
छोटे
बड़े
वाहनों
की
गुत्थम
गुत्था
का
आलम
किसी
एक
दिन
का
किस्सा
नहीं
है।
बल्कि
पुराने
शहर
के
बाशिंदों
के
लिए
हर
रोज
का
नसीब
बन
गया
है।
सुबह
से
लेकर
देर
रात
तक
बने
रहने
वाले
इन
हालात
के
आगे
न
यातायात
विभाग
का
कोई
फार्मूला
काम
आता
है
और
न
ही
किसी
के
कोई
प्रयास
कोई
असर
छोड़ते
हैं।
विज्ञापन
ऐसे
में
इज्तिमा
के
दौरान
की
जाने
वालीं
व्यवस्थाएं
नायाब
परिणाम
लेकर
आती
है।
चार
दिन
टिकने
वाली
यह
सुदृढ़
व्यवस्था
अगले
ही
दिन
क्यों
धराशाई
हो
जाती
है,
इसको
लेकर
सवाल
उठाए
जाते
हैं।
प्रश्न
यह
भी
लहराता
है
कि
अप्रशिक्षित
और
विषय
के
गैर
जानकार
यह
काम
संभाल
सकते
हैं
तो
पुलिस
महकमे
की
बड़ी
और
ट्रेंड
टीम
के
बस
में
यह
क्यों
नहीं
है।
विज्ञापन
इज्तिमा
में
ट्रैफिक
मैनेजमेंट
आलमी
तबलीगी
इज्तिमा
आयोजन
के
दौरान
ट्रैफिक
मैनेजमेंट
का
एक
बेहतर
उदाहरण
देखने
को
मिलता
है।
बस
स्टैंड,
रेलवे
स्टेशन
से
लेकर
ईटखेड़ी
घासीपुरा
तक
वाहनों
को
सुचारू
रखने
पांच
हजार
वालंटियर्स
इंतजाम
संभालते
हैं।
वाहनों
को
एक
लेन
और
लगातार
चलते
रहने
की
कोशिश
रहती
है।
ट्रैफिक
पुलिस
के
साथ
वालंटियर्स
की
तैनाती
होती
है।
पूरे
रास्ते
पर
अलग-अलग
टुकड़ों
में
करीब
पांच
हजार
लोग
इस
इंतजाम
को
देखते
हैं।
इनकी
ड्यूटी
बदलती
रहती
है।
ट्रांसपोर्ट
कारोबारी
निजाम
कुरैशी
ने
कई
साल
से
इंतजाम
कर
रहे
हैं।
ट्रैफिक
जाम
की
मुख्य
वजह
वाहनों
के
पहिए
थमना
होता
है।
कोशिश
रहती
है
कोई
रूक
न
पाए
पुतलीघर
निवासी
रिजवान
अहमद
सोशल
ग्रुप
से
जुड़े
हैं।
इज्तिमा
में
लगातार
सेवादार
के
रूप
में
काम
करते
हैं।
ये
बताते
हैं
कि
एक
वाहन
के
रुकने
या
ठहरने
से
पूरा
ट्रैफिक
अटकता
है।
पूरे
रास्ते
में
हमारी
कोशिश
पहियों
को
रुकने
न
देने
की
होती
है।
बीच
में
किसी
को
दिक्कत
आती
है
तो
तुरंत
सड़क
किनारे
कर
मदद
की
जाती
है।
तीन
मुख्य
चौराहे,
एक
ब्रिज,
तीन
क्रॉसिंग
और
मेट्रो
की
बैरिकेडिंग
इज्तिमा
के
रास्ते
में
तीन
मुख्य
चौराहे
हैं।
पहला
चौराहा
भोपाल
टॉकीज
का
है।
यहां
से
आगे
जाने
पर
डीआईजी
बंगला
और
करोद
चौराहा
है।
इन
जगहों
पर
ट्रैफिक
मैनेजमेंट
के
लिए
सबसे
ज्यादा
जोर
दिया
है।
करीब
15
साल
से
इज्तिमा
की
ट्रैफिक
व्यवस्था
से
जुड़े
नौमान
अहमद
बताते
हैं
कि
उनके
पास
रेलवे
स्टेशन
के
पास
का
हिस्सा
है।
पहले
करोद
में
तैनाती
रहती
थी।
श्रेणीबद्ध
पार्किंग
इज्तिमा
स्थल
के
आसपास
45
पार्किंग
हैं।
यह
भी
ट्रैफिक
मैनेजमेंट
में
अहम
भूमिका
निभाती
है।
इज्तिमा
स्थल
से
करीब
दो
किमी
पहले
से
इन्हें
बनाने
की
शुरुआत
होती
है।
एक
के
बाद
एक
भरने
के
बाद
ही
दूसरी
पार्किंग
खोली
जाती
है।
शहर
में
हर
दिन
गुत्थम
गुत्थी
पुराने
शहर
के
करोंद,
डीआईजी
बंगला,
सिंधी
कॉलोनी,
भोपाल
टॉकीज,
छोला
क्षेत्र,
नादरा
बस
स्टैंड,
रेलवे
स्टेशन,
रॉयल
मार्केट
आदि
स्थानों
पर
सारा
दिन
यातायात
जाम
के
कारण
लोग
परेशान
रहते
हैं।
पुलिस
के
पास
बड़ा
अमला
राजधानी
में
पुलिस
प्रशासन
के
पास
बड़ा
अमला
मौजूद
है।
इनमें
बड़ी
तादाद
यातयात
व्यवस्था
संभालने
वालों
की
है।
इसके
बावजूद
उचित
कार्य
प्लान
न
होने
से
लोगों
को
सड़क
पर
मुश्किलों
का
सामना
करना
पड़ता
है।