Gwalior News: सबसे बड़ी 2.53 करोड़ की ठगी में बड़ा खुलासा, स्लीपर सेल की तरह काम करते हैं गिरोह के सदस्य


ग्वालियर
में
हुई
मध्य
प्रदेश
की
सबसे
बड़ी
2.53
करोड़
की
ठगी
में
पकड़े
गए
ठगों
से
एक
के
बाद
एक
बड़े
खुलासे
सामने

रहे
हैं।
इस
ठगी
में
पुलिस
ने
अब
तक
एमपी,
यूपी,
दिल्ली
से
कुल
19
ठगों
को
पकड़ा
है।
सबसे
चौंकाने
वाली
बात
यह
है
कि
ये
ठग
एक
दूसरे
को

जानते
हैं
और
नहीं
पहचानते
हैं।
मतलब
यह
गिरोह
के
सदस्य
सभी
स्लीपर
सेल
की
तरह
काम
कर
रहे
हैं।
ग्वालियर
पुलिस
अब
उसे
मास्टरमाइंड
तक
पहुंचाने
की
कोशिश
कर
रही
है,
जो
युवाओं
को
स्लीपर
सेल
के
रूप
साइबर
फ्रॉड
में
उपयोग
कर
रहा
है।


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बता
दें
16
अप्रैल
को
ग्वालियर
के
रामकृष्ण
मिशन
आश्रम
के
सचिव
26
दिन
तक
डिजिटल
अरेस्ट
करके
2.5
करोड़
रुपये
की
ठगी
के
मामले
ग्वालियर
पुलिस
को
बड़ी
सफलता
मिल
रही
है।
पुलिस
ने
अब
तक
इस
पूरे
मामले
में
19
ठगों
गिरफ्तार
किया
है।
इन
आरोपियों
में
बैंक
अधिकारी,
बेरोजगार
युवा
यहां
तक
कि
सब्जी
बेचने
वाले
तक
शामिल
हैं।
वहीं,
अभी
हाल
में
ही
पुलिस
ने
उत्तर
प्रदेश
से
10
युवाओं
को
भी
गिरफ्तार
किया
है।
यह
पकड़े
गये
आरोपी
एक
दूसरे
को

तो
जानते
हैं
ना
पहचानते
हैं
और

हीं
कभी
मुलाकात
हुई
है।
पुलिस
की
जांच
में
खुलासा
हुआ
है
कि
साइबर
गिरोह
का
मास्टरमाइंड
देश
के
अलग-अलग
बड़े
शहरों
में
नए
युवाओं
को
फंसा
कर
स्लीपर
सेल
के
रूप
में
उनका
उपयोग
करता
है
इसके
बदले
उन्हें
पैसा
देता
है।


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विरोध
हुआ

पकड़े
गए
आरोपियों
से
खुलासा
हुआ
है
कि
साइबर
ठगों
का
सारा
काम
ऑनलाइन
है
इसमें
कई
लेयर
में
तो
की
टीम
रहती
है।इसमें
खाता
धारक
हम
कड़ी
है।
सेविंग
और
चालू
खाता
बेचने
और
किराए
पर
देने
वालों
की
हर
वक्त
तलाश
रहती
है,
लेकिन
खाताधारक
को
यूज
एंड
थ्रो
की
तर्ज
पर
इस्तेमाल
किया
जाता
है
क्योंकि
खाते
में
एक
बार
रकम
आती
है
तो
वह
नजर
में
आता
है
इसलिए
दोबारा
उसे
खाते
को
इस्तेमाल
नहीं
करते
है।
साइबर
क्राइम
के
एएसपी
श्रीकृष्णा
लालचंदानी
का
कहना
है
कि
पकड़े
गए
आरोपियों
से
अभी
और
पूछताछ
की
जा
रही
है।
कड़ी
से
कड़ी
जोड़ी
जा
रही
है
पकड़े
आरोपियों
में
किसी
को
नहीं
पता
कि
साइबर
लुटेरों
का
नेटवर्क
कहां
से
चलता
है।
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मंदिर
से
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का
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में
कैद
हुआ
संदिग्ध,
जांच
में
जुटी
पुलिस

ठगों
ने
खुलासा
किया
है
कि
गिरोह
में
सबका
हिसाब
से
है
सेविंग
खाता
खुलवाने
वाले
दलाल
को
5000
खाता,
बेचने
वाले
को
10000
मिलता
है।
जबकि
करंट
खाता
खुलवाने
वाले
को
7000
और
खाता
बेचने
या
किराए
पर
देने
वाले
को
जिस
दम
पर
सौदा
तय
होता
है
रकम
दी
जाती
है।
करंट
अकाउंट
की
मांग
ज्यादा
रहती
है
क्योंकि
इस
खाते
में
पैसा
जमा
करने
की
लिमिट
नहीं
होती।इसी
तरह
हैंडलर
को
ठगी
की
रकम
में
10
से
15
फीसदी
कमीशन
रहता
है
सबसे
ज्यादा
मुनाफा
सरगना
की
खाते
में
जाता
है।