औकाफ
ए
शाही
की
नवगठित
कमेटी
सदस्य
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
राजधानी
भोपाल
में
बड़ा
बाग
स्थित
शाही
कब्रिस्तान
की
किरायादारी
की
सरगर्मियों
ने
मंगलवार
को
शहर
की
फिक्र
बढ़ा
दी
है।
हालात
देखते
हुए
औकाफ
ए
शाही
की
नवगठित
कमेटी
के
सदस्य
और
उलेमा
मौका
मुआयना
करने
जा
पहुंचे।
लेकिन
इस
दौरान
पुरानी
कमेटी
के
फैसले
पर
ही
सहमति
की
मोहर
लगाकर
लौट
आए।
“अमर
उजाला”
ने
इस
मामले
को
मंगलवार
को
प्रमुखता
से
प्रकाशित
किया
था।
इस
खबर
से
बढ़े
तनाव
और
चिंता
के
बीच
औकाफ
ए
शाही
की
नवगठित
कमेटी
के
सचिव
सिकंदर
हफीज
खान,
शादाब
रहमान
और
स्टाफ
शाही
कब्रिस्तान
पहुंचे।
इस
दौरान
शहर
मुफ्ती
मोहम्मद
अब्दुल
कलाम
खान
कासमी
भी
साथ
थे।
इस
कब्रिस्तान
में
किरायादार
बनाए
गए
शर्मा
कंस्ट्रक्शन
के
राकेश
शर्मा
भी
मौजूद
थे।
औकाफ
ए
शाही
के
सचिव
सिकंदर
हफीज
ने
कहा
कि
पिछली
कमेटी
ने
यह
किरायादारी
की
थी।
यह
एक
अस्थाई
प्रक्रिया
है।
उन्होंने
कहा
कि
सड़क
निर्माण
कार्य
के
लिए
कब्रिस्तान
की
जगह
किराए
पर
दी
गई
है।
काम
पूरा
होने
पर
कंपनी
जगह
खाली
करके
चली
जाएगी।
उन्होंने
यह
भी
स्पष्ट
किया
कि
आज
निरीक्षण
के
दौरान
इस
बात
की
पुष्टि
कर
ली
गई
है
कि
यहां
कंस्ट्रक्शन
कंपनी
ने
किसी
कब्र
को
नुकसान
नहीं
पहुंचाया
है।
100
रुपये के
स्टांप
पर
समझौता
सूत्रों
का
कहना
है
कि
औकाफ
ए
शाही
के
पूर्व
सचिव
आजम
तिरमिजी
ने
शर्मा
कंस्ट्रक्शन
के
साथ
जो
समझौता
किया
है,
वह
मात्र
100
रुपये के
स्टांप
पेपर
पर
किया
है।
जबकि
जानकारों
का
कहना
है
कि
25
हजार
स्क्वॉयर
फीट
जमीन
के
लिए
किया
गया
यह
समझौता
उचित
स्टांप
ड्यूटी
वाले
पेपर्स
पर
होना
चाहिए
थी।
उनका
कहना
है
कि
भविष्य
में
इस
स्टांप
का
अदालती
कार्यवाही
में
कोई
मान्यता
नहीं
होगी।
विज्ञापन
विज्ञापन
पुराने
की
गलती
को
नए
ने
दोहराया
औकाफ
ए
शाही
की
पुरानी
कमेटी
के
सचिव
आजम
तिरमिजी
ने
वक्फ
अधिनियम
के
प्रावधानों
को
दरकिनार
कर
कब्रिस्तान
की
किरायादारी
कर
दी
है।
उनके
इस
उपक्रम
से
भविष्य
में
कब्रिस्तान
पर
स्थाई
कब्जा
होने
की
संभावना
लहरा
रही
हैं।
आठ
मई
को
औकाफ
ए
शाही
की
पुरानी
कमेटी
के
भंग
किए
जाने
के
बाद
उम्मीद
जाहिर
की
जा
रही
थी
कि
नवागत
कमेटी
इस
गलती
का
सुधार
करेगी।
संभावना
थी
कि
यह
कमेटी
पुरानी
कमेटी
के
फैसले
को
बदलकर
किरायादारी
को
खत्म
कर
देगी।
लेकिन
नई
कमेटी
ने
भी
इस
समझौते
को
उचित
करार
देते
हुए
कंस्ट्रक्शन
वर्क
के
रास्ते
आसान
कर
दिए
हैं।
साथ
ही
एग्रीमेंट
पूरा
हो
जाने
तक
अस्थिरता
के
हालात
बना
दिए
हैं।
विज्ञापन
इस
राशि
से
शाही
औकाफ
का
कितना
भला
जानकारी
के
मुताबिक,
औकाफ
ए
शाही
ने
कब्रिस्तान
की
जमीन
की
किरायादारी
महज
एक
लाख
पच्चीस
हजार
रुपये महीना
पर
की
है।
इस
लिहाज
से
कमेटी
को
अधिकतम
राशि
15
लाख
रुपये मिलेगी।
कहा
जा
रहा
है
कि
औकाफ
ए
शाही
के
पास
अरबों
रुपये की
संपत्तियां
मौजूद
हैं,
जिनसे
उसकी
लाखों
रुपये की
आमदनी
भी
है।
ऐसे
में
इतनी
छोटी
राशि
से
न
तो
औकाफ
ए
शाही
को
कोई
फायदा
होने
वाला
है
और
न
ही
इससे
किसी
जरूरतमंद
तक
कोई
मदद
ही
पहुंचाई
जा
सकती
है।
रोका
टोकी
अभी
से
शुरू
जानकारी
के
मुताबिक,
औकाफ
ए
शाही
ने
शर्मा
कंस्ट्रक्शन
कंपनी
के
साथ
25
हजार
स्क्वॉयर
फीट
जमीन
की
किरायादारी
की
है।
लेकिन
कंपनी
ने
अपना
प्लांट
लगाने
के
लिए
शुरुआती
काम
के
दौरान
ही
हद
से
बाहर
जाकर
काम
करना
शुरू
कर
दिया
है।
तय
शर्त
के
मुताबिक,
कंपनी
को
यहां
बोरवेल
करवा
कर
अपनी
जरूरत
का
पानी
लेना
है।
लेकिन
यहां
किए
जा
रहे
कामों
के
लिए
बावड़ी
से
पानी
लिया
जा
रहा
है।
इसके
अलावा
कंपनी
कर्मचारियों
ने
इस
जमीन
से
आम
लोगों
की
आवाजाही
पर
पाबंदी
लगाना
भी
शुरू
कर
दिया
है।
जबकि
शाही
कब्रिस्तान
के
आसपास
स्थित
आवासीय
आबादी
और
कारोबारी
लोगों
का
यहां
से
गुजरना
बरसों
से
जारी
है।
इस
रास्ते
से
चलकर
उनको
लंबा
रास्ता
पार
करने
से
निजात
मिल
जाया
करती
है।
विज्ञापन
…भोपाल
से
खान
आशु
की
रिपोर्ट