
उज्जैन
लोकसभा
सीट
का
गणित
–
फोटो
:
अमर
उजाला
विस्तार
मालवा
क्षेत्र
में
केंद्रीय
राजनीति
के
मान
से
उज्जैन-आलोट
संसदीय
सीट
काफी
मायने
रखती
है।
कभी
कांग्रेस
के
कब्जे
में
रही
यह
सीट
अब
लंबे
समय
से
भाजपा
के
गढ़
का
रूप
ले
चुकी
है।
भाजपा
के
गठन
के
बाद
तो
चुनाव
में
महज
एक
बार
ही
कांग्रेस
इस
पर
कब्जा
पा
सकी
है।
शुरुआत
से
अब
तक
के
कुल
17
चुनाव
में
12
बार
भाजपा
या
इससे
पूर्व
के
संबंधित
विचारधारा
के
दल
इस
सीट
पर
जीत
चुके
हैं।
लोकसभा
चुनाव
में
उज्जैन
आलोट
लोकसभा
सीट
को
इस
बार
सबसे
महत्वपूर्ण
माना
जा
रहा
है।
कांग्रेस
की
ओर
से
तेजतर्राट
विधायक
महेश
परमार
और
भाजपा
से
सांसद
रहे
अनिल
फिरोजिया
फिर
एक
बार
मैदान
में
है।
ऐसे
में
दोनों
ही
प्रमुख
राजनीतिक
दलों
ने
मध्य
प्रदेश
की
29
लोकसभा
सीट
पर
जीत
के
लिए
मंथन
शुरू
कर
दिया
है।
प्रदेश
की
इन
सीट
में
उज्जैन-आलोट
महत्वपूर्ण
सीट
में
से
एक
मानी
जाती
है,
क्योंकि
मालवा
का
बड़ा
भाग
इसमें
शामिल
होने
के
साथ
ही
इसका
क्षेत्रफल
भी
काफी
बड़ा
है।
सीट
के
राजनीतिक
इतिहास
को
देखें
तो
अधिकांश
चुनाव
में
यह
भाजपा
के
खाते
में
गई
है।
इसलिए
इसे
अब
भाजपा
के
गढ़
के
रूप
में
भी
देखा
जाने
लगा
है।
इस
चुनाव
में
भाजपा
जहां
अपने
गढ़
को
बचाने
में
लगेगी
वहीं
कांग्रेस
इसे
प्रतिद्वंद्वी
से
छीनकर
मालवा
के
बड़े
हिस्से
में
काबिज
होने
का
जतन
करेगी।
उज्जैन
आलोट
लोकसभा
सीट
की
बात
करें
तो
भाजपा
की
ओर
से
डॉ.
सत्यनारायण
जटिया
ने
सर्वाधिक
9
चुनाव
लड़े
और
7
जीते
हैं।
इस
सीट
पर
अब
तक
कुल
17
चुनाव
हुए
हैं।
इनमें
सर्वाधिक
भाजपा
के
वरिष्ठ
नेता
डॉ.
सत्यनारायण
जटिया
ने
9
बार
चुनाव
लड़ा।
इनमें
से
वे
7
चुनाव
जीते
हैं।
आखिरी
चुनाव
उन्होंने
तत्कालीन
कांग्रेस
प्रत्याशी
प्रेमचंद
गुड्डू
से
हारा
था,
जिसके
बाद
डॉ.
जटिया
ने
चुनाव
नहीं
लड़ा।
उज्जैन
संसदीय
क्षेत्र
8
विधानसभा
क्षेत्रों
से
मिलकर
बना
है।
इन
विधानसभाओं
में
उज्जैन
की
7
और
रतलाम
की
1
विधानसभा
आलोट
शामिल
है।
दरअसल,
इस
लोकसभा
सीट
के
तहत
आने
वाली
नागदा-खाचरौद
घटिया,
बड़नगर,
उज्जैन
उत्तर,
उज्जैन
दक्षिण,
अलोट,
सहित
8
विधानसभाओं
में
से
6
विधानसभा
क्षेत्रों
पर
भाजपा
विधायक
हैं।
जबकि
महिदपुर
और
तराना
पर
कांग्रेस
विधायक
हैं।
1984
के
बाद
यहां
भाजपा
और
कांग्रेस
के
बीच
ही
मुकाबला
रहा
है,
लेकिन
1984
और
2009
को
छोड़कर
कांग्रेस
यहां
कभी
भी
नहीं
जीत
पाई।
वहीं,
यहां
1984
से
अब
तक
8
बार
भाजपा
के
उम्मीदवार
जीत
हासिल
कर
चुके
हैं।
जानिए,
कब
किसे
कितने
वोटों
से
मिली
जीत
2019
के लोकसभा
चुनाव
में
भाजपा
के
अनिल
फिरोजिया
ने
उज्जैन
से
जीत
दर्ज
की।
उन्हें
791663
वोट
मिले,
जो
कुल
वोट
का
63.18%
था।
वहीं,
कांग्रेस
के
बाबूलाल
मालवीय
दूसरे
स्थान
पर
रहे।
उन्हें
426026
वोट
मिले
और
उनका
वोट
प्रतिशत
34%
था।
2014
में उज्जैन
लोकसभा
सीट
से
भाजपा
के
प्रोफेसर
चिंतामणि
मालवीय
ने
जीत
दर्ज
की
थी।
उन्होंने
641101
वोट
मिले,
जो
कुल
वोट
का
42.03
प्रतिशत
था।
वहीं,
कांग्रेस
के
प्रेमचंद
गुडडू
दूसरे
स्थान
पर
रहे
उन्हें
331438
वोट
मिले,
जो
कुल
वोटों
का
21.73%
था।
2009
में उज्जैन
लोकसभा
सीट
से
कांग्रेस
पार्टी
के
गुड्डू
प्रेमचंद
ने
जीत
दर्ज
की।
उन्हें
326905
वोट
मिले,
जो
कुल
वोटों
का
26.08%
था।
वहीं,
भाजपा
के
डॉ.
सत्यनारायण
जटिया
को
311064
वोट
मिले,
जो
कुल
वोटों
का
24.81%
था।
2004
में भाजपा
के
डॉ.
सत्यनारायण
जटिया
ने
जीत
दर्ज
की
उन्हें
कुल
369744
मिले.
वहीं,
कांग्रेस
के
प्रेमचंद
गुड्डू
को
299341
मिले।
1999
में भाजपा
के
डॉ.
सत्यनारायण
जटिया
ने
उज्जैन
लोकसभा
सीट
से
जीत
दर्ज
की।
उन्हें
360103
वोट
मिले,
जो
कुल
वोटों
का
54.22%
था।
वहीं
कांग्रेस
के
दूसरे
स्थान
पर
रहे,
उन्हें
कुल
292065
वोट
मिले,
जो
कुल
वोटों
का
43.98%
था।
ऐसा
है
जातिगत
समीकरण
उज्जैन
लोकसभा
सीट
पर
कुल
मतदाताओं
की
संख्या
14
लाख,
98
हजार,
473
है।
यहां
की
जातिगत
समीकरणों
की
बात
करें,
तो
यहां
सामान्य
वर्ग
के
मतदाता
24.6
प्रतिशत
हैं।
वहीं,
पिछड़े
वर्ग
के
मतदाताओं
की
संख्या
18.6
प्रतिशत
है।
इसके
अलावा,
एससी-एसटी
मतदाताओं
की
जनसंख्या
46.3
प्रतिशत
हैं।
यहां
अल्पसंख्यक
समाज
के
मतदाताओं
की
संख्या
मात्र
3.9
प्रतिशत
और
अन्य
6.6
प्रतिशत
हैं।
(उज्जैन
से
निलेश
नागर
की
रिपोर्ट)