
मंदसौर
जिले
के
भावगढ़
थाने
में
पदस्थ
एएसआई
सुरेश
निनामा,
आरक्षक
देवेंद्रकुमार
लवाना,
यशवंत
सिंह,
करन
सिंह
और
संविदा
कर्मचारी
मुकेश
कुमावत
के
खिलाफ
राजस्थान
के
प्रतापगढ़
कोतवाली
पुलिस
ने
धोखाधड़ी
और
फर्जीवाड़े
के
आरोप
में
केस
दर्ज
किया
है।
आरोप
है
कि
इन
पुलिसकर्मियों
ने
10
फरवरी
2025
को
राजस्थान
निवासी
एक
शराब
व्यापारी
पारसमल
मेवाड़ा
को
अवैध
रूप
से
अगवा
कर
85
पेटी
देशी
शराब
के
साथ
झूठे
केस
में
फंसा
दिया
था।
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पारसमल
मेवाड़ा
को
भावगढ़
पुलिस
ने
अवैध
शराब
रखने
के
आरोप
में
गिरफ्तार
किया
था।
वे
8
अप्रैल
को
इंदौर
हाईकोर्ट
से
जमानत
पर
रिहा
हुए।
इसके
बाद
उन्होंने
प्रतापगढ़
की
कोर्ट
में
परिवाद
दायर
कर
पूरी
घटना
का
विवरण
दिया।
कोर्ट
के
निर्देश
पर
पुलिस
ने
आरोपित
पुलिसकर्मियों
के
खिलाफ
IPC
की
धाराएं
140(3),
142,
61(2),
312
के
तहत
केस
दर्ज
किया
है।
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ये
भी
पढ़ें- मुठभेड़
के
बाद
कुख्यात
बदमाश
को
शॉर्ट
एनकाउंटर
में
किया
गिरफ्तार,
पुलिस
जवान
को
भी
लगी
गोली
परिवाद
में
लगाए
गंभीर
आरोप
पारसमल
ने
बताया
कि
उनकी
पुत्री
सरोज
मेवाड़ा
के
नाम
से
प्रतापगढ़
जिले
के
खेरोट
गांव
में
लाइसेंसी
वाइन
शॉप
है।
10
फरवरी
को
उनका
चालक
दशरथ
मीणा
अधिकृत
वाहन
RJ
35
UA
0639
से
शराब
लेकर
लाइसेंसी
गोदाम
जा
रहा
था।
इस
दौरान
अखेपुर
गांव
के
पास
दो
अज्ञात
बाइक
सवारों
ने
हथियार
दिखाकर
चालक
को
भगा
दिया
और
पारसमल
को
अगवा
कर
लिया।
इसके
बाद
भावगढ़
पुलिस
ने
उन्हें
झूठे
शराब
तस्करी
के
केस
में
फंसा
दिया।
भावगढ़
पुलिस
ने
दर्ज
किया
था
प्रकरण
भावगढ़
थाना
पुलिस
ने
10
फरवरी
को
पारसमल
को
थार
वाहन
RJ
35
UA
0639
में
85
पेटी
देशी
शराब
के
साथ
गिरफ्तार
करने
का
दावा
किया
था।
उनके
खिलाफ
मध्यप्रदेश
आबकारी
अधिनियम
की
धारा
34(2)
के
तहत
प्रकरण
दर्ज
कर
27
मार्च
को
चालान
कोर्ट
में
पेश
किया
था।
यह
मामला
अभी
न्यायालय
में
विचाराधीन
है।
ये
भी
पढ़ें- 65
हजार
चालान,
2
करोड़
कमाई,
जाम
में
फंसती
जनता
और
पुलिस
गायब,
नेता
कर
रहे
शक्ति
प्रदर्शन
एसपी
बोले—हमें
नहीं
सुना
गया,
करेंगे
अपील
मंदसौर
के
पुलिस
अधीक्षक
अभिषेक
आनंद
ने
कहा
कि
इस
मामले
में
हमें
सुने
बिना
कार्रवाई की
गई
है।
हम
इसके
खिलाफ
जल्द
ही
अपील
करेंगे।
भावगढ़
पुलिस
ने
विधिसम्मत
तरीके
से
कार्रवाई
की
और
कोर्ट
में
चालान
पेश
किया
है।
कॉल
डिटेल
से
खुल
सकती
है
सच्चाई
परिवाद
में
पारसमल
ने
मांग
की
है
कि
आरोपी
पुलिसकर्मियों
की
कॉल
डिटेल
खंगाली
जाए,
जिससे
यह
साबित
किया
जा
सके
कि
वे
घटना
के
दिन
राजस्थान
की
सीमा
में
मौजूद
थे।
इससे
पूरी
साजिश
का
पर्दाफाश
हो
सकता
है।