भोपाल
के
लोगों
के
रुकने
के
लिए
बनाए
गए
भवन
–
फोटो
:
सोशल
मीडिया
विस्तार
नवाब
शासन
काल
में
सऊदी
अरब
में
तैयार
कराई
गईं
रुबात
(धर्मशाला)
इस
बार
भी
भोपाल
रियासत
(भोपाल,
रायसेन,
सीहोर
जिला)
के
हाजियों
को
राहत
नहीं
दे
पाएगी।
पिछले
पांच
सालों
से
जारी
अव्यवस्था
के
मुताबिक
इस
साल
भी
सिर्फ
मक्का
रुबात
ही
मिल
पाएगी।
जबकि
मदीना
की
रुबात
में
भोपाल
रियासत
के
हाजियों
को
जगह
मिलना
मुश्किल
है।
हालांकि
विवादों
के
चलते
सऊदी
सरकार
के
कब्जे
में
जा
चुकी
इन
रुबात
को
स्थानीय
प्रशासन
टेंडर
द्वारा
नीलामी
कर
अन्य
देशों
से
आने
वाले
हाजियों
को
किराए
पर
देने
की
तैयारी
कर
चुकी
है।
भोपाल
स्थित
दफ्तर
शाही
औकाफ
ने
27
अप्रैल
को
सऊदी
स्थित
मक्का
में
मौजूद
रुबात
का
कुरा
करने
की
तैयारी
की
है।
इस
दौरान
भोपाल,
रायसेन
और
सीहोर
जिले
से
हज
पर
जाने
वाले
करीब
1200
हाजियों
में
से
महज
200
लोगों
का
नाम
लॉटरी
द्वारा
निकाला
जाएगा।
हालांकि
यह
तादाद
पिछले
साल
आवंटित
की
गई
सीटों
से
भी
कम
है।
शाही
औकाफ
ने
इस
दौरान
इस
बात
को
स्पष्ट
नहीं
किया
है
कि
हाजियों
को
मदीना
में
रुबात
में
ठहरने
की
सुविधा
मिल
पाएगी
या
नहीं।
गौरतलब
है
कि
करीब
पांच
साल
पहले
तक
मौजूद
व्यवस्था
के
तहत
प्रदेश
के
इन
तीन
जिलों
से
हज
पर
जाने
वाले
सभी
हाजियों
को
मदीना
में
ठहरने
के
मुफ्त
इंतजाम
हुआ
करते
थे।
लेकिन
सउदी
सरकार
और
इन
रुबात
के
इंतजाम
देखने
वाले
शाही
औकाफ
के
बीच
जारी
विवाद
के
चलते
यह
व्यवस्था
बंद
हो
गई
है।
भोपाल
के
नवाब
द्वारा
हजयात्रियों
के
ठहरने
के
लिए
सालों
पहले
सउदी
अरब
में
इमारतें
खरीदी
गई
थी,
जिनमें
मध्यप्रदेश
से
जानेवाले
हजयात्रियों
के
ठहरने
की
व्यवस्था
होती
रही
है।
यहां
हजयात्रियों
के
ठहरने
से
करीब
पांच
करोड़
रुपये
की
बचत
होती
है।
लेकिन
यहां
पिछली
बार
हजयात्रियों
को
जगह
ही
नहीं
मिल
पाई
थी।
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क्या
है
रुबात
नवाब
शासनकाल
के
दौरान
बेगमात
ने
सउदी
अरब
के
मक्का
और
मदीना
में
कुछ
बहुमंजिला
इमारतें
बनवाई
थीं।
इनकी
मंशा
यह
थी
कि
भोपाल
रियासत
(भोपाल,
सीहोर
और
रायसेन
जिले)
के
हाजियों
को
हज
और
उमराह
के
दौरान
निशुल्क
ठहरने
की
व्यवस्था
मिल
जाए।
करीब
103
साल
से
यह
व्यवस्था
कुछ
साल
पहले
तक
जारी
थी।
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5
करोड़
से
ज्यादा
बचत
जानकारी
के
अनुसार
जिन
हाजियों
को
रुबात
में
जगह
मिलती
है।
उनका
हज
खर्च
चालीस
से
पचास
हजार
रुपए
कम
हो
जाता
है।
इन
तीन
जिलों
से
करीब
एक
हजार
लोग
हजयात्रा
पर
जाते
हैं।
पिछले
साल
यह
संख्या
933
थी।
इस
आधार
पर
यह
राशि
करीब
पांच
करोड़
रुपए
होती
है।
(भोपाल
से
खान
आशु
की
रिपोर्ट)