जिसने बनाया मोहन यादव को मुख्यमंत्री, उसने हेमंत खंडेलवाल को बनाया भाजपा अध्यक्ष

यह
बात
सुनने
में
बड़ी
अटपटी
लग
सकती
है,
लेकिन
है
एकदम
सही।
आपको
यह
जानकर
आश्चर्य
होगा
कि
आरएसएस
के
जिस
नेता
ने
बैकग्राउंड
में
रहकर
मुख्यमंत्री
डॉ.
मोहन
यादव
को
मुख्यमंत्री
बनवाया
था,
अब
उसी
ने
हेमंत
खंडेलवाल
को
भी
प्रदेश
भाजपा
का
अध्यक्ष
बनवाया
है।
आरएसएस
के
इसी
वरिष्ठ
नेता
के
कारण
ही
हेमंत
खंडेलवाल
को
लेकर
अंदर
ही
अंदर
कब
आम
सहमति
बन
गई,
यह
पता
ही
नहीं
चला।
अगर
यह
कहा
जाए
कि
इस
आरएसएस
नेता
का
मध्य
प्रदेश
की
राजनीति
में
सबसे
महत्वपूर्ण
प्रभाव
है
तो
कोई
अतिशयोक्ति
नहीं
होगी।
बता
दें
कि
यह
आरएसएस
नेता
मध्य
प्रदेश
के
ही
हैं
और
उनकी
दखल
मध्य
प्रदेश
के
राजनीतिक
गलियारों
में
आज
से
नहीं
काफी
पहले
से
रही
है।


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मुख्यमंत्री
की
विदेश
यात्रा
और
IAS
अधिकारियों
की
तबादला
सूची 

आप
सोचेंगे
कि
मुख्यमंत्री
की
विदेश
यात्रा
से
IAS
अधिकारियों
की
तबादला
सूची
का
क्या
संबंध
है?
लेकिन
आप
अगर
पुरानी
परंपराओं
को
टटोलेंगे
तो
यह
संबंध
आपको
सही
नजर
आएगा।
दरअसल
पहले
भी
मुख्यमंत्री
जब-जब
विदेश
यात्रा
पर
जाते
थे,
तो
उसके
एक
दिन
पहले
वे
दिल्ली
रवाना
होने
से
पहले
उसे
फाइनल
कर
के
रवाना
होते
रहे
हैं
और
उसी
दिन
रात
में
तबादला
सूची
जारी
होती
थी।
माना
जा
रहा
है
कि
इस
बार
भी
शायद
ऐसा
ही
होगा।
मुख्यमंत्री
डॉ. मोहन
यादव
13
जुलाई
को
करीब
एक
सप्ताह
की
यूरोप
की
औद्योगिक
यात्रा
पर
जा
रहे
हैं।
राजनीतिक
गलियारों
में
यह
कयास
लगाए जा
रहे
हैं
कि
12
जुलाई
की
रात
को
IAS
अधिकारियों
के
तबादले
की
बड़ी
सूची

सकती
है,
जिसमें
अपर
मुख्य
सचिव,
प्रमुख
सचिव,
सचिव,
विभाग
प्रमुख,
तीन
कमिश्नर
और
एक
दर्जन
कलेक्टर
प्रभावित
हो
सकते
हैं।
पता
चला
है
कि
इस
सूची
पर
मुख्यमंत्री
और
मुख्य
सचिव
की
दो
दौर
की
चर्चा
हो
चुकी
है।
एक
दो
नाम
को
लेकर
अभी
भी
उलझन
है
और
इसीलिए
सूची
को
अंतिम
रूप
नहीं
दिया
जा
सका
है।
अब
यह
लगभग
तय
माना
जा
रहा
है
कि
यह
सूची
मुख्यमंत्री
की
विदेश
यात्रा
के
पहले
जारी
हो
सकती
है
तब
तक
सब
उलझनें दूर हो जाएंगी। 


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मध्य
प्रदेश
के
प्रशासनिक
और
राजनीतिक
क्षेत्र
में
पिछले
करीब
एक
महीने
से
यह
चर्चा
जोरों
से
चल
रही
है
कि
मुख्यमंत्री
के
एक
करीबी
अधिकारी
को
बदला
जा
रहा
है।
बताया
तो
यहां
तक
जाता
है
कि
संबंधित
अधिकारी
भी
हटने
के
इच्छुक
हैं।
सूत्रों
से
मिली
जानकारी
के
अनुसार
इस
अधिकारी
की
नई
पदस्थापना
को
लेकर
फाइनल
नहीं
हो
पा
रहा
है
शायद
इसीलिए
यह
बदलाव
अटका है।
हमारे
सूत्र
बताते
हैं
कि
मुख्यमंत्री
के
इस
करीबी
अधिकारी
को
अपर
मुख्य
सचिव
पंचायत
और
ग्रामीण
विकास
और
विकास
आयुक्त
के
पद
के
साथ
कोई
और
महत्वपूर्ण
जिम्मेदारी
दी
जा
सकती
है।
उन्हें
कृषि
उत्पादन
आयुक्त
भी
बनाया
जा
सकता
है।
जो
भी
हो,
यह
सब
अभी
फिलहाल
चर्चा
में
ही
है,
अंतिम
निर्णय
तो
मुख्यमंत्री
को
ही
लेना
है।


जल्द

सकता
है
भोपाल
का
मास्टर
प्लान 

भोपाल
के
बिल्डरों
के
लिए
यह
खुशखबरी
है।
जिस
बात
का
इंतजार
वे
पिछले
कुछ
वर्षों
से
कर
रहे
हैं,
अब
वह
शायद
जल्द
ही
देखने
को
मिल
सकती
है।
हम
यहां
बात
कर
रहे
हैं
भोपाल
के
मास्टर
प्लान
की।
भोपाल
और
इंदौर
को
मेट्रोपॉलिटन
सिटी
बनाने
की
घोषणा
के
बीच
यह
चर्चा
है
कि
भोपाल
और
इंदौर
के
लंबित
मास्टर
प्लान
पर
तेजी
से
काम
चल
रहा
है।
मंत्रालय
के
सूत्रों
के
अनुसार
इंदौर
के
मास्टर
प्लान
में
विभिन्न
कारणों
से
देर
लग
सकती
है,
लेकिन
भोपाल
का
मास्टर
प्लान
फाइनल
स्टेज
पर
है
और
अब
यह
कभी
भी
सामने

सकता
है।
नगरीय
प्रशासन
विभाग
के
अपर
मुख्य
सचिव
संजय
शुक्ला
इस
काम
में
दिन-रात
लगे
हुए
हैं।
अगर
अगले
कुछ
दिनों
में
यह
प्लान
फाइनल
होकर
जारी
हो
जाए
तो
आश्चर्य
नहीं होना चाहिए। 

केंद्र
में
ब्यूरोक्रेसी
‘वेट
एंड
वॉच’
मोड
में 

दिल्ली
में
सेंट्रल
विस्टा
की
खबरों
पर
अगर
भरोसा
किया
जाए
तो
मोदी
कैबिनेट
का
शीघ्र
ही
विस्तार
हो
सकता
है।
इसे
देखते
हुए
केंद्र
में
ब्यूरोक्रेसी
‘वेट
एंड
वॉच’
मोड
में

गई
है।
सूत्रों
के
अनुसार
इसी
महीने
21
तारीख
से
होने
वाले
संसद
के
मानसून
सत्र
के
पहले
यह
विस्तार
हो
सकता
है।
बड़ा
प्रश्न
यह
है
कि
इसमें
कौन
शामिल
किया
जाएगा
और
किसे
ड्रॉप
किया
जाएगा।
सूत्रों
से
मिली
जानकारी
के
अनुसार
तीन-चार
मंत्री
ड्रॉप
किए
जा
सकते
हैं।
मध्य
प्रदेश
से
वीडी
शर्मा
का
नाम
प्रमुखता
से
लिया
जा
रहा
है
जो
कल
तक
भाजपा
मध्य
प्रदेश
के
अध्यक्ष
थे।
इसके
अलावा
मनोज
सिन्हा,
विप्लव
दास
और
उपेंद्र
कुशवाहा
के
नाम
भी
चर्चा
में
हैं।
बिहार
चुनाव
को
देखते
हुए
उपेंद्र
कुशवाहा
को
शामिल
करने
की
बात कही जा रही है।


केंद्र
में
सचिवों
की
एक
और
तबादला
लिस्ट
निकलने
की
चर्चा 

केंद्र
में
वित्त
सचिव
अजय
सेठ
इसी
माह
रिटायर
हो
रहे
हैं।
उनके
स्थान
पर
कर्नाटक
कैडर
के
1987
बैच
के
आईएएस
अधिकारी
का
नाम
लिया
जा
रहा
है।
यह
भी
पता
चला
है
कि
अजय
सेठ
को
रिटायरमेंट
के
बाद
आईएमएफ
में
रिक्त
स्थान
के
विरुद्ध
नियुक्त
किया जा सकता है।
 


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    (अस्वीकरण):

    यह
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