Bhopal: एमपी में मूंग खरीदी का मामला गरमाया, PCC चीफ ने सीएम को  लिखा पत्र, नेता प्रतिपक्ष ने खड़े किए सवाल

मध्य
प्रदेश
में
किसानों
की
मूंग
नहीं
खरीदे
जाने
पर
सियासत
शुरू
हो
गई
है।
पीसीसी
चीफ
जीतू
पटवारी
ने
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
को
पत्र
लिख
किसानों
की
मूंग
खरीदने
का
आग्रह
किया
है।
वहीं
नेता
प्रतिपक्ष
उमंग
सिंघार
ने
वीडियो
जारी
कर
किसने
की
मूंग
नहीं
खरीदे
जाने
पर
सवाल
खड़े
किए
हैं।
पटवारी
ने
मांगे
पूरी
नहीं
होने
पर
प्रदेश
में
आंदोलन
की
चेतावनी
दी
है।


मूंग
उपजाने
वाले
लाखों
किसानों
के
साथ
धोखा

एमएसपी
में
मूंग
खरीदी
नहीं
होने
पर
नेता
प्रतिपक्ष
उमंग
सिंघार
ने
कहा
है
की
मूंग
उपजाने
वाले
लाखों
किसानों
के
साथ
धोखा
है।
सरकार
ने
मूंग
की
सरकारी
खरीदी
से
इनकार
कर
किसानों
की
मेहनत
और
भरोसे
पर
कुठाराघात
किया
है।कभी
‘दुगनी
आमदनी’
का
सपना
दिखाने
वाली
भाजपा
अब
मूंग
को
‘ज़हरीला’
बताकर
पल्ला
झाड़
रही
है।
इससे
किसानों
को
6000
करोड़
से
ज्यादा
का
नुकसान
होगा।


विज्ञापन


विज्ञापन

 

नेता
प्रतिपक्ष
के
सरकार
से
सवाल


1-

अगर
मूंग
में
ज़हर
है,
तो
अब
तक
सरकार
और
एजेंसियां
क्या
कर
रही
थीं?

2-

वही
मूंग
मंडी
में
व्यापारी
3500-5000
रुपये
में
क्यों
खरीद
रहे
हैं?

3-

ज़हरीला
कीटनाशक
कौन
सा
है
और
उस
पर
सरकार
कितना
GST
वसूल
रही
है?

4-

पिछले
वर्षों
से
सरकार
यही
मूंग
MSP
पर
खरीदती
रही,
तब
ज़हर
क्यों
नहीं
दिखा?

5-

खरीदी
नहीं
करनी
थी
तो
मार्च
में
किसानों
को
साफ
मना
क्यों
नहीं
किया?

6-

नहरों
से
पानी
क्यों
छोड़ा
गया
अगर
खरीदी
नहीं
होनी
थी?

7-

सरकार
साफ
करे
क्या
आगे
धान
और
गेहूं
की
MSP
पर
खरीदी
होगी?


यह
भी
पढ़ें-भोपाल
में
कैंची
धाम
वाले
नीब
करोली
महाराज
के
हनुमत
धाम
का
निर्माण
होगा,
सीएम
बोले-बढ़ेगी
आभा
और
कीर्ति


किसान
गहरी
पीड़ा
और
निराशा
में

पीसीसी
चीफ
जीतू 
पटवारी
ने
मुख्यमंत्री
डॉक्टर
मोहन
यादव
को
लिखे
पत्र
में
कहा
है
कि
प्रदेश
के
लाखों
किसान
फिर
गहरी
पीड़ा
और
निराशा
में
हैं।
ग्रीष्मकालीन
मूंग
की
फसल
का
उत्पादन
करने
वाले
किसानों
को
भाजपा
सरकार
की
उदासीनता,
वादाखिलाफी
और
प्रशासनिक
अस्थिरता
के
कारण
गंभीर
आर्थिक
संकट
का
सामना
करना
पड़
रहा
है।


प्रति
एकड़
औसतन
28,500
की
लागत

मूंग
की
खेती
में
किसानों
को
प्रति
एकड़
औसतन
28,500
की
लागत
आती
है,
जिसमें
बीज,
खाद,
कीटनाशक,
मजदूरी,
सिंचाई
और
परिवहन
का
खर्च
शामिल
है,
लेकिन
बाजार
में
इस
समय
मूंग
का
जो
भाव
मिल
रहा
है,
वह
लागत
से
भी
बहुत
कम
है!
सरकारी
उदासीनता
के
कारण
व्यापारी
मनमाने
दामों
पर
खरीद
कर
रहे
हैं
और
सरकार
पूरी
तरह
मूकदर्शक
बनी
हुई
है।


यह
भी
पढ़ें-मध्य
प्रदेश
में
आम
आदमी
पार्टी
शुरू
करेगी
संवाद
यात्रा,
दिल्ली
के
पूर्व
मंत्री
को
सौंपी
एमपी
की
कमान


सरकार
की
कोई
स्पष्ट
नीति
नहीं 

पटवारी
ने
आगे
लिखा
कि
हर
वर्ष
अप्रैल-मई
में
मूंग
की
खरीदी
के
लिए
पंजीयन
प्रक्रिया
शुरू
हो
जाती
है,
लेकिन
इस
बार
सरकार
ने
कोई
स्पष्ट
नीति
घोषित
नहीं
की।

तो
समय
पर
खरीदी
की
घोषणा
की
गई,

ही
कोई
वैकल्पिक
योजना
सामने
रखी
गई।
आपकी
सरकार
की
ओर
से
यह
कहा
जाना
कि
मूंग
में
अत्यधिक
रसायनों
का
प्रयोग
हुआ
हुआ
है
यह

केवल
वैज्ञानिक
तथ्यों
से
परे
है,
बल्कि
किसानों
की
समझ
पर
सवाल
उठाने
वाला
भी
है।
यदि
ये
रसायन
इतने
ही
खतरनाक
हैं,
तो
फिर
सरकार
इनकी
बिक्री
को
लाइसेंस
क्यों
दे
रही
है?


किसानों
को
लाखों
रुपए
का
सीधा
नुकसान

पटवारी
ने
आगे
लिखा
कि
मूंग
प्रदेश
की
एक
महत्वपूर्ण
नगदी
फसल
है,
जो
किसानों
को
आंशिक
आर्थिक
सुरक्षा
देती
है,
खासकर
तब,
जब
अन्य
फसलें
या
तो
बारिश,
ओलावृष्टि
या
कीटजनित
बीमारियों
के
कारण
खराब
हो
जाती
हैं।
इस
बार
यदि
मूंग
की
खरीदी
नहीं
की
गई,
तो
किसानों
को
लाखों
रुपए
का
सीधा
नुकसान
होगा
और
अगली
फसल
की
बोवनी
के
लिए
उन्हें
ऊंचे
ब्याज
पर
कर्ज
लेना
पड़ेगा।
इससे
कर्ज
का
दुष्चक्र
और
भी
गहरा
होता
जाएगा।


जीतू
पटवारी
की
प्रमुख
मांगे


1.

सरकार
समर्थन
मूल्य
पर
मूंग
की
खरीदी
तत्काल
शुरू
करे।

2.

जिन
किसानों
का
मूंग
पंजीयन
नहीं
हो
सका,
उनके
लिए
विशेष
शिविर
लगाकर
तत्काल
पंजीयन
की
व्यवस्था
हो।

3

मूंग
में
रसायन
प्रयोग
के
नाम
पर
खरीदी

रोकी
जाए!
यदि
ऐसा
कोई
वैज्ञानिक
आधार
हो
तो
पारदर्शी
तरीके
से
परीक्षण
कर
किसानों
को
रिपोर्ट
दी
जाए।