसी
मातहत
के
लिए
समय
निकाला
जाए,
तो
यह
निश्चित
तौर
पर
हौंसला
बढ़ाने,
रिश्ते
मजबूत
करने
और
काम
की
ईमानदारी
और
समर्पण
की
ऊर्जा
बढ़ाने
वाला
होता
है।
चुनावी
भागमभाग
के
बीच
डिप्टी
सीएम
ने
कुछ
ऐसे
ही
पल
निकाल
लिए।
वे
अपने
जनसंपर्क
अधिकारी
ताहिर
अली
के
घर
पहुंचे,
देर
तक
वहां
रुके
भी
और
परिवार
के
बच्चों
का
साथ
वक्त
भी
बिताया।
इस
संक्षिप्त
लेकिन
महत्वपूर्ण
मुलाकात
की
खास
बात
ये
भी
थी
कि
इस
दौरान

तो
दफतरी
कामों
पर
कोई
चर्चा
की
गई
और

ही
सियासी
मुद्दों
पर
कोई
बहस
ही
छेड़ी
गई।

डिप्टी
सीएम
राजेंद्र
शुक्ल
ने
शनिवार
को
अचानक
अपने
जनसंपर्क
अधिकारी
ताहिर
अली
के
घर
पर
दस्तक
दे
दी।
अपने
किसी
व्यस्त
कार्यक्रम
से
वापसी
के
बीच
वे
जब
इस
मुलाकात
के
लिए
पहुंचे
तो
ताहिर
के
साथ
उनकी
नन्हीं
पोती
अमानह
और
मासूम
से
पोते
सैयद
आनिस
ने
भी
अपने
घर
आए
इस
खास
मेहमान
का
इस्तकबाल
किया।
नन्हें
मुन्ने
बच्चों
को
दुलारते
हुए
जब
डिप्टी
सीएम
शुक्ल
घर
में
दाखिल
हुए
तो
यहां
उनका
स्वागत
ताहिर
अली
के
बेटे
सैयद
आसिम
अली
ने
किया।
हल्की
फुल्की
बातचीत
और
मुलाकात
का
दौर
काफी
देर
चला।
इस
बीच
चाय
की
चुस्कियां
और
अल्पाहार
का
सिलसिला
भी
चला।


शुक्ल
और
ताहिर
की
लंबी
पारी

वर्तमान
डिप्टी
सीएम
राजेंद्र
शुक्ल
पहली
बार
2003
में
पुष्पराज
सिंह
को
हराकर
विधानसभा
के
लिए
चुने
गए।
साल
2008
और
2013
के
मध्य
प्रदेश
विधानसभा
चुनावों
में
फिर
से
अपनी
जीत
बरकरार
रखी।
एक
विधायक
के
रूप
में
अपने
कार्यकाल
में,
उन्होंने
वानिकी,
जैव
विविधता/जैव
प्रौद्योगिकी,
खनिज
संसाधन
और
कानूनी
मामलों
सहित
विभिन्न
मंत्रालयों
के
तहत
कार्य
किया।
उन्होंने
शिवराज
सिंह
चौहान
सरकार
में
साल
2023
में
कैबिनेट
मंत्री
के
रूप
में
भी
पदभार
संभाला।
सैयद
ताहिर
अली
जनसंपर्क
विभाग
में
सेवारत
रहे
हैं।
विभिन्न
पदों
पर
रहते
हुए
वे
कुछ
साल
पहले
सेवा
निवृत्त
हुए
हैं।
सेवाकाल
के
दौरान
और
उसके
बाद
भी
ताहिर,
राजेंद्र
शुक्ल
के
साथ
काम
करते
रहे
हैं।
सेवा
निवृत्ति
के
बाद
उस
दौर
में
जब
शुक्ल
के
पास
कोई
मंत्रालय
नहीं
था,
तब
भी
ताहिर
अपनी
विशेष
सेवाओं
के
साथ
मौजूद
थे।


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